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धांसू फैसला! बेटियां भी बन सकती हैं घर की मुखिया

बुद्धि चाहे धेले भर की न हो, पर घर में बेटा हो तो लोग उसे ही घर का मुखिया मान लेते हैं. लेकिन हाईकोर्ट ने बम बम करने वाला फैसला दिया है गुरु.

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1 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 31 जनवरी 2016, 05:22 AM IST)
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बुद्धि चाहे धेले भर की न हो. पर अगर घर में बेटा है, तो ज्यादातर घरों में उसे ही मुखिया मान लिया जाता है. लेकिन गुरु, सोच बदलिए, दुनिया बदलिए. दिल्ली हाईकोर्ट ने बढ़िया फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा, 'घर में जो सबसे बड़ा होगा. वही घर का मुखिया कहलाएगा. चाहे फिर बेटा हो या बेटी.' ऐसा उस कंडीशन में होगा, जब घर में कोई दूसरा मुखिया न हो. यानी मां, बाप या किसी गार्जियन के न होने की कंडीशन में जो सबसे बड़ा, वही मुखिया. अब तक हमारी सोसाइटी में ज्यादातर पुरुषों को ही मुखिया मान लिया जाता है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, जस्टिस नाजमी वाजिरी ने कहा- अगर कोई लड़का पहले पैदा होकर घर के मुखिया का रोल प्ले कर सकता है तो लड़कियां भी ऐसा कर सकती हैं. प्रॉपर्टी का लोड? मुखिया बनकर सबसे बड़ा फायदा ये होता है. कि ज्यादातर सारे बड़े फैसले पुरुष ही लेते हैं. प्रॉपर्टी पर भी अपना ही हक समझने लगते हैं. क्योंकि सोच तो ज्यादातर की वही है, बेटी पराया धन होती हैं. विदा करो. छुट्टी पाओ. तो इस फैसले से प्रॉपर्टी के लालचियों और परंपरा वालों की भी सुलगनी तय है. केस क्या था? जिस केस में कोर्ट ने ये ऑर्डर दिया है, उसमें बाप और अंकल्स की डेथ के बाद घर की बेटी ने केस दर्ज करवाया था. केस में लड़की ने अपने भाइयों पर केस किया था. ये लड़की घर में बड़ी थी. जब बारी हक देने की आई, तो बेटे मालिक बनकर बैठ गए. पर कोर्ट ने हक देने में देर न लगाई. जज साहेब बोले- 2005 के हिंदू एक्ट संशोधन के मुताबिक, सबको बराबरी का हक है. अब तक न जाने क्यों औरतों को मुखिया नहीं बनाया जाता था. महिलाएं भी आज देश में बराबर होकर चल रही हैं.

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