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ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस, पाकिस्तान मौजूद, भारत गायब, आखिर क्या है पूरी कहानी

Trump's Board of Peace & India: लगभग 35 देशों के साथ मिलकर डॉनल्ड ट्रंप ने अपना नया बोर्ड ऑफ पीस लॉन्च कर दिया है. भारत को भी इसमें शामिल होने का न्योता मिला है, लेकिन लॉन्च इवेंट से भारत नदारद रहा. इसकी क्या वजहे हैं. जानिए विस्तार से.

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why was india absent from donald Trump board of peace launch event know reasons
भारत बोर्ड ऑफ पीस के लॉन्च इवेंट से दूर रहा. (Photo: Reuters/ITG)
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सचिन कुमार पांडे
23 जनवरी 2026 (Published: 07:56 AM IST)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दुनिया के कई देशों को मिलाकर एक बोर्ड ऑफ पीस बनाया है. देखने में यह एक तरह से संयुक्त राष्ट्र संघ जैसा ही लग सकता है. लेकिन इसके कर्ता-धर्ता खुद ट्रंप ही होंगे. गुरुवार, 22 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में इसकी औपचारिक रूप से शुरुआत की गई. यानी एक तरह से इसे लॉन्च किया गया.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 35 देशों ने इसे जॉइन भी कर लिया है. इनमें हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी शामिल है. इसके अलावा अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाकिस्तान, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और वियतनाम जैसे देशों ने भी बोर्ड को जॉइन कर लिया है.

बोर्ड के लॉन्च के मौके पर इन सभी देशों के प्रमुख मौजूद रहे. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी में बोर्ड में जुड़ने के समझौते पर हस्ताक्षर किए. मालूम हो कि भारत को भी इस बोर्ड से जुड़ने का न्योता मिला है. हालांकि भारत ने अभी तक कंफर्मेशन नहीं दिया है कि वह बोर्ड से जुड़ेगा या नहीं. ऐसे में सवाल है कि आखिर क्यों भारत इससे अब तक नहीं जुड़ा है और इसके लॉन्चिंग के मौके पर नदारद रहा.

क्यों गायब रहा भारत?

सबसे पहले बता दें कि भारत ही नहीं, बल्कि रूस, चीन समेत यूरोप के लगभग सभी बड़े देश इस इवेंट में नहीं आए. न ही इन देशों ने अब तक ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस को जॉइन नहीं किया है. हम यहां पर बात भारत के संदर्भ में करेंगे कि वो इस इवेंट में शामिल क्यों नहीं हुआ.

पहली तो सीधी वजह यही है कि भारत ने अब तक यह फैसला नहीं लिया है कि उसे बोर्ड में शामिल होना है या नहीं. इंडिया टुडे ने भारत सरकार के अधिकारियों के हवाले से बताया कि भारत अभी भी इस प्रस्ताव की जांच कर रहा है. क्योंकि इससे कई संवेदनशील जियोपॉलिटिकल और सिक्योरिटी के मुद्दे शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि भारत ने लगातार फिलिस्तीन मुद्दे में दो-राज्य समाधान का समर्थन किया है. इसके तहत इजरायल और फिलिस्तीन मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ रहें.

भविष्य पर अनिश्चितता

दूसरी वजह यह है कि अभी तक यह भी साफ नहीं हुआ है कि यह बोर्ड काम कैसे करेगा. इसका भविष्य क्या होगा. इस पर कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी. बोर्ड के चेयरमैन खुद डॉनल्ड ट्रंप ही रहेंगे. उन्हें हटाया भी नहीं जा सकता. ऐसे में इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि वह इस बोर्ड को अपनी मर्जी के मुताबिक चलाएं. आशंका है कि शायद अन्य देशों की इसमें ज्यादा भूमिका न रहे.

वैसे तो बोर्ड को गाजा में शांति स्थापित करने और उसके पुनर्निर्माण की देख-रेख करने के उद्देश्य से बनाया गया था. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि बोर्ड का रोल इससे कहीं ज्यादा रहेगा. ऐसे में आशंका यह भी है कि कहीं यह संयुक्त राष्ट्र संघ की जगह तो नहीं ले लेगा. इन्हीं सब अनिश्चितताओं को देखते हुए शायद भारत अभी जल्दबाजी में बोर्ड के संबंध में कोई निर्णय नहीं ले रहा है. और सिर्फ भारत ही नहीं, अन्य बड़े देश भी इससे जुड़ने में हिचकिचाहट दिखा रहे हैं. फ्रांस ने तो सीधे मना कर दिया है कि वह इसमें शामिल नहीं होगा.

A man sits holding up a document as others stand behind him clapping.
Board of Peace के लॉन्च इवेंट के मौके पर जुटे देश. (Photo: Reuters)
रूस-चीन भी अधर में

वहीं ब्रिटेन ने कहा है कि वह फिलहाल तो इसमें शामिल नहीं हो रहा है. चीन ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है. रूस ने कहा कि वह प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि रूस फिलिस्तीनियों का समर्थन करने के लिए पैसे देने को तैयार है. हालांकि अगर भारत इस बोर्ड से जुड़ना चाह भी रहा होगा, तो भी गुरुवार के इवेंट में शामिल होना उसके लिए मुफीद नहीं था.

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इसकी बड़ी वजह है इवेंट में पाकिस्तान का भी होना. बोर्ड ऑफ पीस के लॉन्च के मौके पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ डॉनल्ड ट्रंप के बगल में बैठे हुए थे. भारत बिल्कुल नहीं चाहेगा कि वह पाकिस्तान के साथ किसी भी ऐसे इवेंट में शामिल हो, जहां भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहबाज शरीफ के साथ मंच साझा करें. डॉनल्ड ट्रंप की मौजूदगगी में तो बिल्कुल नहीं. नहीं तो वह फिर से दोनों देश के बीच सीजफायर कराने का दावा ठोंकने लगेंगे. भारत के लिए यह कतई मंजूर नहीं है. फिलहाल तो यह देखने वाली बात होगी कि भारत इस बोर्ड से जुड़ता है या नहीं. 

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