योगी सरकार ने कोर्ट में माना, 2 आरोपियों के खिलाफ नहीं मिला 'लव जिहाद' का कोई सबूत
कानून आने के अगले दिन ही दर्ज किया गया था मामला
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी की योगी सरकार को फिर फटकार लगाई है. सोमवार को कोर्ट ने कोरोना हालातों पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई करते वक्त यूपी में छोटे शहरों और गांवों में हेल्थ सर्विसेज को 'राम भरोसे' बता दिया.
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आम लोगों की भाषा में जिसे लव जिहाद का मामला कहा जा रहा था, उसमें गिरफ्तार 2 युवकों पर लगाए आरोप कोर्ट में धड़ाम हो गए हैं. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गुरुवार 7 जनवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में कहा कि उनके पास आरोपियों के खिलाफ धर्मांतरण विरोधी कानून में केस बनाने लायक सबूत नहीं है. यहां तक कि एक आरोपी के खिलाफ तो बस धमकी देने का मामला ही बनता है.
पत्नी का हवाला देकर पति ने दर्ज कराया था केस
यूपी में जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून 28 नवंबर 2020 को आस्तित्व में आया था. इसके अगले ही दिन मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाने में दो युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. नदीम और सलमान नाम के युवकों पर अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराने का मामला दर्ज हुआ था. एक मजदूर ठेकेदार अक्षय कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उसने आरोप लगाया था कि नदीम (28 साल) का उसके घर आना जाना था. इसी दौरान उसने अक्षय की पत्नी को फंसा लिया. अक्षय का आरोप था कि नदीम उसकी पत्नी का धर्म परिवर्तन करवाकर उससे शादी करना चाहता था. इस काम में उसकी मदद 29 साल का सलमान कर रहा था. अक्षय ने यह भी कहा कि जब उसने इसका विरोध किया तो दोनों ने उसे धमकाया.
योगी सरकार ने कोर्ट में क्या कहा है?
यूपी सरकार की तरफ से जॉइंट डायरेक्टर (प्रॉसिक्यूशन) अवधेश पांडे ने गुरुवार को हाई कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया. इसमें कहा गया है कि जांच अधिकारी को ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला, जिससे इन दोनों आरोपियों के खिलाफ धर्मांतरण निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया जा सके. यही नहीं, एफिडेविड में इस पूरे मामले पर ही सवाल खड़े किए गए. कहा गया कि जांच से पता चला कि नदीम का महिला के साथ कोई अनैतिक संबंध था ही नहीं. यह बात जांच के दौरान महिला ने बयान में भी कही. हालांकि नदीम ने अक्षय को धमकाया जरूर था. इस मामले में उपयुक्त धाराओं के अनुसार आरोपी पर कार्रवाई होगी.

यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हलफनामा देकर कहा है कि मामले में धर्मांतरण का दबाव डालने के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं.
शक में दर्ज कराया गया पूरा मामला इस मामले में चार्जशीट 31 दिसंबर को फाइल की गई थी. नदीम ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए आरोप लगाया कि महिला के पति ने उस पर बेवजह शक करते हुए बेबुनियाद आरोप मढ़ दिए थे. मैं यूपी पुलिस और सरकार का बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मेरी मदद की. आरोपी के वकील का भी कहना है कि सलमान और नदीम दोनों को धर्मांतरण मामले में क्लीन चिट दे दी गई है.
मंसूरपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ कौशल पाल सिंह का कहना है कि
बता दें कि 28 नवंबर 2020 से यूपी में जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने के बाद पुलिस इस कानून के तहत 16 मामले दर्ज कर चुकी है.

यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हलफनामा देकर कहा है कि मामले में धर्मांतरण का दबाव डालने के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं.
शक में दर्ज कराया गया पूरा मामला इस मामले में चार्जशीट 31 दिसंबर को फाइल की गई थी. नदीम ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए आरोप लगाया कि महिला के पति ने उस पर बेवजह शक करते हुए बेबुनियाद आरोप मढ़ दिए थे. मैं यूपी पुलिस और सरकार का बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मेरी मदद की. आरोपी के वकील का भी कहना है कि सलमान और नदीम दोनों को धर्मांतरण मामले में क्लीन चिट दे दी गई है.
मंसूरपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ कौशल पाल सिंह का कहना है कि
महिला ने अपने स्टेटमेंट में धर्म परिवर्तन के प्रयास जैसे आरोपों को पूरी तरह नकार दिया. महिला ने बताया है कि उसका पति बेवजह नदीम पर मेरे साथ अनैतिक संबंध बनाने का शक करता रहता है. चूंकि धमकाने की बात सामने आई है, ऐसे में नदीम के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर बेइज्जती) और 506 (धमकी देना) के तहत चार्जशीट फाइल की गई है.इससे पहले, यह मामला जब कोर्ट के सामने आया था, तो नदीम के खिलाफ आपराधिक केस चलाने पर रोक लगा दी गई थी. कोर्ट ने 18 दिसंबर की सुनवाई में टिप्पणी की थी कि आरोपी और महिला दोनों ही बालिग हैं. ऐसा कोई भी सबूत सामने नहीं आया है, जिससे साबित हो कि धर्म बदलवाने के लिए दबाव डाला जा रहा है. पहली नजर में तो सभी आरोप बस शंका लग रहे हैं.
बता दें कि 28 नवंबर 2020 से यूपी में जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने के बाद पुलिस इस कानून के तहत 16 मामले दर्ज कर चुकी है.

