दोबारा धरने पर बैठे पहलवानों की पूरी कहानी
साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, रवि दहिया, बजरंग पूनिया. ये वो नाम हैं जो पोडियम पर चढ़े तो पूरे देश ने कंधों पर उठा लिया. आज ये पहलवान पिछले 6 दिनों से देश की राजधानी में धरने पर बैठे हैं.

साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, रवि दहिया, बजरंग पूनिया. ये वो नाम हैं जो पोडियम पर चढ़े तो पूरे देश ने कंधों पर उठा लिया. देश-दुनिया में भारत का नाम रोशन करके आए तो खूब सत्कार हुआ. लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा फहराने वाले भारत के ये पहलवान पिछले 6 दिनों से देश की राजधानी में धरने पर बैठे हैं.
तीन महीने में दूसरी बार देश के पहलवान, देश की राजधानी में धरने पर बैठे हैं. और आज अलग-अलग मोर्चों से खबर आई. पहले बात सुप्रीम कोर्ट की. सुप्रीम कोर्ट में आज पहलवानों की याचिका पर सुनवाई हुई. याचिका में 7 महिला पहलवानों ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर FIR दर्ज करने की मांग की थी. इन महिला पहलवानों ने बृजभूषण पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी और इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस से कनॉट प्लेस थाने में की थी. लेकिन जब शिकायत पर FIR दर्ज नहीं हुई तो फिर पहलवानों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था.
आज चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने मामले पर सुनवाई की. दिल्ली पुलिस का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जानकारी दी कि आज शाम तक इस मामले में FIR दर्ज कर ली जाएगी. पहलवानों का पक्ष रख रहे कपिल सिब्बल ने कहा कि आरोपी पर 40 आपराधिक मुकदमे हैं. इसलिए महिला पहलवानों को सुरक्षा भी दी जाए. सिब्बल ने नाबालिग शिकायतकर्ता पहलवान की सुरक्षा को लेकर एक मुहरबंद हलफनामा भी कोर्ट को सौंपा. जिस पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नाबालिग शिकायतकर्ता को पर्याप्त सुरक्षा देने का आदेश दिया. साथ ही मामले पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 5 मई की दी.
यानी दिल्ली पुलिस आज FIR करने के लिए तैयार है. लेकिन ये सवाल पिछले 7 दिनों से पूछा जा रहा था कि जब एक नाबालिग समेत 7 महिला पहलवानों ने दिल्ली पुलिस से यौन शोषण की शिकायत की है तो उस पर FIR क्यों दर्ज नहीं की जा रही? 26 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में मामले की पहली सुनवाई हुई थी तो भी ये सवाल उठा था. पहलवानों की ओर से कपिल सिब्बल ने पूछा था,
इस सवाल के जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि आरोपों की जांच के लिए भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन द्वारा बनाई कमेटी से जांच रिपोर्ट मांगी गई है. दिल्ली पुलिस FIR दर्ज करने से पहले कुछ प्रारंभिक जांच करना चाहती है. इसके बाद FIR दर्ज की जाएगी.
हालांकि ये खबर लिखे जाने तक FIR दर्ज होने की खबर नहीं आई थी.
ये तो हुई केस की बात. जंतर मंतर पर पहलवानों का प्रदर्शन जारी है. बीते दिन, यानी 27 अप्रैल को धरने पर बैठे पहलवानों ने कहा था कि उन्हें ये देखकर पीड़ा हुई है कि स्टार क्रिकेटर्स और दूसरे शीर्ष खिलाड़ी इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं. जिसके बाद आज अलग-अलग खेलों के कई सारे खिलाड़ी इन पहलवानों के समर्थन में उतरे. शुरुआत की ओलंपिक में गोल्ड मेडल विजेता नीरज चोपड़ा ने. उन्होंने पहलवानों के प्रदर्शन पर दुख जताते हुए ट्विटर पर लिखा,
इसके बाद कई और खिलाड़ी पहलवानों के समर्थन में उतरे. 2008 बीजिंग ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा ने लिखा,
पूर्व क्रिकेटर और AAP के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने ट्वीट किया,
पूर्व टेनिस प्लेयर सानिया मिर्जा ने भी पहलवानों के समर्थन में ट्वीट किया. सानिया ने लिखा,
पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि बहुत दुख की बात है कि हमारे चैंपियन खिलाड़ी आज सड़क पर हैं. सहवाग ने ट्वीट कर लिखा,
इसके अलावा हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल, क्रिकेटर इरफान पठान, 1983 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कपिल देव समेत तमाम खिलाड़ियों ने पहलवानों के समर्थन में ट्वीट किया. पहलवानों के समर्थन में विपक्षी दलों के नेताओं की ओर से भी ट्वीट आए. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा,
गहलोत के अलावा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा, राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, एक्टर सोनू सूद, स्वरा भास्कर, उर्मिला मातोंडकर ने भी पहलवानों के समर्थन में ट्वीट किया.
ये तो हो गया आज का अपडेट. अब एक बार पूरे मामले को समझ लेते हैं. कि आखिर दुनिया भर में हिंदुस्तान का नाम ऊंचा करने वाले ये पहलवान धरने पर क्यों बैठे हैं?
ये समझने के लिए हमें चलना होगा तीन महीने पीछे. 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक समेत कई दिग्गज पहलवान इकट्ठा हुए. प्रेस कॉन्फ्रेंस की और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और कुश्ती संघ के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाए. पहलवानों ने आरोप लगाया था कि वे दुनिया में भारत का नाम रोशन करके आते हैं. लेकिन फेडरेशन के अध्यक्ष उन्हें गाली देते हैं और अपशब्दों का प्रयोग करते हैं. मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं. इसके अलावा कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण पर यौन शोषण के आरोप भी लगाए थे.
यहां आपको बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह, कुश्ती संघ के अध्यक्ष होने के साथ-साथ कैसरगंज से बीजेपी सांसद भी हैं. आरोपों पर बृजभूषण की सफ़ाई आई. आरोपों को झूठा बताते हुए उन्होंने कहा था कि अगर आरोप साबित हो जाएं, तो उन्हें फांसी दे दी जाए. साथ ही उन्होंने कुछ सवाल भी उठाए. कहा कि अगर उन पर लगे आरोपों में दम है, तो FIR क्यों नहीं की गई? इसके अलावा उन्होंने कई उदाहरण देकर ये भी साबित करने की कोशिश की कि उन्होंने पहलवानों को कितना सपोर्ट किया. बृजभूषण ने ये भी कहा कि ये उनके खिलाफ कोई बड़ा उद्योगपति साज़िश कर रहा है. इसके साथ ही यूपी और केरल के कुछ पहलवान ब्रजभूषण के समर्थन में भी आए.
हालांकि पहलवानों का धरना जारी रहा तो खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने उनसे मुलाकात की और जांच कमेटी बनाने का आश्वासन दिया. आरोपों की जांच के लिए भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने एक कमेटी बनाई. कमेटी की मुखिया थीं ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम. मैरी के अलावा पहलवान योगेश्वर दत्त, शटलर तृप्ति मुर्गुंडे, SAI सदस्य राधिका श्रीमन, लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना के पूर्व CEO राजेश राजगोपालन और CWG स्वर्ण पदक विजेता बबीता इस निगरानी समिति के सदस्य थे. जांच कमेटी की जांच खत्म हुई अप्रैल में. रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी गई. जिसके बाद फिर से शुरू हुआ धरना. पहलवानों ने आरोप लगाया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट, मंत्रालय को सौंप दी गई और हमें इसके बारे में बताया नहीं गया. साथ ही इस पर सवाल भी उठाए. बजरंग पूनिया ने कहा कि उन्होंने एक आर्टिकल में पढ़ा कि समिति के सदस्यों में से एक के दस्तख़त के बिना ही रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी गई है. पूनिया ने पूछा, ‘अगर समिति का कोई सदस्य रिपोर्ट जमा करने में ही शामिल नहीं है और रिपोर्ट से असहमत है, तो हम उस पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? हमें तो ये तक नहीं बताया गया कि रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी गई है.’
बीते दिन यानी 27 अप्रैल को इंडियन ओलम्पिक असोसिएशन (IOC) की अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद PT Usha ने पहलवानों के प्रदर्शन को अनुशासनहीनता बताते हुए कहा था कि पहलवानों को प्रदर्शन से पहले स्पोर्ट्स अथॉरिटी के पास आना चाहिए था.
इस पर प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने कहा था कि IOC अध्यक्ष PT Usha, महिला एथलीट होने के बावजूद उनकी गुहार नहीं सुन रही हैं.
पीटी ऊषा के बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी पहलवानों के समर्थन में उतरे और कहा,
विनेश फोगाट हों, साक्षी मलिक हों, बजरंग पूनिया या रवि दहिया. ये चार और इनके जैसे सैकड़ों पहलवानों को ट्रेनिंग करके अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबले जीतने थे. देश के लिए और मेडल जीतने थे. नए पहलवान तैयार करने थे. लेकिन महीनों से वो अपनी ही फेडरेशन और सरकार से कुश्ती लड़ रहे हैं. जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. और, बात सिर्फ़ रेसलिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के प्रशासकीय मामलों की ही नहीं है, इस मसले में यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न के आरोप हैं. खिलाड़ियों और फेडरेशन के बीच चल रहे इस टसल को और विस्तार से समझने के लिए हमने बात की इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार मिहिर वसावड़ा से, जो बहुत समय से खेल को कवर कर रहे हैं
आज, 28 अप्रैल के इंडियन एक्सप्रेस में पूर्व अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी जगमती सांगवान और महिला विकास अध्ययन केंद्र की पूर्व निदेशक इंदु अग्निहोत्री ने एक लेख लिखा है. टाइटल है - the sleeping state यानी सोता हुआ राज्य. लिखा है कि सरकार और सरकारी एजेंसियां ही क़ानून का सबसे ज़्यादा उल्लंघन करती हैं. ख़ासकर महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए क़ानूनों का. और न्याय की प्रक्रिया शुरू करने में ही इतनी जटिलताएं हैं कि ज़्यादातर लोग अपने शुरुआती कोशिशों के बाद ही हार जाते हैं. इस घटनाक्रम से देश में महिलाओं की स्थिति के बारे में पता चलता है.
जब टॉप लेवल्स पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की शिकायत - जिन्होंने देश के लिए ख्याति जीती है - उनका ये हश्र होता है, तो संदेश साफ़ है: कुछ मत बोलो.
मंत्रालय ने दावा किया था कि आरोप इतने गंभीर हैं कि उन्हें जांच रिपोर्ट की पड़ताल के लिए और समय लगेगा. ये इकलौता ऐसा केस होता, तो बात और होती. क़ानून अपने हिसाब से काम करेगा, मगर सरकार को पारदर्शी रहना चाहिए. कमेटी की रिपोर्ट के नतीजे जनता के सामने रखे जाएं और जो भी लोग दोषी हों, फ़ौरन उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए.
हमने पहले भी देखा है कि जब-जब राज्य ने निश्चय किया है, एक्शन तेज़ी से हुआ भी है. जून 2022 में साइकिल कोच आर के शर्मा के केस में ये दिखा भी. जैसे ही उसके ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न की शिकायत आई, तुरंत FIR दर्ज की गई और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने उसका कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया था.
आज पहलवानों की शिकायत पर FIR तो दर्ज कर ली जाएगी. पर देखना होगा, कि बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह गिरफ़्तार होते हैं या नहीं. उनके ख़िलाफ़ बाल यौन शोषण की धाराओं में केस दर्ज किया जाता है या नहीं. उन पर POCSO की धाराएं लगाई जाएंगी या नहीं. फिर जांच किस गति से होती है. ये पैटर्न पुराना है कि जैसे ही कोई विरोध करता है, उसे अनुशासन के उल्लंघन करने के आरोप में अलग-थलग कर दिया जाता है. उसके आरोप के बरक्स सामने से आरोप दागे जाने लगते हैं.
ये किसी एक फ़ेडरेशन या संगठन की बात नहीं है. एक जनरल पैटर्न है. इसमें ज़रूरी है कि हम देखें कि चले आ रहे अनुशासन में इस तरह की घटनाएं कैसे हो रही हैं? और अगर ये शिकायतें हैं, तो अनुशासन का फ़र्मा बदला जाए. ऐसे अनुशासन की कोई ज़रूरत नहीं, जहां खिलाड़ियों को ही उत्पीड़न का सामना करना पड़े. ब्रॉन्ज़ पदक विजेता बजरंग पूनिया ने जो कहा था, याद रखिए: 'जब खिलाड़ी देश के लिए मेडल जीतते हैं, आप उनके साथ खड़े हो जाते हैं. जब वो सड़कों पर हैं, आप चुप हैं.'

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