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महाराष्ट्र के रत्नागिरी में रिफाइनरी प्रोजेक्ट को लेकर क्या बवाल चल रहा है?

गांव के लोग इस प्रोजेक्ट का विरोध क्यों कर रहे हैं?

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26 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 26 अप्रैल 2023, 12:04 AM IST)
protest over ratnagiri refinery
पुलिस ने बारसू गांव में बड़ी सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है. (फोटो: इंडिया टुडे)
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महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के बारसू गांव में एक लैंड सर्वे को लेकर बवाल मचा हुआ है. लैंड सर्वे पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी के एक प्रोजेक्ट से जुड़ा है. स्थानीय लोग इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. इस प्रोजेक्ट का नाम है, 'रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड'. इस मामले में प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे 100 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था, जिन्हें बाद में जमानत पर छोड़ दिया गया.

क्या है रत्नागिरी रिफाइनरी प्रोजेक्ट?

‘रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड’ एशिया के सबसे बड़े रिफाइनरी प्रोजेक्ट में से एक है. देश की तीन प्रमुख तेल कंपनियां - इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम इस रिफाइनरी का हिस्सा होंगे. इस प्रोजेक्ट का ऐलान 2015 में ही किया गया था. इसके लिए सबसे पहले रत्नागिरी के नाणर गांव को चुना गया था. तब शिवसेना इस प्रोजेक्ट के खिलाफ थी, पार्टी ने स्थानीय लोगों के विरोध का हवाला दिया था. इसके बाद इस प्रोजेक्ट के लिए बारसू-सोलगांव का इलाका फाइनल किया गया.

इस प्रोजेक्ट का विरोध क्यों हो रहा?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण एक्टिविस्ट, बारसू और सोलगांव गांव के लोग इस रिफाइनरी प्रोजेक्ट का विरोध प्रदूषण को लेकर कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रोजेक्ट की वजह से यहां का वातावरण और पानी दूषित हो जाएगा. यह क्षेत्र के लोग काफी हद तक खेती पर निर्भर करते हैं. ये क्षेत्र अल्फांसो आम के लिए भी जाना जाता है. 25 अप्रैल को रिफाइनरी के लिए ज़मीन का सर्वे शुरू होना था, लेकिन स्थानीय लोगों ने 24 अप्रैल की सुबह से ही विरोध करना शुरू कर दिया.

इंडिया टुडे के मुस्तफा शेख़ की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा,

"12 जनवरी, 2022 को एक पत्र में उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री रहते हुए रिफाइनरी के लिए इस प्लॉट का प्रस्ताव दिया था. ठाकरे ने प्रोजेक्ट के लिए केंद्र को बारसू में 13,000 एकड़ जमीन का प्रस्ताव दिया. लेकिन अब उद्धव ठाकरे अपना रुख बदल रहे हैं और इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं. उन्हें लोगों को समझाने में मदद करनी चाहिए. इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी. लेकिन अब विपक्ष प्रदर्शनकारियों का साथ दे रहा है."

शिवसेना ने क्या कहा?

शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के विधायक भास्कर जाधव ने कहा कि प्रदर्शनकारी स्थानीय लोग हैं और इनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा, 

“मैंने BJP को चुनौती दी कि करीब 4 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से अगर लोगों को रोजगार मिलेगा तो उन्हें इस पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए. मैं खुद उस जगह जाऊंगा. हमारी लोगों के साथ है. लोग जो चाहते हैं, हम उसके साथ चलेंगे. उद्धव ठाकरे ने बारसू प्रोजेक्ट का सुझाव दिया था, इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने अपना रुख बदल लिया है. उन्होंने कहा है कि शिवसेना की स्थिति कभी नहीं बदली. हम लोगों के साथ खड़े रहेंगे.”

क्या बोले शरद पवार?

बारसू-सोलगांव में 25 अप्रैल को रिफाइनरी का विरोध करने वाले लगभग 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था. इसमें महिलाएं भी शामिल थीं. हालांकि, खबर है कि उन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया.

NCP प्रमुख शरद पवार ने 26 अप्रैल को कहा कि सरकार को स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करनी चाहिए. शरद पवार ने कहा,

“विरोध के कारणों को समझना जरूरी है. हमें स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करके कोई और रास्ता निकालना चाहिए. तभी इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता है.”

आजतक के ऋत्विक भालेकर की रिपोर्ट के मुताबिक इस सिलसिले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने शरद पवार से बात की. जानकारी के मुताबिक शिंदे ने शरद पवार से कहा है कि वे जल्द ही विरोध कर रहे लोगों से बात करेंगे. उन्होंने ये भी आश्वासन दिया कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए केस भी वापस लिए जाएंगे.

वीडियो: BJP-उद्धव ठाकरे के अब भी साथ आने की गुंजाइश?

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