श्रीनगर में सोमवार 8 नवंबर को आतंकवादियों ने एक कश्मीरी पंडित की दुकान केकर्मचारी इब्राहिम खान की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस हमले की जिम्मेदारीमुस्लिम जांबाज़ फोर्स ने ली है. संगठन ने कथित तौर पर उर्दू में लिखे गए एक पत्रमें कहा है कि इस हमले का असली लक्ष्य दुकान मालिक डॉ संदीप मावा और उनके पिता रोशनलाल मावा थे. हालांकि, ये दोनों ही हमले से बच गए. आतंकी संगठन ने अपने पत्र में यहभी लिखा है कि ये दोनों पिता-पुत्र भारतीय एजेंसियों के साथ काम कर रहे थे और इसलिएउन्हें निशाना बनाया गया. वे गैर-स्थानीय लोगों को कश्मीर लाने में शामिल हैं. डॉसंदीप मावा हमले से कैसे बचे सोमवार को हुए इस हमले के बाद संदीप मावा ने आजतक कीपूजा शाली से बातचीत की है. इस बातचीत में उन्होंने हमले को लेकर खुलकर बात की.संदीप मावा ने कहा, "मुझे दिन 8 नवंबर को करीब 3 बजे पुलिस का फोन आया. उन्होंनेबताया कि आप पर हमले की खुफिया सूचना मिली है. इसके बाद मैं हड़बड़ी में दूसरी गाड़ीमें दुकान से चला आया. देर शाम 8 बजे दुकान बंद कर इब्राहिम मेरी गाड़ी लेकर आया.आतंकियों ने समझा कि गाडी में मैं हूं और उन्होंने गोलियां चला दीं, चार गोलियांमारीं, जिनसे इब्राहिम की मौत हो गयी." डॉ संदीप मावा ने बताया कि इब्राहिम उनकेभाई जैसा था, और उनकी फार्मेसी की दुकान पर बीते 13 सालों से काम कर रहा था. "चिढ़ेहुए हैं आतंकवादी" डॉ संदीप मावा ने आजतक से बातचीत में यह भी कहा कि अब आतंकवादीचिढ़े हुए हैं और अब वे आम कश्मीरियों को ज्यादा परेशान करेंगे. डॉ मावा के मुताबिक,"कश्मीर के लोग खुशहाली और शांति चाह रहे हैं, वे अब कश्मीर की तरक्की चाहते हैं.कश्मीरी जनता लड़ाई-झगड़े को छोड़ आगे बढ़ना चाहती है. यह बात आतंकवादियों को हजम नहींहो रही है क्योंकि इससे उनकी अलगाववादी विचारधारा को धक्का लग रहा है. ऐसे में येअल्पसंख्यकों (कश्मीरी पंडितों) को निशाना बना रहे हैं, अल्पसंख्यकों को मारने परअंतरराष्ट्रीय स्तर की खबर बन जाती है.""आतंकवाद की नाव के डूबने का समय आ गया है"... कश्मीरी पंडित की दुकान में काम करनेवाले सेल्समैन इब्राहिम की आतंकियों ने की हत्या, @PoojaShali ने ख़ास बातचीत मेंव्यापारी डॉ. संदीप मावा ने सुनाया पूरा घटनाक्रम पूरा इंटरव्यू:https://t.co/z4d2WTveDD#ReporterDiary #JammuAndKashmirpic.twitter.com/KXumvfiAqT— AajTak (@aajtak) November 9, 2021 "कश्मीरियत का जज्बा मुझमें भरा है, मैं अभीडरा नहीं हूं" पंडित रोशन लाल मावा ने लगभग तीन दशकों के बाद 2019 में घाटी मेंअपना मसाले का कारोबार फिर से शुरू किया था. प्रसिद्ध व्यवसायी रोशन लाल मावा परअक्टूबर 1990 में उनकी दुकान के बाहर आतंकियों ने हमला किया था. उस घटना में उन्हेंचार गोलियां लगी थीं. इसके बाद मावा परिवार ने कश्मीर छोड़ दिया था, हालांकि, कुछसमय बाद वे फिर वापस आए. 8 नवंबर को उनके बेटे संदीप मावा की दुकान के बाहर फिरहमला हुआ. लेकिन कई हमले झेलने के बाद भी संदीप मावा का कहना है कि वे आतंकियों सेडरे नहीं हैं. बातचीत में संदीप मावा ने कहा, "इन आतंकियों का खेल डर पर टिका है,क्योंकि इससे ही इनकी रोजी-रोटी चलती है. कश्मीर को तबाह करने से ही उनकी दुकानेंचमकती हैं. अगर आप डर गए तो उनका फायदा है, नहीं तो उन्हें कश्मीर छोड़कर भागनापड़ेगा. कश्मीरियत का जज्बा मुझमें भरा है, मैं अभी डरा नहीं हूं, अगर मैं डरा होतातो श्रीनगर छोड़कर जा चुका होता. मैं यह लड़ाई लड़ना चाहता हूं. यह हिंदू, मुस्लिम,सिख, बौद्ध और ईसाई सभी को मिलकर लड़नी पड़ेगी. तभी इसका अंत होगा." बातचीत में आगेडॉ संदीप मावा ने कहा, "आतंकी यहां के लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं कि वे कश्मीर कोआजाद करना चाहते हैं, कश्मीरियों को हक दिलाना चाहते हैं. लेकिन ऐसा है नहीं, ये तोसभी कश्मीरियों को मार रहे हैं. मैं मरता या इब्राहिम, मरा तो कश्मीरी ही. लोग समझगए हैं कि ये बौद्धिक लोग नहीं हैं,बौद्धिक वो होता है जो, अपनी कौम को तरक्कीचाहे, उसके भले की बात करे. ये पेड एजेंट हैं जो झूठ बोलकर लोगों को वेबकूफ बन रहेहैं. कश्मीरी अब इन्हें रिजेक्ट कर रहे हैं. अब आतंकवाद की नाव के डूबने का समय आगया है."