भारत में कहीं भी आतंकी हमला होता है. एक टेढ़ी निगाह पाकिस्तान की तरफ हो जाती है.वजहें भी वाजिब हैं. बीते कई आतंकी हमलों में सरहद पार से साजिश रचने के सबूत मिलेहैं. पर क्या आप जानते हैं पाकिस्तान को अपने मुल्क में आतंकवाद का सामना आजादी केबाद से ही करना पड़ रहा है. बलूचिस्तान समस्या को सुलझाने में पाकिस्तान केहुक्मरान 68 साल से नाकाम रहे हैं. नवाब नवरोज खान की गुरिल्ला वॉर से रखी गईबलूचिस्तान आंदोलन की नींव आज आतंक के नए मुकाम पर है. वक्त बीतने के साथ इसके नेताबदलते रहे हैं. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान की सरकार के लिए बड़ी मुसीबतबनी हुई है. हम आपको बताते हैं बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के उस मुखिया के बारे में,जो पाकिस्तान की आंखों में फांस की तरह चुभा हुआ है. हर्बियार मर्री: बलूचिस्तानलिबरेशन आर्मी के हेड. बलूचिस्तान की आजादी आंदोलन के बड़े नेता खैर बख्श मर्री केबेटे हर्बियार. खैर बख्श मर्री बलूचिस्तान आंदोलन के बड़े नेता थे. उनकी एक आवाज परपूरा बलूचिस्तान खड़ा हो जाता था. पर पाकिस्तानी हुक्मरानों से मर्री परिवार की'दुश्मनी' पुरानी रही. साल 1978 में जब पाकिस्तान की कमान जनरल मुहम्मद जिया उल हकके हाथों में आई, तब इसका बड़ा असर देखने को मिला. हर्बियार मर्री को अपने परिवारके साथ पाकिस्तान छोड़ अफगानिस्तान बसना पड़ा. काबुल में शुरुआती एजुकेशन के बादहर्बियार मर्री रूस चले गए. पाकिस्तान की जमीं से दूरी और सियासी जंग की नींव रखीजा चुकी थी. सालों तक दूसरे मुल्कों में रहने के बाद 1992 को हर्बियार परिवार समेतपाकिस्तान लौट आए. पिता खैर बख्स मर्री की उम्र हो चली थी. लिहाजा राजनीति केगलियारों में बलूच आंदोलन की आवाज उठाने के लिए आगे आए खैर बख्स मर्री के बेटे बलाचमर्री. 1996 में हर्बियार मर्री बलूचिस्तान असेंबली के लिए चुने गए. हर्बियानबलूचिस्तान प्रांत के एजुकेशन मिनिस्टर भी बने. 1998 में मर्री के परिवार परजस्टिस नवाज मर्री की हत्या का आरोप लगा. तब से लेकर अब तक हर्बियार का परिवारपाकिस्तान से बाहर रह रहा है. लेकिन सरहदी दूरियां होने की वजह से रंग में भंग करनेमें हर्बियार मर्री आज भी पाक के दुश्मन बने हुए हैं. हर्बियार ब्रिटेन में रहतेहैं. सात समंदर दूर रहकर भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के नेता हर्बियार मर्रीबलूचिस्तान की आजादी को लेकर लड़ रहे हैं. पाकिस्तानी हुक्मरान भारत पर हर्बियारमर्री के साथ करीबी संबंध और बलूच प्रांत में हिंसा फैलाने का आरोप लगाते आए हैं.इमरान खान समेत कई पाकिस्तानी बड़े नेता हर्बियार मर्री से मिल विवाद सुलझाने कीकोशिश कर चुके हैं. पर हर्बियार और पाकिस्तानी नेताओं के बीच दूरियां वैसी ही बनीहुई हैं, जैसे हमारे मुल्क में अलगाववादी नेताओं से हमारे हुक्मरानों की..