सरकार इस शहर को छोड़ने के लिए 6 लाख रुपये क्यों दे रही है?
वजह जानकर कहेंगे- अच्छा ऐसा भी होता है!

जापान की सरकार अपने नागरिकों को देश की राजधानी टोक्यो (Tokyo) को छोड़ने के लिए पैसे दे रही है. कितने पैसे? एक मिलियन येन यानी 6 लाख 22 हज़ार रुपये. और, सरकार कोई मेहरबान नहीं है. दरअसल, टोक्यो में आबादी क्षमता से ज़्यादा बढ़ गई है. इसलिए सरकार चाहती है कि लोग टोक्यो से विस्थापित होकर आस-पास के शहरों में बसें.
कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों की रिपोर्ट्स के मुताबिक़, जो परिवार भी इस स्कीम को लेने योग्य हैं, उन्हें वित्तीय वर्ष 2023 से टोक्यो महानगरीय क्षेत्र से निकलकर आस-पास के इलाक़ों में जाने के लिए लगभग 6 लाख रुपये मिलेंगे.
बात बिगड़ी कैसे?रिपोर्ट्स बताती हैं कि जापान के सामने बड़ी चुनौती है. लेकिन ऐसा हुआ कैसे? कारण है जापान का डेमोग्राफ़िक डिविडेंट. देश में पूंजीवाद को बढ़ावा मिला. ख़ूब तरक्की हुई. ख़ूब शहरीकरण हुआ. जापान का बर्थ रेट कम है और लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी ज़्यादा. युवा शहरों में अवसरों के लिए जाने लगे और गांव ख़ाली हो गए. ग्रामीण इलाक़ों में तेज़ी से आबादी घटी. इस वजह से गांवों में टैक्स कलेक्शन कम हो गया.
इसलिए सरकार की अब मंशा है कि लोग विकासशील या कम विकसित शहरों को आबाद करें. ताकि वहां आर्थिक तरक्की हो और बसावट का विकेंद्रीकरण हो.
जापान की सरकार ने 2019 में ही ये पहल शुरू की थी. वो परिवार, जो टोक्यो महानगरीय इलाक़े में पांच साल से रह रहे थे, उन्हें ट्रांस्फ़र करने के लिए बढ़ावा दिया. सहायता राशि देने की बात कही. स्कीम के तहत परिवार अपनी नौकरी वर्क-फ़्रॉम-होम में जारी रख सकते हैं. लोकल बिज़नेस में काम कर सकते हैं या अपना कोई बिज़नेस शुरू कर सकते हैं. और, बिज़नेस शुरू करने के लिए वो और ज़्यादा वित्तीय सहायता मांग सकते हैं.
2019 में कुल 71 परिवारों ने इस स्कीम के तहत रजिस्टर किया. फिर 2021 में 1,184 परिवारों ने इसमें हिस्सा लिया है.
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