मकां से क्या मुझे लेना, मकां तुमको मुबारक हो मगर ये घास वाला रेशमी कालीन मेरा हैबशीर बद्र हिंदुस्तानी के लाजवाब शायर हैं. अपनी ग़ज़लों में वह पलकों से मिर्चेंउठाने की बात करते हैं. तो कभी चांद की पत्तियों, मौसमों के गुलाब और नए चरागों कीबात कहते हैं. इसलिए बहुत सारे लोग उनके लिखे हुए में 'नाज़ुकी' को प्रधान मानतेहैं. यूट्यूब पर एक चैनल है 'हिंदी कविता' नाम से. उसने बशीर बद्र की एक ग़ज़ल काएकदम ताजा वीडियो गिराया है. वीडियो में उनकी ग़ज़ल पढ़ रही हैं तनु शर्मा, जोन्यूज चैनलों में एंकर रह चुकी हैं.https://www.youtube.com/watch?v=7cz3ohyocE8&feature=youtu.beमेरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे ये चराग़ फिर भी चराग़ है, कहींतेरा हाथ जला न दे नए दौर के नए ख़्वाब हैं, नए मौसमों के गुलाब हैं ये मोहब्बतों के चराग़ हैं,इन्हें नफरतों की हवा न दे ज़रा देख चांद की पत्तियों ने बिखर बिखर के तमाम शब तेरा नाम लिखा है रेत पर, कोईलहर आ के मिटा न दे मैं उदासियां न सजा सकूं कभी ज़िस्म ए जां के मज़ार पर न दीये जलें मिरी आंख मेंमुझे इतनी सख्त सज़ा न दे मेरे साथ चलने के शौक़ में बड़ी धूप सर पर उठाएगा तिरा नाक नक्शा है मोम का कहींग़म की आग घुला न दे मैं ग़ज़ल की शबनमी आंख से ये दुखों के फूल चुना करूं मेरी सल्तनत मेरा फ़न रहे,मुझे ताज़ो-तख़्त ख़ुदा न दे यहां लोग रहते हैं रात दिन किसी मस्लहत की नक़ाब में ये तेरी निगाह की सादगी कहींदिल के राज़ बता न दे