कनाडा की लेखिका मार्गरेट एटवुड एक कमाल की बात कहती हैं- War is what happens whenlanguage fails. यानी, युद्ध तब शुरू होते हैं, जब हमारी कहने, सुनने और समझने कीसीमा खत्म हो जाती है. ये युद्ध की वीभीषिका है. जिस भाषा और सूचना तंत्र काइस्तेमाल युद्ध के ताप को कम करने के लिए होना था, उससे उन्माद फैलाया जा रहा है.ये हमारे आसपास रोज़ाना हो रहा है. इससे आप लगातार रूबरू हो रहे होंगे. लेकिन बाकीदुनिया का मीडिया तंत्र इस युद्ध को कैसे देख रहा है? इसके लिए चलना होगा, मीडियासंस्थानों के संपादकीय पन्नों की तरफ़. बताते हैं कि वहां क्या छप रहा है? देखेंवीडियो.