The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Science
  • China Shenlong space plane launched on its 4th mysterious mission

चीन का 'सीक्रेट' स्पेस प्लेन Shenlong फिर अंतरिक्ष पहुंचा, अमेरिका क्यों नर्वस है?

क्या चीन अपने Shenlong Space Plane का इस्तेमाल दूसरे देशों की जासूसी करने के लिए कर रहा है? क्या यह स्पेस से हमला कर सकता है? क्या China का यह सीक्रेट प्लेन वाकई ‘सीक्रेट’ है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशेंगे.

Advertisement
China Shenlong space plane
चीन के इस स्पेस प्लेन का नाम ‘शेनलॉन्ग’ है. (फोटो: AI/इंडिया टुडे)
pic
अर्पित कटियार
24 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 09:08 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

चीन ने एक बार फिर अपना ‘सीक्रेट’ स्पेस प्लेन अंतरिक्ष में भेज दिया है. सीक्रेट इसलिए क्योंकि किसी को नहीं पता कि स्पेस में आखिर यह कर क्या रहा है. चीन की सरकार ने इसके बारे में बहुत कम जानकारी दी. बस इतना बताया है कि ‘यह सिर्फ टेक्नोलॉजी टेस्ट करने के लिए है’. 

लेकिन अमेरिका की आंखों में चीन का यह मिशन खटक रहा है. उसके पास भी एक ऐसा स्पेस प्लेन है, जो सीक्रेट मिशन करता है. और अमेरिका भी अपने प्लेन के बारे में यही बताता है, जो चीन अब बता रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चीन अपने इस स्पेस प्लेन का इस्तेमाल दूसरे देशों की जासूसी करने के लिए कर रहा है? क्या यह स्पेस से हमला कर सकता है? क्या चीन का यह सीक्रेट प्लेन वाकई ‘सीक्रेट’ है?

चीन का स्पेस प्लेन क्या है?

Space.com की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के इस स्पेस प्लेन का नाम ‘शेनलॉन्ग’ है, जिसका मतलब होता है ‘डिवाइन ड्रैगन’. यह 6 फरवरी को गोबी रेगिस्तान से लॉन्च हुआ. लॉन्चिंग चीन के ‘जिउक्कान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर’ से हुई. यह स्पेस प्लेन सैटेलाइट की तरह धरती का चक्कर लगाता है. फिर हवाई जहाज की तरह वापस उतरता है. यह रीयूजेबल (Reusable) है, यानी इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है.

शेनलॉन्ग का यह अब तक का चौथा ऑर्बिटल मिशन है. यानी यह धरती के चारों ओर घूमते हुए अंतरिक्ष में काम करेगा. शेनलॉन्ग के पिछले तीन मिशन सितंबर 2020, मई 2023 और सितंबर 2024 में हुए थे. ये मिशन दो दिन से लेकर करीब नौ महीने तक चले थे.

ऊपर जाकर क्या करता है?

इस सवाल का सीधा जवाब किसी को नहीं पता है. चीन की सरकार ने शेनलॉन्ग के बारे में बहुत कम और सीमित जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक बयान बहुत गोलमोल है. इसमें सिर्फ इतना कहा गया है,

Image embed

चीन के इस मिशन पर शक क्यों?

शेनलॉन्ग की तुलना अक्सर अमेरिका के X-37B स्पेस प्लेन से की जाती है. अमेरिका का यह प्लेन भी कथित तौर पर सीक्रेट मिशन करता है. X-37B को अमेरिकी स्पेस फोर्स चलाती है. अमेरिका भी X-37B के मिशन की ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं करता और उसे टेक्नोलॉजी टेस्ट करने वाला प्लेन बताता है. इसी वजह से दोनों देशों के प्रोग्राम को लेकर शक और अटकलें लगती रहती हैं.

X-37B ने पहली बार 2010 में ऑर्बिट में प्रवेश किया था और अभी यह अपने आठवें मिशन पर है. जिसे पिछले अगस्त में स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट पर लॉन्च किया गया था.

क्या ये स्पेस से हमला कर सकता है?

स्पेस सुरक्षा पर काम करने वाली संस्था सिक्योर वर्ल्ड फाउंडेशन (SWF) के मुताबिक, ऐसे स्पेस प्लेन सीधे धरती पर हमला नहीं कर सकते. इसकी कई वजहें हैं.

- यह आकार में छोटा होता है.

- इसमें हथियार ले जाने की जगह और ताकत बहुत सीमित होती है. 

- यह बहुत धीमी गति से धरती पर वापस आता है.

इसी वजह से एक्सपर्ट्स मानते हैं कि शेनलॉन्ग या X-37B जैसे स्पेस प्लेन सीधे बमबारी के लिए नहीं बने हैं. 

ये भी पढ़ें: चीन के 'अंतरिक्ष युद्धपोत' वाले वीडियो से दुनिया में खलबली, 'स्टार वॉर्स' से हो रही तुलना

फिर चिंता किस बात की है?

रिपोर्ट के मुताबिक, चिंता यह नहीं है कि X-37B या शेनलॉन्ग पृथ्वी पर बम बरसाएंगे. असली चिंता एक तकनीक को लेकर है जिसे रेंडेजवस एंड प्रॉक्सिमिटी ऑपरेशन (RPO) कहा जाता है. यानी अंतरिक्ष में जाकर किसी दूसरे सैटेलाइट के बहुत पास पहुंचना, उसके साथ मूवमेंट करना, उसे पकड़ना, ठीक करना या हटाना.

पिछले मिशनों में देखा गया है कि शेनलॉन्ग ने अंतरिक्ष में कुछ चीज़ें छोड़ीं और कथित तौर पर बाद में उनके पास जाकर गतिविधियां कीं. यह जानकारी चीन ने नहीं दी, बल्कि अमेरिकी सेना, प्राइवेट स्पेस कंपनियों और एस्ट्रोनॉमर्स की ट्रैकिंग से सामने आई. 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यही तकनीक भविष्य में सैटेलाइट की मरम्मत करने, दोबारा ईंधन भरने और पुराने सैटेलाइट को हटाने जैसे कामों में इस्तेमाल हो सकती है. लेकिन इसी तकनीक का इस्तेमाल दुश्मन देश के सैटेलाइट से छेड़छाड़ के लिए भी किया जा सकता है, इसी वजह से दूसरे देश चिंतित हैं.

SWF की स्पेस सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी की चीफ डायरेक्टर विक्टोरिया सैमसन का कहना है कि आज के समय में जो देश अंतरिक्ष में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें RPO जैसी तकनीक सीखनी ही होगी. हालांकि वे यह भी मानती हैं कि अगर कोई देश अपने ऐसे मिशनों को लेकर पारदर्शिता दिखाए, तो बेवजह के डर और अफवाहें कम हो सकती हैं.

वीडियो: सोशल लिस्ट: शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुँच गए, लेकिन लोग जाति से आगे नहीं बढ़ पाए

Advertisement

Advertisement

()