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इंटरमिटेंट फास्टिंग का 16:8 प्लान वजन घटाने में 'सबसे कारगर', फॉलो कैसे करना है? डॉक्टर से जानें

Intermittent fasting के अपने फायदे और नुकसान हैं. कुछ मामलों में इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करने की सलाह भी दी जाती है. एक्सपर्ट से जानिए कि कौन सी Intermittent fasting कैसे करनी है? क्या फायदे-नुकसान हैं?

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किसी भी डाइट प्लान को बिना डॉक्टर की सलाह लिए फॉलो न करें (सांकेतिक फोटो)
30 जनवरी 2024 (Updated: 30 जनवरी 2024, 16:58 IST)
Updated: 30 जनवरी 2024 16:58 IST
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इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent fasting). ये एक तरह का डाइटिंग प्लान है, जो आजकल काफ़ी पॉपुलर है. वज़न घटाने और डायबिटीज़ को कंट्रोल में रखने के लिए लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग का सहारा ले रहे हैं. इसका ही एक रूप है 16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग, जिसके बारे में हमारे बहुत सारे व्यूअर्स जानना चाहते हैं. आज हम एक्सपर्ट से जानेंगे 16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है? ये कैसे की जाती है? इसके फ़ायदे और नुकसान क्या हैं? और सबसे ज़रूरी बात इसमें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

Intermittent fasting 16:8 क्या है?

ये हमें बताया डायटीशियन कोमल मलिक ने.

(कोमल मलिक, हेड डायटीशियन, एशियन हॉस्पिटल, फरीदाबाद)

आजकल इंटरमिटेंट फास्टिंग काफी चर्चा में है. कुछ लोग वज़न घटाने के लिए तो कुछ लोग डायबिटीज़ के चलते इंटरमिटेंट फास्टिंग फॉलो करते हैं. इंटरमिटेंट फास्टिंग में काफी अलग-अलग तरह के डाइट प्लांस होते हैं. इनमें सबसे प्रचलित प्लान है 16:8. इसके अलावा इंटरमिटेंट फास्टिंग में 20:4 और 18:6 प्लान भी होते हैं. लेकिन इनमें सबसे आसान और लंबे समय तक फॉलो किया जाने वाला प्लान है 16:8.

16:8 के प्लान में दिन के 24 घंटों को दो हिस्सों में बांटा जाता है. इसमें दिन के 8 घंटों को फीस्टिंग विंडो कहा जाता है, जिसमें खाना खाया जाता है. वहीं बचे हुए 16 घंटों को फास्टिंग विंडो कहा जाता है, यानी इस दौरान कुछ भी नहीं खाया जाता. 8 घंटों के दौरान नॉर्मल तरीके से खाना खा सकते हैं. यानी अगर दिन का आखिरी खाना शाम 7 बजे खाया है, तो अगले दिन का पहला खाना सुबह 11 बजे खाया जाएगा. इसका मतलब ये है कि खाना सुबह के 11 बजे से शाम के 7 बजे के बीच ही खाना है. लेकिन ये जरूरी नहीं कि 11 से 7 बजे के बीच ही खाना खाएं, इस समय को आप अपने हिसाब से आगे-पीछे भी कर सकते हैं. जैसे आखिरी खाना अगर रात 8 बजे खाया है तो अगले दिन का पहला खाना दोपहर 12 बजे खाएं.

Intermittent fasting के क्या फायदे-नुकसान हैं?

इंटरमिटेंट फास्टिंग के अपने फायदे और नुकसान हैं. कुछ मामलों में इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करने की सलाह दी जाती है. जैसे कि प्रेग्नेंसी और प्रेग्नेंसी के दौरान हुआ डायबिटीज. स्तनपान के दौरान, जिस समय शरीर का विकास हो रहा हो और कुछ लंबी बीमारियों में भी इंटरमिटेंट फास्टिंग न करने के लिए कहा जाता है. वहीं कुछ मामलों में इंटरमिटेंट फास्टिंग करने की सलाह दी जाती है. जैसे कि बढ़े हुए वज़न को घटाने के लिए, टाइप 2 डायबिटीज में वज़न कंट्रोल करने के लिए. और शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने के लिए भी इंटरमिटेंट फास्टिंग मदद करती है और हेल्थ अच्छी रहती है.

Intermittent fasting में क्या खा सकते हैं?

ऐसा नहीं है कि 8 घंटे की फीस्टिंग विंडो में आप जंक फूड भी खा लें. इन 8 घंटों में जो खाना खाएं वो कम कैलोरी वाला हो. कम कैलोरी का मतलब है, आमतौर पर आप जो खाना खाते हैं उससे करीब 10 प्रतिशत कम कैलोरीज़ वाला खाना खाएं. बचे हुए 16 घंटों में आप पानी, बिना चीनी की चाय और कॉफी या ब्लैक कॉफी पी सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इन 16 घंटों में चीनी या कैलोरीज़ वाली किसी भी चीज़ को खाने की मनाही होती है. 8 घंटों के दौरान सिर्फ कम कैलोरीज़ वाला खाना खाएं. साथ ही किसी भी तरह का प्रोसेस्ड फूड, ज़्यादा चीनी और कैलोरीज़ वाला खाना बिल्कुल न खाएं. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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