26 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 26 जुलाई 2016, 08:50 AM IST)
फोटो - thelallantop
Small
Medium
Large
Quick AI Highlights
Click here to view more
हम नहीं कह रहे भाई. सुप्रीम कोर्ट ने हड़काते हुए कहा है. लेन देन का पुराना मामला जेब से निकलकर जेल तक पहुंच गया. तीन साल पहले भी 10 दिन के लिए जेल की सैर कर चुके हैं. लेकिन मंदिर का घंटा हो रहे हैं. बार बार बजाकर याद दिलाना पड़ता है. कि भैया पैसा वापस कर दो.
सवाल पांच करोड़ का
पूरा हिसाब ये है. 'अता पता लापता' फिल्म आई थी. वो राजपाल ने बनाई थी. उसके लिए कर्ज लिया था. मुरली प्रोजेक्ट्स कंपनी से. पूरे 5 करोड़ रुपए. फिर कंपनी ने जब पैसा मांगना शुरू किया तो "आज ले लेना कल ले लेना" बताने लगे.
फिर कंपनी वाले गुस्से में आ गए. "तुम्हारा पैसा पैसा है मेरा पैसा पैसा नहीं है." ऐसा बोलकर मुकदमा ठोक दिया. दिल्ली हाईकोर्ट में. दिसंबर 2013 में नकली सिग्नेचर वाले पेपर्स पेश कर दिए हाईकोर्ट में. जज साहब आपे से बाहर. 10 दिन की जेल काटने का आदेश दिया. 4 दिन काटे काल कोठरी में मच्छरों के बीच. फिर डबल बेंच ने जेल माफ कर दी.
तब से सिर्फ मीठे चूरन की गोली दे रहे हैं राजपाल, पैसा नहीं दिया. अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि "जाओ अपनी 6 दिन की सजा काटो. आपको तो 6 महीने की सजा मिलनी चाहिए."