मरे हुए प्रेमी को कब्र से खोद निकालने पहुंची बदहवास प्रेमिका
ये प्रेम कहानी आपको विचलित कर सकती है.
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फोटो - thelallantop
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आज हम आपको सुनाएंगे एक कहानी. एक रियल लाइफ रोमियो-जूलियट की. और अंत भी उतना ही दुखद, जितना रोमियो और जूलियट का था.
तीन साल पहले की बात है. मुज़फ्फरनगर में रहने वाला दानिश काम की तलाश में हरिद्वार गया. काम नहीं मिला तो जूते-चप्पलों की सेल लगाया करता. उसकी मुलाक़ात हुई बरखा से. जो इश्क में तब्दील हुई. दानिश मुसलमान था. बरखा हिंदू. ज़ाहिर सी बात है, दोनों के इश्क में तकलीफें आनी ही थीं. लेकिन एक तकलीफ इससे भी बड़ी थी. वो ये कि बरखा शादीशुदा थी.
लेकिन दोनों ने इन बातों की परवाह नहीं की. साथ जीने-मरने की कसमें तक खा डालीं. दानिश घर पे आए शादी के सभी रिश्ते ठुकराता रहा. और बरखा ने अपने पति को छोड़ दिया. अपनी चार साल की बेटी को अपने माता-पिता के हवाले कर. दानिश के घरवालों ने तो धीरे-धीरे बरखा से मिलने पर रोक-टोक लगानी बंद कर दी. लेकिन बरखा के घर वालों ने उसकी शादी किसी और से तय कर दी.
दानिश से ये बात बर्दाश्त नहीं हुई. उसने जहर खा लिया. फिर बरखा को फ़ोन कर कहा, मैं दुनिया छोड़ कर जा रहा हूं. बरखा सब कुछ छोड़ दानिश से मिलने मुज़फ्फरनगर भागी. लेकिन जब तक वो पहुंचती, दानिश मर चुका था. बरखा दानिश की लाश पर रोती हुई बदहवास हुई जाती थी. बरखा के घर वालों ने किसी तरह उसे लाश से अलग किया. और दानिश की लाश को दफना दिया गया.
लेकिन बरखा दानिश को एक बार और देखना चाहती थी. इसलिए वो फिर दानिश की कब्र के पास सुबह ही पहुंच गई. उसकी कब्र खोदने. और फिर वापस नहीं आई.
कुछ लोगों ने देखा बरखा दानिश की कब्र पर अचेत पड़ी थी. और पास में पड़ी थीं बरखा की चप्पलें. और ज़हर की शीशी.
बरखा को मौके पर मौजूद लोगों ने अस्पताल पहुंचा दिया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. हां, ये अखबारी वाक्य हैं. क्योंकि हमारा समाज प्यार करने वालों से इतनी नफरत करता है. कि न जाने कितनी प्रेम कहानियां अखबारों के कॉलमों पर ख़त्म हो जाती हैं.
लेकिन दोनों ने इन बातों की परवाह नहीं की. साथ जीने-मरने की कसमें तक खा डालीं. दानिश घर पे आए शादी के सभी रिश्ते ठुकराता रहा. और बरखा ने अपने पति को छोड़ दिया. अपनी चार साल की बेटी को अपने माता-पिता के हवाले कर. दानिश के घरवालों ने तो धीरे-धीरे बरखा से मिलने पर रोक-टोक लगानी बंद कर दी. लेकिन बरखा के घर वालों ने उसकी शादी किसी और से तय कर दी.
दानिश से ये बात बर्दाश्त नहीं हुई. उसने जहर खा लिया. फिर बरखा को फ़ोन कर कहा, मैं दुनिया छोड़ कर जा रहा हूं. बरखा सब कुछ छोड़ दानिश से मिलने मुज़फ्फरनगर भागी. लेकिन जब तक वो पहुंचती, दानिश मर चुका था. बरखा दानिश की लाश पर रोती हुई बदहवास हुई जाती थी. बरखा के घर वालों ने किसी तरह उसे लाश से अलग किया. और दानिश की लाश को दफना दिया गया.
लेकिन बरखा दानिश को एक बार और देखना चाहती थी. इसलिए वो फिर दानिश की कब्र के पास सुबह ही पहुंच गई. उसकी कब्र खोदने. और फिर वापस नहीं आई.
कुछ लोगों ने देखा बरखा दानिश की कब्र पर अचेत पड़ी थी. और पास में पड़ी थीं बरखा की चप्पलें. और ज़हर की शीशी.
बरखा को मौके पर मौजूद लोगों ने अस्पताल पहुंचा दिया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. हां, ये अखबारी वाक्य हैं. क्योंकि हमारा समाज प्यार करने वालों से इतनी नफरत करता है. कि न जाने कितनी प्रेम कहानियां अखबारों के कॉलमों पर ख़त्म हो जाती हैं.
