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भारत जोड़ो यात्रा में 21 पार्टियों को न्यौता गया, इन 5 को नहीं, जानिए कौन हैं?

ममता को बुलाया है, स्टालिन को बुलाया है, अखिलेश यादव को भी बुलाया है.

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12 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 12 जनवरी 2023, 04:07 PM IST)
Bharat Jodo Yatra
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी. (PTI)
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3500 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर राहुल गांधी 30 जनवरी को कश्मीर के श्रीनगर में भारत जोड़ो यात्रा का समापन करेंगे. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मौके पर 21 राजनीतिक पार्टियों को यात्रा के अंतिम पड़ाव में शामिल होने का न्योता दिया है. लेकिन कई ऐसी भी पार्टियां हैं जिन्हें बुलाया नहीं भेजा गया है. इन पार्टियों के नाम हैं अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, केसीआर की भारत राष्ट्र समिति, देवगौड़ा की जनता दल सेक्यूलर और ओवैसी की AIMIM.

इन्हें क्यों नहीं बुलाया?

भारत जोड़ो यात्रा जिन राज्यों से गुजरती थी, वहां के प्रमुख राजनीतिक दल को जुड़ने का न्योता भी देती थी. यूपी पहुंचने पर अखिलेश यादव की सपा को भी न्योता दिया गया था. हालांकि वो शामिल नहीं हुए.

यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ चुकी है. दक्षिण के छोर से शुरू हुई यात्रा कश्मीर में मुकाम तक पहुंचेगी. कश्मीर में अन्य राजनीतिक दलों को साथ जोड़कर कांग्रेस ये मैसेज भी देना चाहती है कि बीजेपी के खिलाफ विपक्ष एकजुट है. अगले आम चुनाव होने में अब डेढ़ साल से भी कम का समय बचा है. लेकिन कांग्रेस पार्टी इस दौरान एक मैसेज और देना चाह रही है. वो ये कि आने वाले समय में उसे किन पार्टियों के साथ नहीं जुड़ना है.

इंडिया टुडे के नेशनल अफेयर्स एडिटर राहुल श्रीवास्तव कहते है,

AAP, BJD और BRS, ये वो पार्टियां हैं जिन्होंने अपने-अपने राज्यों में कांग्रेस की जमीन को ही खत्म कर दिया है.

केजरीवाल की AAP ने दिल्ली में 15 साल की कांग्रेस की सत्ता को उखाड़कर फेंक दिया और देश की राजधानी में कांग्रेस शून्य पर पहुंच गई. लेकिन बात अब दिल्ली से आगे जा चुकी है. पंजाब में AAP ने कांग्रेस से सत्ता छीन. गुजरात में भी AAP ने कांग्रेस का नुकसान तो किया ही है.
कुछ ऐसा ही हाल नवीन पटनायक ने कांग्रेस के साथ ओडिशा में किया है. ओडिशा में कांग्रेस ना के बराबर है. बीजेडी के सामने कोई है भी तो वो बीजेपी है.

और तेलंगाना में भी केसीआर की राजनीति ने कांग्रेस को साफ कर दिया है. केसीआर जब अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी को अड्रेस करते हैं तो नाम बीजेपी का होता है, नरेंद्र मोदी का होता है. कांग्रेस का नहीं.

सालों से कांग्रेस पार्टी कवर कर रहे आदेश रावल कहते हैं,

कांग्रेस ने उन पार्टियों को न्योता नहीं दिया है जो ना कांग्रेस की तरफ होती है ना बीजेपी तरफ. लेकिन संसद में जब विपक्ष का साथ देने की बारी आती है तो ये पार्टियां वॉकआउट करके ट्रेजरी बेंच के लिए काम आसान कर देती हैं.

आम आदमी पार्टी तो संसद में कई दफे विपक्ष के सुर में सुर मिलाते दिखती है, लेकिन BRS और BJD अक्सर सरकार के लिए रास्ता खोल देती है. बीते कई सालों में कई अहम बिलों पर ये पार्टियां विपक्ष का साथ देती नहीं दिखी, भले हीं बैठे विपक्ष के साथ ही.

आदेश ये भी कहते हैं कि तेलंगाना में चुनाव होने भी अब ज्यादा समय नहीं बचा है. पार्टी हाईकमान ने राज्य की कांग्रेस कमेटी से पूछा तो उन्होंने ने BRS से दूरी बनाने की ही सलाह दी. क्योंकि अगर अभी विरोधी दल के साथ दिखेंगे तो चुनाव में जनता के सामने विरोध कैसे करेंगे.

आदेश ये भी कहते हैं कि नवीन पटनायक का केस थोड़ा अलग है. अगर पटनायक के सामने दो में एक उंगली पकड़ने की स्थिति आई तो वो बीजेपी के साथ चले जाएंगे. और कांग्रेस इस बात का बाखूबी जानती है.

बात अगर ओवैसी और देवगौड़ा की पार्टी की करें, चुनाव में ये बात उठती है कि AIMIM, कांग्रेस के वोट काटती है. और ओवैसी हमेशा इन दावों को नकारते हैं. देवगौड़ा की पार्टी को ना बुलाने का कारण भी आने वाले चुनाव हो सकते हैं. पिछले चुनाव में दोनों ने मिलकर सरकार बनाई थी. हालांकि गठबंधन ज्यादा दिन चल नहीं पाया. दोनों पार्टियों के बीच पनपी दरार अबतक पटी नहीं है. अगला चुनाव साथ में लड़ेंगे इस पर भी कोई सुगबुगाहट नहीं है. यही वजह है कि अगर दोनों को एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ना है तो इलेक्शन से पहले साथ दिखना राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकती है. 

वीडियो: राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने ये मौका खो दिया!

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