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ब्रेस्ट में अगर ये बदलाव दिख रहे हैं तो नज़रअंदाज़ न करें, कैंसर हो सकता है

ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे कॉमन कैंसर.

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2 सितंबर 2020 (अपडेटेड: 2 सितंबर 2020, 08:37 AM IST)
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भारत में हर साल 70,000 से ज़्यादा महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर से मौत हो जाती है!
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यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.

बात 2013 की है. मेरी पहली नौकरी थी. उस ऑफिस में मेरी एक सीनियर हुआ करती थीं. 40 साल की थीं वो. शादी हो गई थी. दो बच्चे भी थे. काफ़ी हंसमुख थी. सभी उन्हें पसंद करते थे. अब वो हमारे बीच नहीं हैं. उन्हें ब्रेस्ट कैंसर था. काफ़ी साल उनका इलाज चला पर वो बच नहीं पाईं. ब्रेस्ट कैंसर के बारे में पहली बार तफ़सील से मुझे उनसे ही पता चला था. पता चला कि ये कितना ख़तरनाक है. हम बात करेंगे इस बीमारी के बारे में. इसके असर के बारे में. बहुत ज़रूरी है कि लोगों को ब्रेस्ट कैंसर के बारे में सही और सटीक जानकारी हो. ये क्या होता है? क्यों होता है? कैसे पता चले कि आपको ब्रेस्ट कैंसर है? क्योंकि अगर जल्दी पता चल जाए तो इलाज भी समय पर शुरू हो सकता है.
जानते हैं ब्रेस्ट कैंसर कितना कॉमन है?
ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे कॉमन कैंसर है. भारत में हर साल डेढ़ लाख से ज़्यादा महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होता है. इसका मतलब है हर एक लाख महिलाओं में से 26 महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होता है. भारत में हर साल 70,000 से ज़्यादा महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर से मौत हो जाती है
ब्रेस्ट में होने वाली गांठ दो तरह की होती हैं. एक होती है नॉन कैन्सरस. इसको दूध की गांठ भी कहते हैं. दूसरी होती है कैन्सरस गांठ. जब तक हम ब्रेस्ट के कैंसर की जांच नहीं करवाते तब तक बोल नहीं सकते ये कैन्सरस गांठ है या सादी गांठ है इसलिए हर एक गांठ की जांच करना बहुत ज़रूरी है
MRI scans help researchers predict 10-year breast cancer recurrence जब तक हम ब्रेस्ट के कैंसर की जांच नहीं करवाते तब तक बोल नहीं सकते ये कैन्सरस गांठ है या सादी गांठ है.


कौन सी कंडीशन में ब्रेस्ट कैंसर होने का रिस्क बढ़ जाता है?
-जिन महिलाओं में ओबीसिटी है
-जिन महिलाएं को मेनोपॉज़ के बाद हॉर्मोनल ट्रीटमेंट की ज़रूरत पड़ती है
-जिन महिलाओं में मेनोपॉज़ की उम्र ज़्यादा है
ब्रेस्ट कैंसर को जल्दी डिटेक्ट कैसे करते हैं?
तीन टाइप के टेस्ट किए जाते हैं
-मैमोग्राफीः इसमें ब्रेस्ट का एक्स-रे लेते हैं. उसमें देखते हैं कि कोई गांठ है या नहीं. 40 के बाद हर महिला को साल में एक बार मैमोग्राफी करवाना चाहिए
-ब्रेस्ट एग्जामिनेशनः दो तरह के ब्रेस्ट एग्जामिनेशन होते हैं. एक होता है सेल्फ़ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन. उसमें पेशेंट ख़ुद अपना ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करता है. ये देखने के लिए कि ब्रेस्ट में कहीं गांठ तो नहीं है. ब्रेस्ट के स्किन का कलर चेंज हो गया है क्या? बगल में गांठ है क्या? दोनों ब्रेस्ट का साइज़ एक जैसा है या नहीं? कोई निप्पल रिट्रैक्शन है क्या? कोई निप्पल डिस्चार्ज है क्या? अगर इसमें से कोई भी चीज़ है तो डॉक्टर को बतानी पड़ती हैं. अगर इनमें से कुछ लगे तो फिर डॉक्टर के पास जा सकते हैं, वो क्लिनिकल एग्जामिनेशन करके बता सकते हैं कि ब्रेस्ट में गांठ है या नहीं.
-FNAC टेस्टः Fine Needle Aspiration Cytology. इसमें अगर ब्रेस्ट में कोई गांठ होती है तो उसमें एक बारीक सुई डाली जाती है और उसका सैंपल लैब में भेजा जाता है. सैंपल की जांच में पता चल जाता है कि ब्रेस्ट कैंसर है या नहीं.
ब्रेस्ट कैंसर का क्या इलाज है?
ब्रेस्ट कैंसर में तीन तरह के ट्रीटमेंट किए जाते हैं
# सर्जरीः दो टाइप की होती है. पहली ब्रेस्ट कंसर्वेशन सर्जरी, इसमें सिर्फ ट्यूमर निकाला जाता है. और ब्रेस्ट को प्रिज़र्व किया जाता है. दूसरी सर्जरी है मसैक्टमी, इसमें पूरा ब्रेस्ट निकाल लिया जाता है.
कीमोथेरेपी: कुछ इंजेक्शन और टैबलेट्स दिए जाते हैं. कीमोथेरेपी में दवाओं की हेवी डोज़ दी जाती है. जिनके साइड इफेक्ट्स काफी ज्यादा होते हैं.
# रेडिएशन थेरेपीः हाई एनर्जी रेडियोएक्टिव रेज़ का उपयोग किया जाता है. रेडिएशन थेरेपी देते वक़्त पेशेंट को किसी भी प्रकार का पेन, जलन, शॉक जैसी तकलीफ़ नहीं होती. 
BEYOND LOCAL: Blaming women for breast cancer ignores environmental risk factors, expert says - BayToday.ca भारत में हर साल डेढ़ लाख से ज़्यादा महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होता है


ये तो थी ब्रेस्ट कैंसर के बारे में वो जानकारी जो बेहद ज़रूरी है. अब बात अगर ब्रेस्ट कैंसर की कर रहे हैं तो एक चीज़ को बिलकुल नज़रंदाज़ नहीं कर सकते. वो है डाइट. आपका खानपान. चलिए जानते हैं कि ऐसे में खाने को लेकर किन बातों का ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि बीमारी कोई भी हो, इलाज अपनी जगह है और आपका खानपान अपनी जगह. उसके साथ समझौता नहीं कर सकते.
-डाइट हेल्दी और बैलेंस्ड रखें.
-डाइट में कार्बोहाइड्रेट रहे, हेल्दी फैट्स रहे, प्रोटीन रहे
-वेज, नॉन वेज दोनों का इन्टेक रहे
-प्रोसेस्ड फ़ूड, तले-भुने, मसालेदार खाने से दूर रहें.
-पालक, मेथी, केला, इनको ज़्यादा से ज़्यादा डाइट में लेना है
-एंटी ऑक्सीडेंट रिच डाइट हो. उसके लिए बेरी, पीच, ग्रीन टी लें
-हेल्दी फैट के लिए एवाकाडो, नट्स, सनफ़्लार सीड, पम्पकिन सीड, फ़्लैकसीड लें
-रेड मीट को अवॉयड करिए
-प्रोटीन अच्छे से लीजिए ताकि मसल लॉस न हो
-साथ ही हल्दी और दालचीनी का इस्तेमाल करिए. ये सूजनरोधी होते हैं. कैंसर से लड़ने में मदद करेंगे
इन टिप्स का ध्यान ज़रूर रखिए.


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