शादी के कार्ड पर छपवानी होगी दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि, महाराष्ट्र सरकार क्यों लाई नया नियम?
महाराष्ट्र सरकार राज्य में बाल विवाह को रोकने के लिए नए नियम लागू करने पर विचार कर रही है. इसकी जानकारी खुद सूबे की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में दी.

महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार बाल विवाह को रोकने के लिए नया नियम लाने पर विचार कर रही है. इसके मुताबिक, अब शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन के जन्म की तारीख लिखना जरूरी होगा. ये जानकारी खुद राज्य की महिला और बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में दी है. अदिति ने यह भी बताया कि ऐसा करने से कपल के उम्र की पुष्टि करना आसान होगा. दरअसल, महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में बाल विवाह के मामलों में तेजी आई थी, जिसके बाद महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से इस नियम की सिफारिश की गई थी.
बाल विवाह का आंकड़ाइंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अदिति तटकरे ने विधानसभा के अंदर महाराष्ट्र में बाल विवाह को लेकर सरकारी डेटा पेश किया. इससे पता चला कि प्रदेश के कई जिलों में 18 साल की उम्र से पहले ही कई लड़कियों की शादी कर दी गई. बाल विवाह का सबसे बड़ा डेटा परभणी जिले से आया. यहां करीब 48% लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले कर दी गई. परभणी के बाद बीड में ये आंकड़ा 43.7%, धुले में 40.5% और सोलापुर में 40.3% दर्ज किया गया.
हालांकि, साल 2023-24 से ये आंकड़े कम होने लगे. साल 2019-21 में ये दर घटकर 21.9% से घटकर 19.6% हो गई जबकि, नेशनल एवरेज 20.1% है. अदिति ने विधानसभा में जोर देते हुए कहा कि साल 2025-26 में करीब 1434 बाल विवाह रोके गए.
राजस्थान मॉडल होगा लागूअदिति ने आगे बताया कि राजस्थान में भी इसी मॉडल के तहत बाल विवाह को रोकने में मदद मिली है. मंत्री ने आगे कहा कि इस नियम में सरकार प्रिंटिंग प्रेस, वेडिंग हॉल और इवेंट ऑर्गेनाइजर को भी शामिल करेगी. ताकि, ये लोग इस नियम का पालन कराने में मदद कर सकें. वहीं, जो लोग इस सरकारी गाइडलाइंस को तोड़ते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
दरअसल, महाराष्ट्र के बीड और मराठवाड़ा जैसे ग्रामीण इलाकों में गन्ने की कटाई के दौरान बाल विवाह की ज्यादा घटनाएं नोटिस की गई. मजदूरों के मौसमी प्रवास के दौरान बाल विवाह में काफी इजाफा हुआ है. महाराष्ट्र सरकार इस समस्या से भी निपटने की तैयारी में है. इसके लिए प्रवासी मजदूरों तक पहुंचने और बाल देखभाल केंद्रों जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी काम चल रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि मजदूरों के प्रवास के दौरान बच्चे सुरक्षित रहें. प्रदेश सरकार अपनी जांच के पहले राजस्थान के इस मॉडल का अध्ययन कर रही है.
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