इश्क के नमक को आशिक बेहतर समझते होंगे. लेकिन जुबां पर लगने वाले नमक को पूरीदुनिया समझती है. क्या एनीमल, क्या इंसान. आप जानते हैं इत्ता नमक आखिर आता कहां सेहै? हां, कंपनियां हैं. समंदर में नहाकर नमक बनाने में लगी हुई हैं. लेकिन हम आपकोबताने जा रहे हैं एक ऐसी पाकिस्तानी खान के बारे में, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ीनमक की खान है. खेवड़ा नमक खान. ये खान इत्ती बड़ी है कि आने वाले 500 साल तक नमककी सप्लाई की जा सकती है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से करीब 160 किलोमीटरदूरी पर है झेलम जिला. इस खान से सदियों से सेंधा नमक निकाला जा रहा है. इस जगहइत्ता नमक था कि अभी सैकड़ों साल खुदाई कर नमक निकाला जा सकता है. दुनिया की दूसरीसबसे बड़ी नमक की खान खेवड़ा से पहले ओनटारियो की सिफ्टो कनाडा सॉल्ट माइंस है. हरसाल इस खान से करीब 4.65 लाख टन नमक निकाला जाता है. खान में करीब 18 वर्किंग लेवलऔर 40 किलोमीटर लंबा टनल है. खान के अंदर नमक से बनी एक मस्जिद भी है, जहां जाकरनमाजी भी नमाज अता करते हैं. खान में एक अस्थमा क्लीनिक भी है, जहां नमक की मदद सेफेफड़ों की बीमारी दूर करने की कोशिश की जाती है. अस्थमा क्लीनिक में करीब 12 बेडहैं. यहां खूबसूरती और रोशनी के लिए लगे लैंप भी नमक से बने होते हैं. सिकंदर केघोड़े थे खेवड़ा खान के फाउंडर खेवड़ा खान को मायो खान के नाम से भी जानते हैं. 320बीसी में सिंकदर जब भारत की तरफ आ रिया था, तब ये खान सामने आई थी. किस्सा यूं थाकि सिकंदर के सैनिक इंडिया की तरफ बढ़ रहे थे. सिकंदर के सैनिकों का काफिला जब इसइलाके से गुजर रहा था, तब सैनिकों ने काफिले के घोड़ों को खान की दीवारों को चाटतेहुए देखा. जिसके बाद लोगों को पता चला पाया कि वहां नमक की इत्ती बड़ी खान है. मुगलसे अंग्रेजों तक... सिंकदर के घोड़ों की खोज को मुगलों ने व्यापार में बदल दिया.मुगलों ने खेवड़ा की खान से निकले नमक का बिजनेस शुरू कर दिया. मुगल सल्तनत के बादसिख कमांडर इन चीफ हरि सिंह नालवा ने खान का मैनेजमेंट संभाला. सिख शासन के दौरानखेवड़ा खान से निकलने वाले नमक को खाने और बेचने दोनों के लिए इस्तेमाल किया गया.1872 में अंग्रेजों के आने के बाद खान पर ब्रिटिश सरकार का कब्जा रहा. इस वक्त खानको 'पाकिस्तान मिनिरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन' संभालती है. यहां काम करने वालेमजदूरों को रोजाना करीब 250 से 300 रुपये तक मिलते हैं. हर साल आते हैं ढाई लाखटूरिस्ट खेवड़ा खान इत्ती आकर्षक है कि हर साल करीब ढाई लाख लोग यहां आते हैं. खानके अंदर तक ले जाने के लिए रेल का इंतजाम रहता है. खान के अंदर कई जगह नमकीन पानीके पूल्स हैं. खान से निकलने वाले नमक को शो पीस बनाने के लिए भी यूज किया जाता है.खेवड़ा खान के लैंप, एस्ट्रे, स्टैचू पूरे पाकिस्तान में फेमस हैं.