कर्नाटक में कांग्रेस की टेंशन दूर ही नहीं हो रही, शपथ लेने के 48 घंटे में मंत्री ने दिया इस्तीफा
Karnataka minister resigns: कर्नाटक में डीके शिवकुमार की नई सरकार में पोर्टफोलियो मिलने के 12 घंटे बाद ही एक मंत्री ने इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने का कारण भी उन्होंने बताया है. इस घटना ने कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दी है.

कर्नाटक की नई सरकार के मंत्रियों को पोर्टफोलियो मिलने के 12 घंटे के भीतर ही मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने बताया कि वे जल संसाधन विभाग मिलने से नाराज हैं. उन्होंने साफ कहा कि वे बेंगलुरू डेवलपमेंट डिपार्टमेंट चाहते थे. दावा भी किया कि खुद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दो बार उन्हें ये डिपार्टमेंट देने का वादा किया था, लेकिन जब विभागों का बंटवारा हुआ, तो उन्हें जल संसाधन विभाग थमा दिया गया.
हालांकि इस्तीफा देते हुए रामलिंगा ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस विधायक बने रहेंगे. ये भी कहा कि वो डीके या सिद्धारमैया, दोनों में से किसी से भी नाराज नहीं हैं. इधर डीके शिवकुमार डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं. कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है. रामलिंगा उनके अच्छे दोस्त हैं. कैबिनेट में उनके सबसे करीबी सहयोगियों में से एक हैं.
किसे मिला डेवलपमेंट विभाग?जिस बेंगलुरु डेवलपमेंट डिपार्टमेंट को लेकर रामलिंगा नाराज हैं, वो कृष्णा बायरे गौड़ा को दिया गया है. सिद्धारमैया सरकार में उनके पास रेवेन्यू मिनिस्ट्री थी. इससे पहले काफी सोच विचार के बाद कर्नाटक सरकार ने 4 मई की देर शाम मंत्रियों के विभागों की घोषणा की.
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने फाइनेंस, कैबिनेट मामले, कार्मिक, खुफिया और प्रशासनिक सुधार जैसे विभाग अपने पास रखे. डिप्टी सीएम परमेश्वर राव को रेवेन्यू और युवा सशक्तिकरण और खेल मंत्रालय दिया गया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रिंयक खरगे को गृह मंत्रालय और IT विभाग सौंपा गया है. ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग, जो पूर्व सीएम सिद्धारमैया के पास थे, अब ईश्वर खंद्रे को दे दिया गया है. वहीं सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र को शहरी विकास मंत्री बनाया गया है.
ये भी पढ़ें: डीके शिवकुमार को बेंगलुरु ने किया मजबूर, शपथ ग्रहण थोड़ा 'फीका' रहेगा
डीके की सरकार के लिए बड़ा झटका?मुख्यमंत्री बनने के बाद भी डीके के लिए चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं. नई कैबिनेट बनते ही रामलिंगा रेड्डी जैसे सीनियर मंत्री ने की खुलेआम बगावत और इस्तीफा देना उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. रामलिंगा सिद्धारमैया सरकार में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर थे. वे कर्नाटक के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं.
राजधानी बेंगलुरू और आसपास के इलाकों में उनका काफी प्रभाव माना जाता है. लगातार 8 बार से वो विधानसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं. 2008 में सीट के गठन के बाद से बेंगलुरू शहरी जिले की बीटीएम लेआउट सीट से विधायक हैं. ऐसे में सीनियर नेता को नाराज करने का जोखिम डीके शायद अभी नहीं उठाना चाहेंगे. कहा भी है कि उन्हें मनाने की कोशिश की जाएगी.
बता दें, दिल्ली में कांग्रेस की एक हाई लेवल मीटिंग हुई थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच के कलह को सुलझाया गया. आखिरकार डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री का पद दिया गया और सिद्धारमैया को राज्यसभा के रास्ते दिल्ली आने को कहा गया.
वीडियो: सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी प्रोटेस्ट पर कौन सी शर्त खुलेआम बता दी?


