एक देश जहां वेतन पाने वाले लोग एक साथ कई नौकरी करने को मजबूर हैं. जो थोड़े रईसहैं वो कार छोड़कर दो पहिया वाहन पर आ चुके हैं और जो गरीब हैं वो तीन वक्त को खानाछोड़ दो वक्त के भोजन में जीने को मजबूर हैं. महंगाई इतनी है कि मां-बाप अपनेबच्चों को स्कूल तक नहीं भेज पा रहे हैं. बेहाली की ये कहानी हमारे पड़ोसी मुल्कपाकिस्तान की है. आज पाकिस्तान दर्द से कराह रहा है लेकिन दर्द की ये टीस अभी औरबढ़ने वाली है. अंतरराष्ट्रिय मुद्रा कोष यानी IMF ने पाकिस्तान के घाव पर मरहमलगाने से मना कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय एजेंसी IMF ने पाकिस्तान कोकिस तरह का झटका दिया है? क्या एक बार फिर पाकिस्तान में बेल आउट जैसी स्थिति बनजाएगी? और कैसे पाकिस्तान की सरकार इन मुश्किलों से लड़ रही है.आइए देखते हैं.