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314 बैलेस्टिक मिसाइलें, 1672 ड्रोन छोड़े... ईरान दुबई-अबुधाबी पर ही क्यों कर रहा सबसे ज्यादा हमले?

Iran के हमलों ने UAE में रोजमर्रा की लाइफ में अड़चन पैदा की है. एयरस्पेस बंद कर दिए गए, फ्लाइट रोक दी गईं और आर्थिक मोर्च पर भी कमजोरी महसूस की गई. राजधानी Abu Dhabi से लेकर Dubai और Sharjah जैसे शहरों को भी ईरान ने नहीं बख्शा.

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UAE के दुबई में ईरान के हमलों के बाद शारजाह में अटैक के बाद उठता धुआं. (AP/Altaf Qadri, File)
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मौ. जिशान
18 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 01:38 PM IST)
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सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से वेस्ट एशिया में ईरान की आक्रामकता बनी हुई है. अमेरिका के कथित मिसाइल हमले में मीनाब की 165 से ज्यादा स्कूली बच्चियों की मौत ने ईरान को और भड़का रखा है. ईरान बिना कोई रहम दिखाए इजरायल समेत अरब देशों में अमेरिकी बेसों पर मिसाइल और ड्रोन दाग रहा है. ताबड़तोड़ हमलों ने वेस्ट एशिया में गदर मचा रखा है. लेकिन, ईरान सबसे ज्यादा चोट यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) को पहुंचा रहा है.

सऊदी अरब खाड़ी में एक बड़ी मिलिट्री ताकत है और अमेरिका का करीबी साथी है. लेकिन, ईरान ने सऊदी अरब पर उतने बड़े लेवल का हमला नहीं किया, जितना उसने UAE पर किया है. ईरान ने बहरीन, कतर और कुवैत जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों के मुकाबले भी UAE पर ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं.

इंडिया टुडे से जुड़े आनंद सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, वेस्ट एशिया और नॉर्थ अफ्रीका के सीनियर एनालिस्ट रयान बोहल ने न्यूयॉर्क के WXXI न्यूज के एक आर्टिकल में कहा कि ईरान, अमेरिका के UAE जैसे हाई-प्रोफाइल साथी पर हमला करके 'पश्चिमी देशों को ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक और सामाजिक तकलीफ देना चाहता है' और अमेरिका पर दबाव बनाना चाहता है.

Minab School Girls
ट्यूनिशिया में मीनाब में मारी गई स्कूली बच्चियों के फोटो दिखाए गए. (AP/Ons Abid)

इन हमलों ने UAE में रोजमर्रा की लाइफ में अड़चन पैदा की है. एयरस्पेस बंद कर दिए गए, फ्लाइट रोक दी गईं और आर्थिक मोर्चे पर भी कमजोरी महसूस की गई. UAE के डिफेंस ने ज्यादातर खतरों को रोक दिया, लेकिन उसका कॉन्फिडेंस कम होता दिख रहा है, क्योंकि अमेरिका उसकी पूरी मदद नहीं कर सका.

28 फरवरी को अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने इलाके के खाड़ी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. UAE के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 17 मार्च तक उनके देश पर ईरान ने 314 बैलेस्टिक मिसाइल, 15 क्रूज मिसाइल और 1672 ड्रोन दागे. लेकिन, ईरान की हिट लिस्ट में UAE क्यों सबसे बड़ा टारेगट बना हुआ है? इसकी कई वजह हैं.

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UAE के रक्षा मंत्रालय का पोस्ट. (X @modgovae)
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UAE वेस्ट एशिया में काफी खुले माहौल और आजाद ख्यालात का देश माना जाता है. तेल के मुकाबले उसकी इकोनॉमी का बेस टूरिज्म और कॉर्पोरेट सेक्टर है. रीजन के अरब देशों में जितनी आजादी आपको UAE में मिलेगी, उतनी किसी और देश में नहीं है. UAE की राजधानी अबू धाबी और दुबई में इसकी बानगी देखी जा सकती है. दुबई तो अपने आप में एक ग्लोबल हब है.

दुबई की लग्जरी लाइफ और चकाचक सड़कों पर गुजरतीं महंगी-महंगी गाड़ियां दुनिया भर के लोगों का ध्यान खींचती हैं. यह शहर खुद मल्टी-नेशनलिटी वाले लोगों का शहर बन गया है. अब UAE की चकाचौंध को अंधेरे में तब्दील करने के मिशन पर ईरान पूरी तरह लगा हुआ है.

Dubai Buliding Damage
ईरान के हमले में दुबई की एक बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हो गई. (AP/Altaf  Qadri)

बदले की आग में जल रहे ईरान ने ना केवल UAE के अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि नागरिक ठिकानों पर भी हमले किए. दुबई के बुर्ज अल अरब जैसे हॉट लैंडमार्क पर हमले हुए. इसके अलावा शारजाह और अजमान में तेल और लॉजिस्टिक्स से लेकर फाइनेंशियल हब को निशाना बनाया गया. अबू धाबी और दुबई में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई. भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी बताया कि कम से कम एक भारतीय घायल है.

UAE को ईरान का घातक गुस्सा इसलिए भी झेलना पड़ रहा है, क्योंकि UAE में अबू धाबी स्थित अल जफरा एयर बेस जैसे ठिकाने, अमेरिका की मेजबानी करते हैं. यहां अमेरिकी फौज ना केवल रहती है, बल्कि अमेरिकी एयरफोर्स इस बेस का खुद भी इस्तेमाल करती है. 2024 में दोनों देशों के बीच एक डिफेंस डील भी हुई. इसमें आधुनिक हथियारों और जॉइंट एक्सरसाइज पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी.

ईरान ने ना सिर्फ अमेरिकी बेसों पर हमला किया, बल्कि जेबेल अली पोर्ट और फ़ुजैरा पोर्ट, और एयरपोर्ट्स जैसे इकोनॉमिक हब पर भी हमला किया, ताकि ग्लोबल ट्रेड में रुकावट आए, तेल मार्केट पर दबाव पड़े, और UAE की एक स्टेबल हेवन वाली इमेज को चुनौती दी जा सके.

Dubai International Airport
ड्रोन हमले के बाद दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर धुएं का गुबार उठता हुआ. (AP)

ईरान के लिए इजरायल एक दुश्मन है, जिसके अस्तित्व को इस्लामिक रिवोल्यूशन सरकार कभी नहीं मानती. 2020 में अमेरिका की पहल पर UAE ने इजरायल के साथ अब्राहम अकॉर्ड किया और इजरायल को मान्यता दे दी. यह कदम अरब सोच से बिल्कुल हटकर था.

सऊदी अरब जैसे अरब देश भी इजरायल को देश नहीं मानते, फिलिस्तीन को मानते हैं. फिलिस्तीन की आजादी की मांग करते हैं. UAE और इजरायल के बीच नॉर्मलाइजेशन ईरान को पसंद नहीं है. UAE पर ईरान की आक्रामकता का एक कारण यह भी हो सकता है.

कथित तौर पर ईरान को UAE से मिला सबसे गहरा जख्म मीनाब की घटना है, जहां 165 से ज्यादा स्कूली बच्चियों की मौत हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक, दावा किया जा रहा है कि UAE के ही एक बेस से अमेरिका ने मीनाब के स्कूल पर टॉमहॉक मिसाइल दागी. बेकसूर बच्चियों की मौत से ईरान में अमेरिका और वेस्ट एशिया में उसके दोस्त देशों के खिलाफ बदले की भावना और भी बढ़ गई है.

वीडियो: अली लारीजानी की मौत पर नेतन्याहू का बयान, ईरान को धमकाते हुए बोले...

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