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MP: विनीता ने घूंघट की आड़ में अनीता बन जीत ली प्रधानी, अनीता को पता ही ना चला

जिला निर्वाचन अधिकारी ने विनीता को अनीता के नाम पर जीत का सर्टिफिकेट दे दिया.

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विनीता ने अनीता बनकर लड़ा चुनाव (सांकेतिक फोटो- आजतक)
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ज्योति जोशी
2 सितंबर 2022 (Updated: 2 सितंबर 2022, 07:53 PM IST)
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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में चुनाव में गड़बड़ी का एक अनोखा मामला सामने आया है. घटना राजगढ़ जिले की है. बीती जुलाई यहां पंचायत के चुनाव (Panchayat Elections) हुए थे. पंचायत चुनाव में जनता गांव के सरपंचों को चुनती है. खबर है कि एक महिला ने किसी और के नाम पर चुनाव लड़ा और जीत भी गई. खास बात ये है कि महिला को जीत का प्रमाण पत्र भी दे दिया गया. घूंघट की आड़ में किसी और के नाम से चुनाव लड़ने का ये मामला हैरान कर देने वाला है.

विनीता ने अनीता बनकर लड़ा चुनाव

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, राजगढ़ जिले के भीलखेड़ा ग्राम पंचायत में विनीता नाम की महिला ने अनीता बनकर सरपंच बनने का प्रमाण-पत्र हासिल कर लिया. मामला सामने तब आया, जब उस पंचायत में सरपंच पद का चुनाव हारने वाले प्रत्याशी ने इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की.

घूंघट की आड़ में…

जांच में सारा सच सामने आ गया. पता चला कि गांव की विनीता नाम की महिला ने अनीता बनकर चुनाव लड़ा और जीत गई. अब सवाल है कि आखिर जिला निर्वाचन अधिकारी ने उसे जीत का प्रमाण-पत्र कैसे दे दिया. पता चला कि प्रमाण पत्र लेने के लिए विनीता निर्वाचन अधिकारी के सामने घूंघट डालकर पहुंची थी. जिससे किसी को पता ही नहीं चला कि महिला विनीता है या अनीता.

इधर ये मामला कोर्ट पहुंचा. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई. खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग और कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. खबर है कि मामले की आगली सुनवाई 13 सितंबर को होनी है.

अनीता को खबर तक नहीं 

रिपोर्ट के मुताबिक, दरअसल विनीता का नाम गांव की वोटर लिस्ट में था ही नहीं. वहीं अनीता का नाम वोटर लिस्ट में था, लेकिन वो कई सालों से गांव से बाहर राजस्थान में रह रही हैं. अनीता पिछले 15 साल से राजस्थान में है और उन्हें इस मामले को लेकर कोई जानकारी ही नहीं है. इसलिए अनीता के नाम पर चुनाव लड़ा गया और अनीता को लोगों ने जिताया भी. 

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