(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञोंके अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूरपूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)लिवर शरीर का एक बहुत ही अहम अंग है. इसका काम है डाईजेस्टिव ट्रैक्ट से आने वालेखून को फ़िल्टर करना और ये साफ़ खून शरीर में आगे पास करना. अब ये डाईजेस्टिव ट्रैक्टक्या होता है? ये वो अंग होते हैं जिनकी मदद से अपना खाना और पीना शरीर में पचताहै, हज़म होता है, सोखा जाता है और फिर वो वेस्ट शरीर को अलविदा कह देता है. अब येसुनकर आपको इतना तो समझ में आ ही गया होगा कि लिवर जिंदा रहने के लिए कितना ज़रूरीहोता. आज हम बात कर रहे हैं लिवर में होने वाले कैंसर के बारे में. किसी को भी होसकता है.ख़ासतौर पर उन लोगों में जिन्हें लिवर से जुड़ी बीमारियां हो जाती हैं, जैसेहेपेटाइटिस. भारतीयों में हेपेटाइटिस के कई मामले देखे जाते हैं, इसलिए लिवर कैंसरका ख़तरा बना रहता है. रिसर्च गेट के मुताबिक, लिवर कैंसर के केसेस हिंदुस्तान मेंबहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं. 30 हज़ार से 50 हज़ार केसेस कम से कम हर साल तो रिपोर्टहोते ही हैं. तो डॉक्टर्स से सबसे पहले समझ लेते हैं कि लिवर कैंसर क्यों होता हैऔर इसे जल्दी कैसे पकड़ें? लिवर कैंसर क्या और क्यों होता है? ये हमें बताया डॉक्टरविनीत तलवार ने.डॉक्टर विनीत तलवार, डायरेक्टर, ऑन्कोलॉजी, राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट, नईदिल्ली-जो लिवर किसी बीमारी के कारण चपेट में आया होता है.-जिसे क्रोनिक लिवर डिजीज बोलते हैं.-जैसे लंबे अरसे की लिवर की बीमारी, चाहे वो हेपेटाइटिस बी से हो, चाहे हेपेटाइटिससी से हो या एक तरह का फंगस होता है अफ्लाटॉक्सिन, उससे हुई हो.-शराब का सेवन करने से हो.-अगर लंबे अरसे तक इनसे कोई भी बीमारी होती है जो क्रोनिक लिवर डिजीज कर सकती है,उससे लिवर कैंसर हो सकता है.-लिवर कैंसर होने के ये कारण आज से 10 साल पहले थे.-आज के समय में चलना-फिरना, रहन-सहन में बहुत बदलाव आ गया है.- लोग शारीरिक एक्सरसाइज कम करते हैं.-इस केस में वज़न बढ़ जाता है.-इससे एक नई चीज़ होती है जिसे कहते हैं फैटी लिवर.-ये फैट लिवर के अंदर जाकर जमा हो जाता है.-कुछ समय बाद क्रोनिक लिवर डिजीज, जिसे सेरोसिस कहते हैं, वो हो सकता है.-इन सब कारणों से लिवर का कैंसर हो सकता है.अगर लंबे अरसे तक इनसे कोई भी बीमारी होती है जो क्रोनिक लिवर डिजीज कर सकती है,उससे लिवर कैंसर हो सकता है-पहले लिवर के अंदर सिरोसिस होता है फिर कैंसर हो जाता है. लक्षण -लिवर कैंसर मेंकोई ऐसा लक्षण नहीं होता है जिसे देख के कहा जा सके कि ये लिवर का कैंसर ही है.-असाधारण लक्षण बहुत कम होते हैं.-साधारण लक्षण होते हैं जैसे थकान, वज़न कम हो जाना.-लिवर कम काम करता है तो पीलिया हो जाता है.-पेट सूज जाता है.-पेट में पानी भर जाता है.-खाने की नली, जिसे फ़ूड पाइप बोलते हैं, उसके अंदर नसें मोटी हो जाती हैं और फटजाती हैं.-जिसके कारण खून भी निकल सकता है.-ये लक्षण क्रोनिक लिवर डिजीज और लिवर कैंसर दोनों में दिखते हैं.-लिवर का टेस्ट ठीक नहीं आता.-डेली के काम नहीं हो पाते. डायग्नोसिस -जब इन लक्षणों के साथ मरीज़ आता है तो उसकासीटी स्कैन किया जाता है.-जिससे इस बीमारी को पकड़ा जा सकता है.खाने की नली, जिसे फ़ूड पाइप बोलते हैं, उसके अंदर नसें मोटी हो जाती हैं और फट जातीहैं-एक स्पेशल टेस्ट होता है जिसे अल्फ़ा फ़ीटो प्रोटीन कहते हैं, जो लिवर कैंसर मेंबहुत बढ़ जाता है. उससे पता लगाया जाता है. इलाज -अगर कैंसर केवल लिवर के अंदर तक हीसीमित होता है, एक-दो ही स्पॉट नज़र आते हैं-तो उनको काटकर निकाल दिया जाता है, जिसे लोबेक्टोमी कहा जाता है.-अगर लिवर के अंदर कैंसर के 4-5 स्पॉट होते हैं, 2-3 सेंटीमीटर लंबे तो इन केसेसमें लिवर ट्रांसप्लांट भी कर सकते हैं.-जिसमें पूरा लिवर निकालकर, किसी डोनर का लिवर लगाया जा सकता है.-लेकिन कैंसर अगर लिवर से निकलकर शरीर के बाकी हिस्सों में फैल जाए.-जैसे हड्डियों, फेफड़ों या पेट के अंदर मौजूद गिल्टियों में चला जाए तो उसमें नईटेक्नीक का इस्तेमाल किया जाता है.-जिसे TACE कहा जाता है.-इसमें जो नाड़ी उस कैंसर को ख़ुराक पहुंचाती है, उसी के अंदर कीमो का इंजेक्शन डालदिया जाता है.-उस नाड़ी को रोक दिया जाता है.-इससे कैंसर का सारा-खानपान बंद हो जाता है.-कैंसर खत्म हो जाता है.अगर लिवर के अंदर कैंसर के 4-5 स्पॉट होते हैं, 2-3 सेंटीमीटर लंबे तो इन केसेस मेंलिवर ट्रांसप्लांट भी कर सकते हैं-इसके साथ-साथ कुछ दवाइयां टैबलेट के रूप में दी जाती हैं.-लेटेस्ट इम्यूनो थेरेपी दी जा सकती है.-इनको मैजिक बुलेट्स बोला जाता है.-अगर बीमारी लिवर तक सीमित होती है तो मरीज़ को लंबा समय मिलता है.-अगर बीमारी लिवर से बाहर निकल जाती है तो मरीज़ के पास ज़्यादा समय नहीं होता.-पर सीमित समय में भी ज़िंदगी की क्वालिटी अच्छी बनाई जा सकती है.-ऐसा करने से बीमारी कंट्रोल की जा सकती है या कैंसर शरीर से बाहर निकाला जा सकताहै.-अगर किसी भी मरीज़ को पीलिया हो रहा हो, पेट सूज रहा हो, पेट में पानी भर जाए, लिवरके टेस्ट ठीक न आएं तो हेपेटाइटिस के आलावा लिवर कैंसर होने का शक रहता है.लिवर कैंसर के साथ दिक्कत ये है कि इसके लक्षण तुरंत पकड़ में नहीं आते. इसलिए अक्सरइसका डायग्नोसिस लेट हो जाता है. और जब तक पता चलता है, ये कैंसर शरीर में फैल चुकाहोता है. अब ऐसे में क्या करें? अगर लिवर की कोई बीमारी हुई है तो ध्यान देने कीज़रुरत है. ख़ासतौर पर हेपेटाइटिस और सिरोसिस. शराब से जितना हो सके, दूर ही रहिए.डॉक्टर साहब के बताए गए लक्षण दिखने पर डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं. देरी न करें.