The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Why Agriculture Minister Narendra Singh Tomar says those who stopping supply trains to soldiers can’t be farmers

कृषि मंत्री को क्यों कहना पड़ा, सैनिकों का सामान ले जा रही ट्रेनें रोकने वाले किसान नहीं हो सकते

पंजाब में रेल रोको आंदोलन से आर्मी पर कितना असर पड़ा?

Advertisement
Img The Lallantop
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (बाएं) ने किसानों के नाम लिखे पत्र में जवानों के लिए रसद ले जा रही ट्रेनें रोकने पर नाराजगी जताई. दूसरी फाइल फोटो पंजाब में रेलवे ट्रैक पर धरने पर बैठे किसानों की है. (तस्वीरें -PTI)
pic
डेविड
18 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 18 दिसंबर 2020, 01:35 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
17 दिसंबर 2020. किसान आंदोलन का 22वां दिन. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के नाम आठ पेज का पत्र लिखा. इसमें उन्होंने लिखा कि कुछ किसान संगठनों में इन कानूनों को लेकर भ्रम पैदा किया जा रहा है. कृषि मंत्री होने के नाते मैं किसानों को सच से अवगत कराना चाहता हूं. इसी लेटर के पेज नंबर-7 पर कृषि मंत्री ने लिखा,
Embed
Tomar Letter Page 7
किसानों को लिखे गए लेटर का पेज नंबर सात

कृषि मंत्री ने ऐसा क्यों लिखा?

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन शुरू होने से पहले पंजाब में लंबा रेल रोको आंदोलन चला था. हालांकि किसान दावा करते रहे हैं कि उन्होंने किसी ट्रैक को बाधित नहीं किया. किसानों ने कहा था कि कृषि कानूनों को लेकर जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, वे सिर्फ मालगाड़ियों को ही चलने देंगे. वहीं केंद्र सरकार का कहना था कि जब तक पैसेंजर ट्रेनें नहीं चलतीं, मालगाड़ियां भी नहीं चलेंगी.
किसानों का रेल रोको आंदोलन 24 सितंबर से शुरू हुआ था. पंजाब सरकार से बातचीत के बाद 24 अक्टूबर को किसानों ने मालगाड़ियों को रास्ता दे दिया. लेकिन पैसेंजर ट्रेनों को रास्ता देने से मना कर दिया था.

आर्मी की सप्लाई पर कितना असर पड़ा?

पंजाब में जब किसानों का आंदोलन शुरू हुआ तो मीडिया में ऐसी खबरें आईं कि ट्रेनें नहीं चलने से सेना को सामान की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. सेना तक आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग का प्रयोग करना पड़ रहा है. सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों के लिए आपूर्ति का शीतकालीन स्टॉक अक्टूबर के अंत तक खत्म हो गया था. जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पास के इलाकों से किसी तरह आवश्यक वस्तुओं की भरपाई की गई है, लेकिन अब बर्फबारी से लद्दाख का ऊपरी मार्ग भी बाधित हो गया है.
रिटायर्ड मेजर जनरल यश मोर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था,
Embed

रेलवे ने क्या कहा था?

इंडियन एक्सप्रेस की 16 नवंबर की खबर के मुताबिक, उत्तर रेलवे के एक अधिकारी ने बताया था कि पंजाब में किसानों का रेल रोको आंदोलन शुरू होने के बाद सेना के लिए सप्लाई ले जाने वाली कम से कम 15 से 20 ट्रेनें प्रभावित हुई थीं. ये आर्मी स्पेशल ट्रेनें नहीं थीं, सामान्य मालगाड़ियां थीं, जिनके जरिए सेना के लिए सप्लाई पहुंचाई जा रही थी. वहीं एक सीनियर आर्मी ऑफिसर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि सेना के पास जरूरी सामानों की आपूर्ति है. पंजाब में ट्रेनों के बंद होने का ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा. कोरोना के कारण मिलिट्री एक्सरसाइज के लिए जाने वाली ट्रेनें अभी बंद की गई हैं.
ट्रेन सर्विस शुरू करने और आंदोलन के मुद्दे पर बातचीत के लिए केंद्र ने 13 नवंबर को किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से बात की थी. 22 नवंबर को प्रदर्शनकारियों ने रेल की पटरियों से हटने का ऐलान किया था. जब से पंजाब में गतिरोध शुरू हुआ 2,352 यात्री ट्रेनें या तो रद्द कर दी गई या इनके रूट डायवर्ट करने पड़े. वहीं 3,850 मालगाड़ियों को लोड नहीं किया जा सका. 230 भरी हुई मालगाड़ियां राज्य के बाहर फंसी रहीं. 24 सितंबर के बाद से रेलवे को कुल 2,220 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है. द हिन्दू की खबर कहती है कि पंजाब को इस दौरान 40 हजार करोड़ का नुकसान हुआ.

Advertisement

Advertisement

()