आज इब्ने इंशा का जन्मदिन है. वही इब्ने इंशा जिनकी लिखी ग़ज़ल ‘कल चौदहवीं की रातथी, शब भर रहा चर्चा तेरा/ कुछ ने कहा ये चांद है, कुछ ने कहा चेहरा तेरा.’ सुनकरबहुतों ने ग़ज़ल के मायने समझे. हिन्दुस्तान के जालंधर की पैदाइश और बंटवारे के बादकराची जा बसे इब्ने इंशा पर जितना हक़ पाकिस्तान का था, बराबर हक़ हिन्दुस्तान का भीथा. इंशा को गुलाम अली ने भी खूब गाया और जगजीत सिंह ने भी. बाद में आबिदा परवीन कीसूफ़ी आवाज़ ने इंशा की ग़ज़लों को पूरी दुनिया तक पहुंचाया. सिर्फ़ सुना और गाया हीनहीं, पढ़ने वालों ने इंशा को खूब पढ़ा भी. दुनियावी इश्क़ से लेकर आध्यात्मिक इश्क़ तकको अपने शब्दों में ढालने वाले इंशा घोर रियलिस्ट भी थे. उनके पैने व्यंग्य इसकानमूना हैं. खासकर ‘उर्दू की आखिरी किताब’. आज सुनिए इब्ने इंशा की इस क़िताब से दसबेहद असरकारी व्यंग्य.