जब भी मनमोहन सिंह से उनकी सफलता के बारे में पूछा गया, उन्होंने कहा: “मैं जो कुछभी हूं, अपनी पढ़ाई-लिखाई की वजह से हूं.” आज के पाकिस्तान में पड़ने वाले गाह गांवमें पैदा हुए थे मनमोहन सिंह. गांव में ना तो बिजली थी ना स्कूल और हॉस्पिटल. मीलोंचलकर स्कूल जाते. केरोसिन लैंप में पढ़-पढ़ के अपनी आंखें खराब कर ली थी इन्होंने. परपढ़ना नहीं छोड़ा. और पढ़ते-पढ़ते ऑक्सफ़ोर्ड से पीएचडी कर ली. फिर प्रोफेसर, रिज़र्वबैंक गवर्नर, केन्द्रीय मंत्री होते हुए प्रधानमंत्री भी बने.