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उत्तर प्रदेश: कोरोना वॉर्ड में ड्यूटी देने वाले MBBS छात्रों को वॉर्ड बॉय से भी कम मेहनताना!

कोरोना की दूसरी लहर ने मेडिकल ढांचे को हिला कर रख दिया है. मरीजों की बढ़ती संख्या के लिए स्वास्थ्यकर्मी कम पड़ते जा रहे हैं. इसी कमी को भरने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने 08 मई को विज्ञापन जारी किया. जिसे लोग सीरियसली लेने को तैयार नहीं हो रहे. वजह है एमबीबीएस फाइनल ईयर छात्रों को दिया जाने वाला मेहनताना. विज्ञापन के मुताबिक जो एमबीबीएस फाइनल ईयर स्टूडेंट कोविड वॉर्ड में ड्यूटी देंगे, उन्हें 300 रुपए प्रतिदिन के मेहनताने पर रखा जाएगा.

मज़ाक नहीं तो और क्या

लोग यूपी सरकार के इस विज्ञापन का मज़ाक उड़ा रहे हैं. उड़ाना लाज़मी भी है. क्योंकि इसी विज्ञापन में कोविड वॉर्ड में काम करने वाले वॉर्ड बॉय को दिया जाने वाला मेहनताना भी तय किया गया है. जो है डेली के 359 रुपए. यानी एमबीबीएस स्टूडेंट को दिए जाने वाले मेहनताने से ज्यादा. यहां तक कि विज्ञापन में लैब अटेंडेंट और स्टाफ नर्स का मेहनताना भी एमबीबीएस छात्र/ छात्राओं से ज्यादा है. लैब अटेंडेंट को भी प्रतिदिन 359 रुपए दिए जाएंगे. वहीं, स्टाफ नर्स के लिए 750 रुपये प्रतिदिन का मेहनताना तय हुआ है. सरकार को फिज़िशन, चिकित्सक, MBBS फाइनल ईयर स्टूडेंट समेत विज्ञापन में कुल 12 श्रेणियों में मेडिकल स्टाफ की आवश्यकता हैं. इन सभी में से एमबीबीएस स्टूडेंट को ही सबसे काम मेहनताना दिया जा रहा है. एमबीबीएस स्टूडेंट्स को अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना मरीजों की सेवा करने के लिए महीने के मात्र 9000 रुपए मिलेंगे.

यूपी सरकार का ये विज्ञापन 08 मई को जारी किया गया. इसे कार्यालय महानिदेशक, चिकित्सा और स्वास्थ्य की तरफ से निकाला गया है. विज्ञापन को देखें तो सबसे ज्यादा मेहनताना फिज़िशन के लिए निर्धारित किया गया है. फिज़िशन को प्रतिदिन 5000 रुपए मिलेंगे. वहीं, इसके बाद चिकित्सकों को 2500 रुपए प्रतिदिन दिए जाएंगे.

उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद राजनीति भी गर्मा गई है. समाजवादी पार्टी के नेता अनुराग भदौरिया ने कहा कि एमबीबीएस फाइनल ईयर छात्रों और वॉर्ड बॉय्ज़ को दिया जाने वाला मेहनताना सम्मानीय होना चाहिए. चूंकि, ये कोविड वॉरियर हैं और सरकार को ये बात समझनी चाहिए. प्रदेश के कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा,

एमबीबीएस फाइनल ईयर स्टूडेंट्स को 300 रुपए और वॉर्ड बॉय्ज़ को 359 रुपए प्रतिदिन का मेहनताना इस बात का सूचक है कि सरकार हमारे फ्रंट लाइन वर्कर्स की काबिलियत का सम्मान नहीं करती. ऐसे एक्शन से सरकार ने अपनी नाकामी का सबूत दिया है.

आज तक ने उनसे बात की जिन पर इस फैसले का सबसे ज्यादा असर पड़ने वाला है. यानी एमबीबीएस स्टूडेंट्स. लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रों से बात की. यूनिवर्सिटी की छात्रा कनिष्का भारती ने अपील की कि सरकार को मेहनताने में बढ़ोतरी के साथ-साथ फ्रंट लाइन वर्कर्स के लिए बेहतर मेडिकल व्यवस्था भी मुहैया करवानी चाहिए.

King George Mbbs Students
एमबीबीएस स्टूडेंट्स जिन पर इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा. फोटो – आज तक

यूनिवर्सिटी की छात्रा सृजल गुप्ता ने कहा,

हम अपनी फैमिली को सपोर्ट करने के लिए सिर्फ मेहनताने पर निर्भर नहीं रह सकते. 14 दिनों के लिए रोज 12 घंटे काम करना आसान नहीं है. इसलिए इसमें बढ़ोतरी होनी चाहिए.

विपक्ष और स्टूडेंट्स के सवालों से घिरने के बाद बीजेपी की ओर से भी जवाब आया. पार्टी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने विपक्ष की आलोचना की. कहा कि उन्हें मेहनताना का मतलब समझना चाहिए. ये स्टूडेंट्स को उनकी सेवा के लिए दिया जाता है. साथ ही कहा कि उनके काम की तुलना वॉर्ड बॉय के काम से नहीं की जानी चाहिए.

उत्तर प्रदेश में कोरोना बेकाबू हो चुका है. ऐसे में सरकार हर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल करना चाहती है. इसी के मद्देनज़र एमबीबीएस छात्र/ छात्राओं को कोविड ड्यूटी में लगाने का फैसला लिया गया. लेकिन सरकार उनके काम का सही मेहनताना तो निर्धारित करती? डॉक्टर्स 24 घंटे ड्यूटी पर मुस्तैद रहेंगे. ऐसे में एमबीबीएस छात्रों को वॉर्ड बॉय से भी कम मेहनताना दिया जाना लोगों द्वारा बेहद निराशाजनक फैसला बताया जा रहा है.

हिमाचल का हाल और भी बुरा

आपको बता दें कि इससे पहले कोरोना की मार झेल रहे हिमाचल प्रदेश ने भी ऐसा ही ऑर्डर जारी किया था. जिसे लोगों ने सरकार की लालफीताशाही का उदाहरण बताया. हेल्थ सेक्रेटरी अमिताभ अवस्थी द्वारा जारी किए गए ऑर्डर के अनुसार चौथे और पांचवे वर्ष के एमबीबीएस छात्रों को 100 रुपए प्रतिदिन के मेहनताने पर काम करना होगा. इसके साथ ही नर्सिंग स्टूडेंट्स और कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रखे गए लैब स्टाफ को 50 रुपए प्रतिदिन के मेहनताने पर रखा जाएगा.

Himachal Pradesh Order
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया ऑर्डर.

03 मई को जारी किए गए इस ऑर्डर के मुताबिक एमबीबीएस छात्रों और नर्सिंग स्टाफ को 30 जून तक कोविड वॉर्ड में ड्यूटी देनी होगी.

 


वीडियो: महाराष्ट्र: आठ कोरोना सर्वाइवर की ब्लैक फंगस से मौत

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