चीन में कंडोम महंगे होने के बाद भी धड़ल्ले से बिक रहे, परेशान सरकार अब और बड़े फैसले लेने जा रही
China की जन्म दर में लगातार गिरावट बनी हुई है. इसी गिरावट को रोकने के लिए सरकार ने Condom को लेकर एक बड़ा फैसला लिया. इस उम्मीद में कि इससे जन्म दर में बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बता रहे हैं. इसलिए अब सरकार और भी बड़े निर्णय लेने जा रही है.

चीन की सरकार ने कुछ महीने पहले कंडोम पर टैक्स लगा दिया. इसका मतलब यह हुआ कि चीन में सेक्स करना ‘महंगा’ हो गया. दरअसल, बीते कुछ सालों से चीन की जन्म दर में लगातार गिरावट बनी हुई है. वन-चाइल्ड पॉलिसी हटने के बाद भी जन्म दर कम ही बनी हुई है. इसी गिरावट को रोकने के लिए बीजिंग ने यह फैसला लिया. इस उम्मीद में कि इससे जन्म दर में बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बता रहे हैं.
चीन में 32 सालों तक कंडोम टैक्स फ्री थे. लेकिन पिछले कुछ समय से सरकार चाहती है कि लोग ज्यादा बच्चे पैदा करें. इसलिए सरकार ने अपनी पॉलिसी बदल दी और इस साल 1 जनवरी से कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों पर 13% टैक्स लगा दिया.
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 जनवरी को चीन ने जो आंकड़े जारी किए, वो चौंकाने वाले थे. पता चला कि चीन की जन्म दर घटकर 5.63 प्रति हजार व्यक्ति हो गई है. यह 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के बाद से सबसे कम है. रॉयटर्स ने एक डेमोग्राफर के हवाले से लिखा कि यह साल 1738 के स्तर के बराबर है, जब चीन की जनसंख्या करीब 15 करोड़ थी. तुलना के तौर पर देखें तो भारत की जन्म दर प्रति हजार 18.4 है और अमेरिका की 10.7 है.
चीन की प्लानिंग क्या है?जहां एक तरफ कंडोम और गर्भनिरोधक महंगे हो गए, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने कुछ सेवाओं को टैक्स फ्री कर दिया है. जैसे बच्चों की देखभाल और शादी जैसी सेवाएं, जिनमें शादी कराने वाली एजेंसियां और डेटिंग वेबसाइट्स भी शामिल हैं.
इस साल चीन ने माता-पिता के लिए डिलीवरी (प्रसव) को ‘लगभग फ्री’ बनाने का वादा किया है. कहा गया कि गर्भावस्था के दौरान कोई भी खर्च नहीं होगा. साथ ही आईवीएफ जैसे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स समेत सभी मेडिकल खर्च, नेशनल मेडिकल इंश्योरेंस के जरिए उठाए जाएंगे.
कुल मिलाकर 2026 में चीन जन्म दर को बढ़ाने वाली योजनाओं पर लगभग 180 अरब युआन (करीब 2.14 लाख करोड़ भारतीय रुपये) खर्च करेगा. इसका बड़ा हिस्सा बच्चों की देखभाल पर खर्च होगा, जिसके तहत तीन साल से कम उम्र के हर बच्चे के लिए परिवार को सालाना 3,600 युआन (करीब 48 हजार भारतीय रुपये) दिए जा रहे हैं. इस योजना के लिए 2 करोड़ से ज्यादा लोग आवेदन भी कर चुके हैं.
परिवार बढ़ाने के लिए सरकार की नई स्कीम
सरकार परिवार बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है. इसके लिए सरकार ने लोगों को कई तरह की रियायतें भी दी हैं. जैसे-
- मैटरनिटी और पैटरनिटी छुट्टियां बढ़ा दी जाएंगी.
- नए अभिभावकों को सीधे तौर पर मौद्रिक सब्सिडी (वित्तीय मदद) दी जाएगी.
- स्थानीय शासन को चाइल्ड केयर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करने के लिए कहा.
- सस्ते नर्सरी और प्री-स्कूल को बढ़ावा दिया जाएगा.
- जो गर्भपात मेडिकली ज़रूरी नहीं हैं, उन्हें रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे.
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कई सख्त कदम उठाए हैं. इन सबके बावजूद, चीन में जन्म दर अब भी मृत्यु दर से कम है और 2025 में लगातार चौथे साल उसकी आबादी घटी है.
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क्या है वजह?ये सारी योजनाएं इसलिए ज्यादा असर नहीं दिखा पा रही हैं क्योंकि बच्चे पैदा करने का असली फैसला पैसों से जुड़ा हुआ है. कंडोम या गर्भनिरोधक दवाओं पर टैक्स बढ़ाने से पैरेंट्स के फैसलों पर असर नहीं पड़ता, क्योंकि बच्चे को पालने का खर्च बहुत ज्यादा है.
एक रिसर्च में सामने आया कि चीन में एक बच्चे को 18 साल की उम्र तक पालने का कुल खर्च करीब 64 लाख रुपये (538,000 युआन) तक आ सकता है. जो दुनिया में सबसे महंगा है. रिपोर्ट के मुताबिक़, वित्तीय दबावों की वजह से युवा पीढ़ी परिवार बढ़ाने से पीछे हटने लगी है. वो बेहतर फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और आजादी चाहते हैं.
इसके अलावा, महिलाओं की पढ़ाई और नौकरी के मौके बढ़े हैं, इसलिए वे शादी और बच्चे को टाल रही हैं या फिर बिल्कुल न करने का फैसला कर रही हैं. माना जाता है कि असल में 1990 के दशक से चीन में जन्म दर गिरना ज्यादातर लोगों की अपनी पसंद का नतीजा है, न कि सिर्फ सरकारी नीतियों का.
एक बड़ी वजह शादी भी है. चीन में अब कम युवा शादी कर रहे हैं और जो कर रहे हैं वे देर से कर रहे हैं. सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि शादी के रजिस्ट्रेशन पिछले कई सालों से लगातार घट रहे हैं.
यही वजह है कि वन-चाइल्ड पॉलिसी हटाने और अब पैसे देकर बच्चों को बढ़ावा देने के बावजूद चीन में जन्म दर में वो उछाल नहीं आया, जिसकी सरकार को उम्मीद थी.
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