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'बड़े ब्रेस्ट से हो सकता है कैंसर', ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े इन मिथकों जानना है बेहद जरूरी

अक्टूबर का महीना चल रहा है. पता है इस महीने क्या है? ये है ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ. यानी इस महीने कोशिश होगी ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी ज़रूरी जानकारी आप तक पहुंचाने की.

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सरवत
| आयूष कुमार
18 अक्तूबर 2023 (पब्लिश्ड: 07:44 PM IST)
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हर साल ब्रेस्ट कैंसर के 1 लाख 78 हज़ार नए केस सामने आते हैं. (सांकेतिक फोटो)
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अक्टूबर का महीना चल रहा है. पता है इस महीने क्या है? ये है ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) अवेयरनेस मंथ. यानी इस महीने कोशिश होगी ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी ज़रूरी जानकारी आप तक पहुंचाने की. साल 2020 में ग्लोबोकॉन ने एक स्टडी की. उसके मुताबिक इंडिया में हर चार मिनट के अंदर एक महिला को ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोस किया जाता है. हर साल 1 लाख 78 हज़ार नए केस सामने आते हैं. इसके केस इतने ज़्यादा हैं कि ब्रेस्ट कैंसर ने सर्विकल कैंसर को भी पछाड़ दिया है.

साइटकेयर के मुताबिक हमारे देश में हर 28 में से 1 औरत को ब्रेस्ट कैंसर होता है. और हर साल 90 हज़ार औरतों की मौत ब्रेस्ट कैंसर की वजह से होती है. और ये जो सारे नंबर हैं न, ये केवल आंकड़ें नहीं हैं. ये इंसान हैं. इसलिए ब्रेस्ट कैंसर के बारे में सही जानकारी होना बेहद ज़रूरी है. तो आज हम डॉक्टर से ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े कुछ आम मिथकों के बारे में जानेंगे, जिनकी वजह से जान पर बन आती है.

ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े पांच सबसे प्रचलित मिथकों के बारे में हमें बताया डॉ. तनवी सूद ने.

(डॉ. तनवी सूद, सीनियर कंसल्टेंट, ऑन्कोलॉजी, पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम)
पहला मिथक

- हेवी या बड़े ब्रेस्ट होने पर कई महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होने का डर रहता है. ये मान्यता गलत है, ऐसा नहीं होता.

- लेकिन ऐसे ब्रेस्ट जिनकी डेंसिटी ज्यादा हो यानी फैट कम हो और दूध बनाने वाली ग्रंथियां ज्यादा हों तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ जाता है.  

- लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि ज्यादा डेंसिटी वाले ब्रेस्ट में कैंसर होगा ही.

- इसलिए नियमित रूप से इसकी जांच कराते रहें.

दूसरा मिथक

- कुछ महिलाओं को ये डर होता है कि ब्रेस्ट कैंसर की बायोप्सी कराने से ये फैल सकता है.

- ऐसा नहीं है, बायोप्सी जांच से कैंसर नहीं फैलता. कैंसर का पता लागने के लिए बायोप्सी जांच बेहद जरूरी है.

- बायोप्सी जांच में शरीर के हिस्से को सुन्न कर के सुई के जरिए के उसका थोड़ा सा भाग निकालकर जांच के लिए भेजा जाता है.

- बायोप्सी से ये कॉन्फर्म हो जाता है कि ब्रेस्ट में मौजूद गांठ कैंसर है या सिर्फ एक ट्यूमर है, इसलिए बायोप्सी जरूर कराएं.

तीसरा मिथक

- कुछ मरीजों को कीमोथेरेपी की जरूरत भी होती है.

- उन्हें ये लगता है कि कीमोथेरेपी में दर्द होता है, इसलिए वो कीमोथेरेपी नहीं कराते.

- कीमोथेरेपी में दर्द नहीं होता है.

- आजकल काफी सारी दवाइयां और मशीनें आ गई हैं. जिनके इस्तेमाल से स्किन भी बची रहती है और मरीज को भी कोई परेशानी नहीं होती.

चौथा मिथक

- काफी सारे मरीज मीठा खाना छोड़ देते हैं, उन्हें लगता है कि कैंसर के सेल्स मीठे की वजह से तेजी से बढ़ते हैं.

- ये धारणा गलत है. वैसे भी चीनी किसी के लिए अच्छी नहीं होती, ऐसे में गुड़ खाएं.

- डायबिटीज़ वाले मरीज़ मीठा न खाएं, वजन को बढ़ने न दें.

- कैंसर के मरीज हल्का मीठा खा सकते हैं, इससे कैंसर पर कोई असर नहीं होता.

पंचवा मिथक

- प्रेग्नेंसी और स्तनपान से जुड़ी एक बहुत अहम बात.

- कई लोगों को लगता है कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता.

-  प्रेग्नेंसी और स्तनपान ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम कर देते हैं.

- लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि प्रेग्नेंसी और स्तनपान की वजह से ब्रेस्ट कैंसर बिल्कुल भी नहीं होता.

- ये देखा गया है कि अगर 35 साल की उम्र से पहले प्रेग्नेंसी हो जाती है तो ऐसी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम हो जाता है.

- इसलिए 40 से ज्यादा उम्र की सभी महिलाओं को हर साल मैमोग्राम कराना चाहिए.

यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.

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