आज बात एक युवा कवि की. जिसने अपने देश में आज़ादी की बयार लाई. औपनिवेशिक शासन केख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की. ग़ुलामी के दर्द पर मरहम लगाया. फिर आज़ाद मुल्क़ का पहलाप्रधानमंत्री बना. ऐसा क्या हुआ कि तीन महीने के भीतर ही उसका तख़्तापलट हो गया?आज़ादी के नायक को दर-ब-दर क्यों होना पड़ा? और, उसे किसने तेज़ाब में डालकर जलादिया? सबसे ज़रूरी बात, आज उस शख़्स की चर्चा क्यों कर रहे हैं? सब विस्तार सेबताते हैं.