तो क्या अब 500 और 2000 के नए नोट भी बैन हो जाएंगे?
मद्रास हाई कोर्ट ने नए नोटों के देवनागरी न्यूमेरिक पर सवाल उठाया है .
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मद्रास हाई कोर्ट ने नए नोटों पर प्रिंटेड देवनागरी न्यूमेरिक पर सवाल उठाया है.
नए नोटों पर इन दिनों जबरदस्त पॉलिटिक्स होती हुई दिखाई दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि इससे ब्लैक मनी पर लगाम लगेगा. विरोधियों का कहना है कि इससे ब्लैक मनी का काला खेल कतई नहीं रुकने वाला है. बल्कि इसके चलते गरीब जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पर लेटेस्ट खबर ये है कि नोट बंदी की प्रक्रिया में नया मोड़ आ गया है. दरअसल हुआ ये है कि मद्रास हाई कोर्ट ने मोदी सरकार से नए नोटों पर देवनागरी अंकों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया है.
मद्रास हाई कोर्ट
पेटिशनर गणेशन ने भारतीय संविधान के आर्टिकल-343 का हवाला देते हुए पेटीशन फाइल किया है. और कहा, "केंद्र सरकार केवल रोमन न्यूमेरिक ही ऑफिशियली यूज कर सकती है. और देवनागरी का इस्तेमाल भारतीय संविधान के खिलाफ है. यहां तक कि ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट 1963 के अनुसार राष्ट्रपति भी इस तरह देवनागरी के इस्तेमाल के फैसले पर अपनी मुहर नहीं लगा सकते." गणेशन ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि नए नोटों को “इनवैलिड” डिक्लेयर किया जाए.
500 का नया नोट
साथ ही गणेशन ने दावा किया कि "रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के तहत ऐसा कोई प्रावधान भी नहीं है जो सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के बिना 2000 रुपए के बैंक नोट छापने की अनुमति देता हो. इसलिए ये आवश्यक और न्याय संगत होगा कि 2000 के नोटों के इस्तेमाल को बैन किया जाए. जब तक कि केंद्र सरकार ऑफिशियल यूज के लिए कोई लॉ नहीं बनाती है."
गणेशन तमिलनाडु में मुख्या विपक्षी पार्टी डीएमके के कार्यकर्ताहैं. डीएमके तमिल नेशनलिस्टों की पार्टी मानी जाती है. जिसका हिंदी-विरोधी आंदोलन में लंबा इतिहास रहा है. अब देखने वाली बात ये है कि मद्रास हाई कोर्ट ने जो सवाल उठाए हैं, उस पर मोदी सरकार का क्या जवाब आता है. या अब सच में नए नोट भी बैन कर दिए जाएंगे !
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मद्रास हाई कोर्ट
पेटिशनर गणेशन ने भारतीय संविधान के आर्टिकल-343 का हवाला देते हुए पेटीशन फाइल किया है. और कहा, "केंद्र सरकार केवल रोमन न्यूमेरिक ही ऑफिशियली यूज कर सकती है. और देवनागरी का इस्तेमाल भारतीय संविधान के खिलाफ है. यहां तक कि ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट 1963 के अनुसार राष्ट्रपति भी इस तरह देवनागरी के इस्तेमाल के फैसले पर अपनी मुहर नहीं लगा सकते." गणेशन ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि नए नोटों को “इनवैलिड” डिक्लेयर किया जाए.
500 का नया नोट
साथ ही गणेशन ने दावा किया कि "रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के तहत ऐसा कोई प्रावधान भी नहीं है जो सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के बिना 2000 रुपए के बैंक नोट छापने की अनुमति देता हो. इसलिए ये आवश्यक और न्याय संगत होगा कि 2000 के नोटों के इस्तेमाल को बैन किया जाए. जब तक कि केंद्र सरकार ऑफिशियल यूज के लिए कोई लॉ नहीं बनाती है."
गणेशन तमिलनाडु में मुख्या विपक्षी पार्टी डीएमके के कार्यकर्ताहैं. डीएमके तमिल नेशनलिस्टों की पार्टी मानी जाती है. जिसका हिंदी-विरोधी आंदोलन में लंबा इतिहास रहा है. अब देखने वाली बात ये है कि मद्रास हाई कोर्ट ने जो सवाल उठाए हैं, उस पर मोदी सरकार का क्या जवाब आता है. या अब सच में नए नोट भी बैन कर दिए जाएंगे !

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