'हॉट' होना इस MLA की ख़ास बात है, बेवकूफ़ होना आपकी
अंगूरलता ने अपनी शक्ल के दम पर चुनाव जीते हैं. ठीक उसी तरह, जिस तरह सानिया मिर्जा ने अब तक अपनी शक्ल के दम सारी जीतें हासिल की हैं.
फोटो - thelallantop
"(अंगूरलता) डेका ने बतद्रोवा इलाके से जीत हासिल की है उन्होंने कांग्रेस के गौतम बोरा को हराया है. इसके अलावा उनकी एक और ख़ास बात यह है की वो बीजेपी की सबसे हॉट और सेक्सी एमएलए हैं. वो एक फिल्म एक्ट्रेस भी हैं."
चुनाव आते हैं. जाहिर सी बात है उसमें कोई हारता है, कोई जीतता है. जो जीतता है, उसको मिलता है लड्डू. और फुटेज, टीवी पर. जिसमें देश को बताया जाता है कि फलां नेता ने जीतने के पहले कितने बढ़िया काम किए. लेकिन अगर आप असम से विधायक बनने वाली अंगूरलता डेका हैं, तो मुमकिन है लोग ये बात कर रहे होंगे कि स्विमिंग पूल में ट्रांसपेरेंट कपड़े पहन आप कितनी हॉट लग रही हैं.
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और अगर गलती से यूट्यूब पर इनका नाम टाइप कर दें, तो पाएंगे कि औरतों के चरित्र-रक्षकों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है.1.
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अंगूरलता बीजेपी की युवा नेता हैं. पहले एक्ट्रेस थीं. बंगाली फिल्मों में काम किया. फिल्म की डिमांड के हिसाब से कपड़े पहने. तो बीजेपी से 'मॉरल' लेवल पर बदला लेने के लिए अंगूरलता की पुरानी तस्वीरें लगा बीजेपी के चरित्र की चीर-फाड़ करनी शुरू कर दी.
https://twitter.com/raj_kamalyadav/status/734686519634460672
https://twitter.com/mukunda_bora/status/734423565307613184
https://twitter.com/seshadriroy/status/734762501368385536
और सबसे ज्यादा वायरल हुई वो तस्वीर जिसमें अंगूरलता स्विमिंग पूल में बैठी 'शराब जैसी' कोई चीज पी रही हैं. और उनकी जुर्रत तो देखो, कपड़े तक भिगो लिए हैं.
हमें लगता है हमारे रीडर बहुत समझदार लोग हैं. तो जो लोग इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं, उनसे एक मासूम सा सवाल पूछना है. क्या वो औरतें जो लाइफ में कभी चुनाव लड़ना चाहती हैं, पूल पार्टी में वाटरप्रूफ जैकेट पहन कर जाया करें? और अगर दोस्तों की पार्टी में शराब न पिएं, तो क्या पिएं?

ट्विटर से लेकर फेसबुक तक ये चल रहा है कि अंगूरलता ने अपनी शक्ल के दम पर चुनाव जीते हैं. हां, बिल्कुल. ठीक उसी तरह न, जिस तरह सानिया मिर्जा ने अब तक अपनी शक्ल के दम सारी जीतें हासिल कीं. जिस तरह टीना डाबी अपनी खूबसूरती के चलते UPSC टॉप कर गईं.
औरत सिर्फ एक योनि, एक स्तनों का जोड़ा, और एक सुंदर शक्ल ही नहीं है. लेकिन इस बात को लोगों के दिमाग में उतारने के लिए शायद नई भाषा ईजाद करनी पड़ेगी.