चीन के 'अंतरिक्ष युद्धपोत' वाले वीडियो से दुनिया में खलबली, 'स्टार वॉर्स' से हो रही तुलना
चीन का दावा है कि यह स्पेस एयरक्राफ्ट कैरियर हवा और अंतरिक्ष में दुश्मनों पर हमला कर सकेगा. चीन का यह कॉन्सेप्ट अगर सच में साकार हो जाता है तो उसे भविष्य के संघर्षों में उसे भारी बढ़त मिल सकती है. हालांकि एक्सपर्ट्स फिलहाल इसे एक कॉन्सेप्ट या प्रोपेगैंडा बता रहे हैं.
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चीन ने अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले एक ‘अंतरिक्ष युद्धपोत’ (स्पेस एयरक्राफ्ट कैरियर) का मॉडल दुनिया के सामने रखा है. यह हॉलीवुड साइंस फिक्शन फ्रेंचाइजी ‘स्टार वॉर्स’ में एलियंस से भिड़ंत के लिए इस्तेमाल किए गए स्पेसक्राफ्ट कैरियर की तरह दिखता है. इसका नाम 'लुआननियाओ' रखा गया है, जोकि पौराणिक चीनी पक्षी के नाम से लिया गया है. चीन का दावा है कि 20 से 30 साल में यह कॉन्सेप्ट ऑपरेशनल हो सकता है.
चीन के सरकारी मीडिया चैनल (CCTV) ने हाल ही में इस स्पेस एयरक्राफ्ट कैरियर का एक कंप्यूटर जेनरेटेड वीडियो जारी किया है. इसमें ग्रे कलर का विशाल जहाज अंतरिक्ष में उड़ रहा है. वीडियो में इसे स्पेस में तेजी से उड़ते और जेट्स छोड़ते दिखाया गया है, जैसा हम अक्सर हॉलीवुड साइंस फिक्शन फिल्मों में देखते हैं.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इसे स्पेस की सीमा पर उड़ने और अनमैन्ड फाइटर जेट्स को तैनात करके नीचे स्थित टारगेट पर मिसाइल दागने के लिए डिजाइन किया गया है. चीन का दावा है कि यह पोत हवा और अंतरिक्ष में दुश्मनों पर हमला कर सकेगा. चीन का यह कॉन्सेप्ट अगर सच में साकार हो जाता है तो उसे भविष्य के संघर्षों में उसे भारी बढ़त मिल सकती है.
हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स इसे एक कॉन्सेप्ट या प्रोपेगैंडा भी बता रहे हैं.
लुआननियाओ कैसा होगा?
चीन ने स्पेस एयरक्राफ्ट कैरियर का जो मॉडल दुनिया के सामने रखा है वह एक विशालकाय तिकोन जहाज होगा, जो 242 मीटर (लगभग 800 फीट) लंबा होगा. इसके पंखों की चौड़ाई 684 मीटर (लगभग 2 हजार 244 फीट) होगी. इसका टेकऑप वजन 1 लाख 20 हजार टन तक होगा, जोकि दुनिया के सबसे बड़े जहाजों से भी बड़ा है.
यह नानतियानमेन (South Heavenly Gate) प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे चीन की एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) विकसित कर रही है. यह प्रोजेक्ट हवा और अंतरिक्ष को एक साथ जोड़कर डिफेंस सिस्टम बनाने पर काम कर रहा है.
एक्सपर्ट क्या बता रहे हैं?
कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ चीन के इस कॉन्सेप्ट को व्यावहारिक नहीं मान रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ एशिया इंस्टीट्यूट से जुड़े पीटर लेटन ने बताया कि इतने बड़े जहाज को उड़ाने के लिए बहुत ज्यादा ईंधन और नई प्रोपल्शन सिस्टम चाहिए, जो अभी नहीं है. अगर इसे ऑर्बिट में डाला जाए तो स्पेस डेब्रिस (कचरा) से खतरा होगा.
जर्मन मीडिया संस्थान DW के मुताबिक, जर्मनी के राजनयिक और अंतरिक्ष विश्लेषक हेनरिक क्रेफ्ट ने कहा कि मौजूदा दौर में यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से वास्तविकता से दूर है. लेकिन वे इसे एक लॉन्ग टर्म प्लानिंग के हिस्से के तौर पर देखते हैं.
अमेरिकी विश्लेषणों में भी लुआननिआओ को एक रणनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया है. नेशनल इंटरेस्ट में छपे एक आर्टिकल में लेखक ब्रैंडन जे. वेइचर्ट ने लिखा है कि यह एक प्रोपगेंडा का हिस्सा है. इसे पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ाने और उनका समय और संसाधनों को बर्बाद करने के लिए डिजाइन किया गया है.
वहीं अंतरिक्ष विश्लेषक क्रेफ्ट मानते हैं कि ताइवान को लेकर चल रहे संघर्ष की पृष्ठभूमि में अमेरिका को संदेश देने के लिए चीन ने कुछ ऐसा प्रस्तुत किया है, जिससे वह अपनी छाप छोड़ सके.
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