तो अब शनि मंदिर में तेल चढ़ाने से औरतों का भला हो जाएगा?
बधाई हो, जिस परंपरा को आप तोड़ने का दावा कर रही हैं, उसी के जाल में आप जा घुसी हैं.
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फोटो - thelallantop
कई दिनों तक चले बवाल और बहस के बाद अब औरतों को शनि शिंगणापुर मंदिर के अंदर तेल चढ़ाने की इजाज़त मिल गई. शिंगणापुर मंदिर के ट्रस्ट ने आज यानी 8 अप्रैल को ये फैसला लिया.
शनि मंदिर की मुख्य शिला तक औरतें नहीं जा सकती थीं. ये परंपरा 400 साल पुरानी थी. जो इस मान्यता से जन्मी थी, कि औरतों को शनि की पूजा नहीं करनी चाहिए. तो केवल पुरुष ही अंदर जा कर तेल चढ़ा सकते थे. ये बात औरतों को परेशान करती थी.
29 नवंबर 2015 को एक औरत ने शिंगणापुर मंदिर के चबूतरे पर चढ़कर शनि देव को तेल चढ़ाया था. और उसके बाद मंदिर के ट्रस्ट ने पूरे मंदिर को दूध से धुलवाया था. मानो औरत के छूने से पुरुषों भगवान गंदे हो गए थे. इस घटना का महिला संगठनों ने खूब विरोध किया था. जिसमें भूमाता ब्रिगेड की मुख्य भूमिका रही थी.
जनवरी में लगभग 1500 औरतों ने मंदिर में घुसना चाहा था, लेकिन उन्हें पुलिस ने रोक लिया था. पूरे बवाल के चलते मंदिर के ट्रस्ट ने पुरुषों पर भी मुख्य शिला तक जाने की रोक लगा दी थी. लेकिन 8 अप्रैल की सुबह हजारों पुरुष मंदिर के अंदर घुस गए. तो महिलाएं क्यों पीछे रहतीं. भूमाता ब्रिगेड की लीडर तृप्ति देसाई कई एक्टिविस्टों के साथ मंदिर में घुस गईं.
देश में हल्ला हो गया. कि औरतों की जीत हुई. ये बात ज़रा समझ नहीं आ रही. कि मंदिर में पूजा करने की छूट से औरतों का भला कैसे होगा. बल्कि सच तो ये है कि जिस धर्म को पाने के लिए इतनी लड़ाई की जा रही है, वही धर्म औरतों को पुरुषों का गुलाम समझता आया है. जो भगवान औरतों के छू लेने भर से गंदा हो जाता है, उसी की पूजा करना औरतों की जीत कैसे हुई?
ठीक कहा आपने, बात चॉइस की है. पूजा करना आपकी चॉइस है. धार्मिक होना आपकी चॉइस है. बात अधिकारों की है. किसी भी मंदिर में घुसना औरत का अधिकार है.
अब जब औरतें भगवान को तेल चढ़ा सकेंगीं, भगवान खुश होकर उनकी नइया पार लगा देंगे. लड़कियां स्कूल-कॉलेज जाने लगेंगी. पुरुष रेप करना बंद कर देंगे. परिवार दहेज लेना-देना छोड़ देंगे. बधाई हो, जिस परंपरा को आप तोड़ने का दावा कर रही हैं, उसी के जाल में आप जा घुसी हैं.
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