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न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी ने जिस कुरान से शपथ ली, वो सबसे 'अलग' क्यों है?

Zohran Mamdani New York Mayor Oath: जोहरान ममदानी और उनकी टीम को अंदाजा था कि कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेना उनके विरोधियों को रास नहीं आएगा. इसलिए उन्होंने सिर्फ एक कुरान नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग कुरान चुनीं, जिनके जरिए वे खास मैसेज देना चाहते थे. शॉम्बर्ग की कुरान जो उन्होंने चुनी, उसकी इतनी चर्चा क्यों है?

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न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी ने कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली. (NYPL/X)
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मौ. जिशान
2 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 09:36 AM IST)
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जोहरान ममदानी आधिकारिक तौर पर अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर बन गए हैं. गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को न्यूयॉर्क सिटी हॉल पर वर्मोंट से सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने उन्हें शपथ दिलाई. नए साल की शुरुआत पर ममदानी ने कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली. इसकी चुभन अमेरिका से लेकर यूरोप तक फैले ममदानी विरोधियों को महसूस हुई.

ममदानी ने 'अंदाज-ए-शपथ' पर उठे विवाद को ना तो टालने की कोशिश की, ना सफाई देने में वक्त गंवाया. उलटा उन्होंने वो तरीका अपनाया, जिससे विरोध करने वाले खुद ही असहज होते चले गए. जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम मेयर हैं. वे न्यूयॉर्क के भारतीय मूल के भी पहले मेयर हैं.

अमेरिका के सबसे बड़े शहर में यह पहली बार हुआ, जब किसी मेयर ने कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली. यहीं से हंगामा शुरू हो गया. पहले थोड़ा पीछे चलते हैं. अलबामा के रिपब्लिकन सीनेटर टॉमी ट्यूबरविल ने 21 दिसंबर 2025 को कहा था,

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टॉमी ट्यूबरविल का पोस्ट. (X @SenTuberville)

इससे भी पहले ट्यूबरविल ने नवंबर 2025 में X पर लिखा था,

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टॉमी ट्यूबरविल का पोस्ट. (X @SenTuberville)

आधिकारिक शपथ से पहले जोहरान ममदानी ने कुरान पर हाथ रखकर निजी शपथ ली थी. इसके बाद सोशल मीडिया पर हमले नहीं रुके. किसी ने कहा कि न्यूयॉर्क हाथ से निकल रहा है, तो किसी ने इसे अमेरिका की पहचान पर हमला बताया. एंटी-इस्लामिक नजरिए वाले RAIR फाउंडेशन की फाउंडर और पत्रकार एमी मेक ने लिखा,

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उन्होंने आगे लिखा,

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एमी मेक का पोस्ट. (X @AmyMek)

यह प्रतिक्रिया सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रही. नीदरलैंड के दक्षिणपंथी नेता गीर्ट वाइल्डर्स ने भी लिखा,

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गीर्ट वाइल्डर्स का पोस्ट. (X @geertwilderspvv)

तीन कुरान से शपथ

लेकिन असली कहानी यहीं दिलचस्प हो जाती है. जोहरान ममदानी और उनकी टीम को अंदाजा था कि कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेना उनके विरोधियों को रास नहीं आएगा. इसलिए उन्होंने सिर्फ एक कुरान नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग कुरान चुनीं, जिनके जरिए वे खास मैसेज देना चाहते थे.

निजी शपथ समारोह के लिए ममदानी ने अपने दादा की कुरान और एक 200 साल पुरानी कुरान का इस्तेमाल किया. यह निजी शपथ बंद पड़े ओल्ड सिटी सबवे स्टेशन (रेलवे स्टेशन) में ली गई. यह सबवे स्टेशन अपने आप में न्यूयॉर्क शहर का एक बड़ा प्रतीक है. सबवे से निजी शपथ जोहरान ममदानी के आम जनता से सीधे जुड़ाव के तौर पर देखी जा रही है.

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बाद में न्यूयॉर्क सिटी हॉल में हुए सरकारी शपथ ग्रहण समारोह के लिए ममदानी ने अपने दादा-दादी की कुरान की दो कॉपियों का इस्तेमाल करने का प्लान बनाया था. ममदानी की सीनियर एडवाइजर जारा रहीम के अनुसार, तीनों 'खास' कुरान की जानकारी दी न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ शेयर की गई थीं.

लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस 200 साल पुरानी कुरान की हुई, जो एक गैर-मुस्लिम व्यक्ति की थी. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट अनुसार, ममदानी की पत्नी रामा दुवाजी और जारा रहीम शपथ ग्रहण के लिए एक 'खास' कुरान ढूंढ रहे थे. एक ऐसी कुरान, जो न्यूयॉर्क की बहुलतावादी पहचान को मैसेज दे सके.

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उनकी मुश्किल न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी ने दूर की. न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी की हिबा आबिद ने उन्हें आर्टुरो शॉम्बर्ग की कुरान से शपथ लेने का मशविरा दिया. आबिद लाइब्रेरी में मिडिल ईस्टर्न और इस्लामिक स्टडीज की क्यूरेटर हैं.

ममदानी की शपथ की तीसरी कुरान आर्टुरो शॉम्बर्ग की ही थी. शॉम्बर्ग एक अश्वेत इतिहासकार और लेखक थे, जो मुस्लिम नहीं थे. यह कुरान न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के कलेक्शन का हिस्सा है. आर्टुरो शॉम्बर्ग का जन्म 1874 में प्यूर्टो रिको में हुआ था. वे कैथोलिक क्रिश्चियन परिवार में पले-बढ़े. लेकिन बाद में वे एक पक्के प्रोटेस्टेंट बन गए, खासकर यूनाइटेड स्टेट्स के एपिस्कोपल चर्च के सदस्य.

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आर्टुरो शॉम्बर्ग और उनकी कुरान. (NYPL)

उन्होंने दुनिया भर की किताबें, पांडुलिपियां और ऐतिहासिक चीजें इकट्ठा की थीं. इन्हीं में यह कुरान भी शामिल थी. न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी ने 1926 में उनकी 4,000 चीजें खरीदी थीं. उनकी मौत 1938 में न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में हुई थी.

न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के प्रेसिडेंट और CEO एंथनी डब्ल्यू मार्क्स ने एक बयान में कहा,

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क्यों खास है शॉम्बर्ग की कुरान?

न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी ने शपथ के लिए शॉम्बर्ग की कुरान ममदानी की टीम मुहैया कराई थी. लाइब्रेरी के अनुसार, यह कुरान 6 जनवरी 2026 से आम लोगों के देखने के लिए भी रखी जाएगी. लाइब्रेरी ने बताया,

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इस कॉपी पर ना तो तारीख लिखी है और ना ही किसी के साइन हैं. लेकिन लाइब्रेरी 'बारीक नस्क लिपि और इसकी बाइंडिंग (जिसमें फूलों की डिजाइन वाला सोने की मुहर वाला मेडेलियन है) के आधार पर मानती है कि यह 19वीं सदी के ऑटोमन सीरिया में लिखी गई थी.

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इस कुरान को चुनने के पीछे ममदानी की टीम के फैसले पर हिबा आबिद ने कहा,

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यानी एक मुस्लिम मेयर, अफ्रीका में जन्म, भारतीय-युगांडाई विरासत और एक गैर-मुस्लिम अश्वेत इतिहासकार की कुरान. ये सब मिलकर वही न्यूयॉर्क दिखाता है, जिसे विविधताओं वाला शहर कहा जाता है.

ममदानी की पहचान और राजनीति

जोहरान ममदानी भारत की मशहूर फिल्ममेकर मीरा नायर और भारतीय मूल के जाने-माने अकादमिक महमूद ममदानी के बेटे हैं. मेयर के चुनाव प्रचार के दौरान भी ममदानी को उनकी धार्मिक पहचान को लेकर निशाना बनाया गया था. न्यूयॉर्क के पूर्व गवर्नर और मेयर प्रत्याशी एंड्रयू कुओमो जैसे नेताओं ने भी उन पर सवाल उठाए. इसके बाद ममदानी ने साफ कहा था कि वे अपनी मुस्लिम पहचान से पीछे नहीं हटेंगे.

एक तरफ ममदानी के विरोधियों ने उनके मेयर चुने जाने को मुस्लिम आइडेंटिटी, इस्लामोफोबिया और इमीग्रेशन के आधार पर 'अमेरिका के पतन' के रूप में पेश करने की कोशिश की. वहीं, ममदानी की टीम ने इस शपथ के जरिए न्यूयॉर्क की बहुलतावादी पहचान को उजागर करने का प्रयास किया.

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