7 जनवरी 2015 की शाम को अचानक से पूरी दुनिया में खबर लिखने और देखने वाले सदमे मेंआ गए थे. फ्रांस की 'शार्ली एब्दो' मैग्ज़ीन पर कट्टरपंथियों ने हमला किया था और 12पत्रकारों, कार्टून बनाने वालों को मार दिया था. बंदूक रखने वाले कलम से डर गए थे.इस घटना के ठीक दो साल बाद 'शार्ली एब्दो' फिर चर्चा में है. मगर बिलकुल अलग वजह केकारण. मैग्ज़ीन की सबसे ज़्यादा मुखर पत्रकार ज़िनेब एल रहज़ोई ने इस शुक्रवार'शार्ली एब्दो' से इस्तीफा दे दिया है. कारण बताया है पत्रिका का इस्लामिककट्टरपंथियों के आगे नरम पड़ जाना.ज़िनेब ने कहा है कि उस नरसंहार के बाद से पत्रिका इस्लाम और उससे जुड़े प्रतीकोंपर कुछ भी कहने से बच रही है. उन्होंने ये भी कहा कि सितंबर से ही उनकी बाकी स्टाफसे असहमति चल रही थी.ज़िनेब35 साल की ज़िनेब अपने तल्ख तेवरों के कारण चरमपंथियों के निशाने पर रहती हैं.ज़िनेब को हर समय स्पेशल सिक्योरिटी में रहना पड़ता है. उनका इन तमाम लोगों कीभावनाएं आहत करने पर कहना है,"सभी मूर्खों को संतुष्ट करना मुश्किल है."हमले के विरोध में न्यूयॉर्क टाइम्स का कार्टूनजबकि मैग्ज़ीन के वर्तमान एडिटर 'रिस' का कहना है, हमारी हिफाज़त कौन करेगा. मैंअपने स्टाफ को बिना किसी कारण मरते नहीं देख सकता. अगर सिर्फ मेरी जान की बात होतीतो मैं कभी नहीं रूकता. ज़िनेब शार्ली हेब्दो पर हमले के समय मोरक्को में थीं औरउनका कहना है कि शार्ली ने ही उन्हें चरमपंथ का विरोध करना सिखाया और वो इस बात कोहमेशा याद रखेंगी. इस विरोध के चलते ही उन्होंने अपने साथियों को खोया है और वो इसेनहीं छोड़ेंगी.