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'पहला नशा' वाली आयशा जुल्का आजकल कहां हैं?

सलमान खान के साथ हिट फिल्म देने के बावजूद इंडस्ट्री ने इनके साथ धोखा कर दिया.

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4 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 4 जनवरी 2021, 01:31 PM IST)
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फिल्म 'जो जीता वही सिकंदर' के दो अलग-अलग सीन्स में आयशा जुल्का. दूसरी तस्वीर में उनके साथ को-स्टार आमिर खान.
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1991 में नासिर हुसैन एक फिल्म बना रहे थे ‘जो जीता वही सिकंदर’. इसे नासिर के बेटे मंसूर डायरेक्ट कर रहे थे. ये फिल्म दूसरी बार शूट की जा रही थी. क्योंकि कुछ दिनों की शूटिंग के बाद मिलिंद सोमण समेत कुछ कलाकारों ने फिल्म से अलग होने का फैसला कर लिया था. इस फिल्म का म्यूज़िक जतिन-ललित कर रहे थे और गीत थे मजरूह सुल्तानपुरी के. जैसे ही फिल्म का म्यूज़िक तैयार हुआ, नासिर हुसैन फिल्म के गानों के साथ आर.डी. बर्मन के पास पहुंच गए. ‘जो जीता वही सिकंदर’ के म्यूज़िक पर पंचम का रिमार्क लेने. एल्बम सुनने के बाद पंचम को ‘पहला नशा’ नाम का गाना बहुत पसंद आया है. लोग ताज्जुब करते हैं कि इतने गाने लिख चुकने के बाद मजरूह ने अपने करियर के आखिरी दौर में इतना रिफ्रेशिंग गाना कैसे लिखा होगा. खैर, हम आज ‘पहला नशा’ नहीं, उस गाने में नज़र आने वाली लड़की की बात करेंगे. आयशा जुल्का की बात करेंगे.

# 11 साल की उम्र में मम्मी-पापा को लेकर मुंबई आ गईं आयशा का जन्म 28 जुलाई, 1972 को श्रीनगर में हुआ. पापा इंद्र कुमार जुल्का इंडियन एयर फोर्स में विंग कमांडर थे. इसलिए पोस्टिंग के चक्कर में देशभ्रमण हो गया. फाइनली आयशा की फैमिली दिल्ली में सेटल हुई. आयशा जब स्कूल में पढ़ रही थीं, तभी उन्हें फिल्मों का चस्का लग गया था. वो सिनेमा की फील्ड में कुछ करना चाहती थीं. इतनी कम उम्र में जब ये बात घरवालों को बताई, तो उनका शॉक्ड होना लाज़मी था. धीरे-धीरे बात रिश्तेदारों में फैल गई. सबका यही मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री अच्छी जगह नहीं है. क्योंकि आए दिन उस इंडस्ट्री की महिलाओं से जुड़ी तमाम तरह की खबरें मैगजीन्स और अखबारों में छपा करती थीं. किसी तरह आयशा ने अपने पैरेंट्स को मना लिया. और 11 साल की उम्र में मम्मी-पापा के साथ मुंबई आ गईं. फिल्मों में काम करने. शुरुआत हुई बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट. एक्टिंग डेब्यू हुआ 1983 में आई फिल्म ‘कैसे कैसे लोग’ से. आगे वो इसी तरह कई छोटे बड़े रोल्स में फिल्मों में दिखाई देने लगीं. चाइल्ड आर्टिस्ट वाले रोल्स के साथ-साथ आयशा ने फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई शुरू कर दी. ये उनका प्लैन बी था. अगर वो हीरोइन नहीं पाईं, तो फैशन की फील्ड में आगे बढ़ना चाहती थीं. मगर ठीक इसी समय में उन्हें पहली बार हीरोइन बनने का ऑफर आ गया.
अपने करियर के शुरुआती दिनों में आयशा जुल्का.
अपने करियर के शुरुआती दिनों में आयशा जुल्का.
# सलमान के साथ हिट फिल्म देने के बाद इंडस्ट्री ने धोखा दिया लीडिंग लेडी के तौर पर आयशा की पहली फिल्म थी 1991 में आई सलमान खान स्टारर ‘क़ुर्बान’. ‘मैंने प्यार किया’, ‘बागी’, ‘सनम बेवफा’ और ‘पत्थर के फूल’ के बाद सलमान की लगातार पांचवीं हिट फिल्म. आयशा एक्टिंग सीन में लंबे समय से थीं, इसलिए उनके पास काम की कमी नहीं थी. इसके बाद वो अक्षय कुमार के साथ ‘खिलाड़ी’ में नज़र आईं, जिसे उनकी ब्रेक थ्रू फिल्म बताया जाता है. ‘खिलाड़ी’ के तुरंत बाद उन्हें ‘तेज़ाब’ फेम एन. चंद्रा ने अपनी फिल्म ‘नरसिम्हा’ में कास्ट कर लिया. सब कुछ सेट था. सनी देओल और डिंपल कपाड़िया स्टारर इस फिल्म की शूटिंग बस शुरू होने को थी. फिल्म के मुहूर्त यानी पहले शॉट से ठीक पहले आयशा को बताया गया कि वो इस फिल्म का हिस्सा नहीं हैं. ऐन मौके पर हीरोइनों को फिल्मों से बाहर का रास्ता दिखा देना इंडस्ट्री के लिए कोई नई चीज़ नहीं थी. लेकिन आयशा के लिए ये नया अनुभव था. इस चीज़ से वो बहुत निराश हुईं. आयशा की जगह ‘नरसिम्हा’ में उर्मिला मातोंडकर को ले लिया गया. दिलचस्प बात ये कि आयशा की ही तरह उर्मिला ने भी अपने करियर की शुरुआत चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर की थी. ‘नरसिम्हा’ लीड रोल में उर्मिला की पहली फिल्म थी. आयशा अपने एक इंटरव्यू में बताती हैं कि दूसरे शहरों से मुंबई में एक्टर बनने आई लड़कियों के लिए इस तरह की चीज़ें हैंडल करना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि उन्हें बहुत स्ट्रगल के बाद काम मिलता है. वहां से भी लास्ट मोमेंट पर रिप्लेस कर दिया जाना, तोड़ देने वाला एक्सपीरियंस होता है. इसलिए वो मुंबई में हमेशा अपनी फैमिली के साथ रहीं. उनके पापा एयरफोर्स में थे. मगर अपनी बेटी और फैमिली के साथ रहने के लिए उन्होंने वॉलंटियरी रिटायरमेंट ले लिया.
फिल्म 'क़ुर्बान' के एक सीन में आयशा जुल्का के साथ सलमान खान.
फिल्म 'क़ुर्बान' के एक सीन में आयशा जुल्का के साथ सलमान खान.
# सिर पर टांके लगवाकर की आमिर खान के साथ शूटिंग ‘नरसिम्हा’ से निकाले जाने के बाद आयशा ज़ाहिर तौर पर बहुत दुखी थीं. लेकिन इस घटना के ठीक तीन महीने बाद उन्हें पता चला कि ‘क़यामत से क़यामत तक’ फेम मंसूर खान अपनी नई फिल्म के लिए हीरोइन ढूंढ रहे हैं. आयशा मंसूर से मिलने गईं. मगर उन्हें मंसूर से मिलने के बाद ऐसा नहीं लगा कि उन्हें ये फिल्म मिल पाएगी. उनके जाने के कुछ ही समय बाद मंसूर ने उन्हें फोन कर बताया कि वो उनकी अगली फिल्म 'जो जीता वही सिकंदर' की हीरोइन होंगी. यानी आयशा को ये फिल्म मिल गई. जो जीता वही सिकंदर की शूटिंग एक बार शुरू हुई, कुछ दिन तक चली और फिर रुक गई. क्योंकि इस फिल्म से जुड़े कुछ एक्टर्स ने शूटिंग शुरू होने के बाद फिल्म से अलग होने का फैसला ले लिया था.
दोबारा शूटिंग शुरू हुई. एक शॉट के दौरान आयशा के सिर में कील घुस गई. सेट पर अफरातफरी मच गई. आयशा बताती हैं कि लोग उन्हें घेरकर खड़े गए. लेकिन उन्हें उस समय सिर्फ आमिर खान के एक्सप्रेशंस दिख रहे थे, जो कि चिल्ला-चिल्लाकर स्पॉट बॉयज़ को बर्फ लाने के लिए कह रहे थे. पहले ही फिल्म की शूटिंग में एक बार खलल पड़ चुकी थी. सेट पर हर तरफ यही फुसफुसाहट थी कि अगर आयशा जल्दी ठीक नहीं हुईं, तो फिल्म की शूटिंग फिर से लटक जाएगी. उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया. सिर पर टांके लगवाए गए. डॉक्टरों ने कहा कि तीन दिन बेड रेस्ट लेना होगा, नहीं तो खून नाक से रिसने लगेगा. ऐसी कंडिशन में आयशा ने मंसूर खान को बुलाया और कहा कि उन्हें टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है. वो शूटिंग करने के लिए फिट हैं. मंसूर ने मना किया लेकिन आयशा नहीं मानीं. शूटिंग के दौरान उनकी चोट को ढंकने के लिए उन्हें लाल रंग की टोपी दी गई, जो फिल्म के कई सीन्स में आयशा पहने नज़र आती हैं. ‘जो जीता वही सिकंदर’ आयशा की करियर डिफाइनिंग फिल्म साबित हुई. रिलीज़ के तीन दशक पूरे होने को हैं, बावजूद इसके आयशा को आज भी ‘जो जीता वही सिकंदर’ फेम या ‘पहला नशा’ वाली लड़की कहा जाता है.
फिल्म के एक सीन में आदित्य लखिया और देवेन भोजानी के साथ लाल रंग की टोपी पहने आयशा जुल्का.
फिल्म के एक सीन में आदित्य लखिया और देवेन भोजानी के साथ लाल रंग की टोपी पहने आयशा जुल्का.
# स्लो मोशन में शूट होने वाला इंडिया का पहला गाना आयशा की पहचान बना कहा जाता है कि पहला नशा स्लो मोशन में बना इंडिया का पहला गाना था. मगर ये डिबेटेबल फैक्ट है. इंडियन सिनेमा में पहली बार स्लो मोशन टेक्निक का इस्तेमाल 1971 में ही हो गया था. महमूद और अरुणा ईरानी की फिल्म लाखों में एक के गाने 'जोगी ओ जोगी' में. इसी तकनीक का इस्तेमाल 1989 में आई मणिरत्नम की फिल्म 'गीतांजली' में भी हुआ. पहला नशा को स्लो-मो बनाने का आइडिया गीतांजली के एक गाने से ही आया था. हालांकि इसके पीछे का जुगाड़ थोड़ा पेचीदा था. फिल्म या गाने के जिन हिस्सों को स्लो-मोशन में रखना होता, उन सीन्स की शूटिंग एक्टर को दुगनी रफ्तार से करनी पड़ती थी. क्योंकि अगर नॉर्मल स्पीड को धीमा करेंगे, तो लिप-सिंकिंग स्क्रीन पर गड़बड़ दिखेगी. पहले कोरियोग्राफर्स को डांस मास्टर कहा जाता था. क्योंकि उनका काम हीरो-हीरोइन को सिर्फ डांस स्टेप्स सिखाना होता था. मगर 'पहला नशा' जैसे गानों में कोरियोग्राफर का काम बढ़कर कैमरावर्क और एडिटिंग तक पहुंच गया था. इस गाने को फराह खान ने कोरियाग्राफ किया था.
# सरोज खान की सफलता की वजह से मिला फराह खान को पहला मौका 'जो जीता वही सिकंदर' के डायरेक्टर मंसूर खान ने फिल्म के तीन गानों की कोरियोग्राफी के लिए सरोज खान को हायर किया था. इन गानों की शूटिंग ऊटी से 250 किलोमीटर दूर कोडैकनाल में होनी थी. वहां पर टोटल 17 दिन का काम था. मगर टाइमिंग, लाइटिंग और परिस्थितियों के मद्देनज़र शूटिंग काफी कम हो रही थी. इसलिए सरोज को एक गाना शूट करने में ही 17 दिन लग गए. उनकी आगे की डेट्स शाहरुख खान और जैकी श्रॉफ स्टारर फिल्म 'किंग अंकल' के लिए बुक थीं. सरोज ने कहा कि वो इसकी शूटिंग के लिए शिमला जा रही हैं. वहां से फ्री होकर, वो 'जो जीता वही सिकंदर' के सेट पर आ पाएंगी. मंसूर ने कहा ठीक है. मगर जाते-जाते आमिर को गाने के स्टेप्स बताती जाइए, ताकि वो आपकी एब्सेंस में रिहर्सल करता रहे. सरोज ने कहा ठीक. मगर सरोज खान कब तक लौटेंगी, ये किसी को पता नहीं था.
इसलिए सरोज को एक गाना शूट करने में ही 17 दिन लग गए
सरोज खान तब इतनी व्यस्त थीं कि उनके पास आमिर खान की फिल्म के गाने कोरियोग्राफ करने का समय तक नहीं था. 

'जो जीता वही सिकंदर' पर फराह खान नाम की एक लड़की बतौर असिस्टेंट काम कर रही थी. फराह ने फिल्म की कास्टिंग से लेकर क्लैप देना और तमाम छोटे-बड़े काम कर रखे थे. इस फिल्म के लिए अक्षय कुमार का ऑडिशन और स्क्रीन टेस्ट भी फराह ने ही लिया था. अक्षय दीपक तिजोरी वाले रोल में इंट्रेस्टेड थे. मगर फिल्म में उन्हें नहीं चुना गया. खैर, सरोज खान की गैर-मौजूदगी सबको खल रही थी. क्योंकि समय निकल रहा था. इसी समय मंसूर ने फराह से कहा कि वो क्या वो फिल्म के गाने को कोरियोग्राफ कर पाएंगी. फराह ने कहा चैलेंज एक्सेप्टेड. उन्होंने 'पहला नशा' गाना कोरियोग्राफ करना शुरू किया. मगर उन्हें कैमरे के बारे में ज़्यादा कुछ पता नहीं था. ऐसे में उनकी मदद को आगे आए आमिर खान. आमिर ने उन्हें फिल्म कैमरे की कुछ बारिकियां सिखाईं और बताया कि कैसे क्या करना है. इसके बाद फराह ने गाने की शूटिंग शुरू की. उन दिनों हर हीरोइन डांस में पारंगत हो, ये ज़रूरी नहीं था. अब भी नहीं है. फिल्म में पूजा बेदी ऐसी ही एक नॉन-डांसर हीरोइन थीं. फराह ने इसका तोड़ निकाला. उन्हें एक कार की बोनट पर खड़ा कर दिया. नीचे लगा दिया गया एक बड़ा सा पंखा. पूजा को कहा गया कि उन्हें बस अपनी लाल ड्रेस को उड़ने से बचाना है. फराह मर्लिन मुनरो मोमेंट रिक्रिएट करना चाह रही थीं. थोड़ी ऊंच-नीच के साथ वो हो गया. फाइनली जब गाना रिलीज़ हुई, तो आयशा जुल्का और आमिर खान की लवी-डबी केमिस्ट्री के बीच पूजा बेदी का मर्लिन मुनरो मोमेंट भी काफी चर्चित हुआ.
पूजा बेदी का वर्ल्ड फेमस मर्लिन मुनरो मोमेंट, जिसने उस गाने की पॉपुलैरिटी में काफी अहम रोल प्ले किया.
पूजा बेदी का वर्ल्ड फेमस मर्लिन मुनरो मोमेंट, जिसने उस गाने की पॉपुलैरिटी में काफी अहम रोल प्ले किया.
# 'रोज़ा' और 'फूल और कांटे' जैसी फिल्में करने का समय नहीं था खिलाड़ी’ और ‘जो जीता वही सिकंदर’ जैसी हिट फिल्मों में काम करने के बाद आयशा स्टार बन गई थीं. उनके पास इतनी फिल्में थी कि उन्हें दिन में दो-तीन शिफ्ट में काम करना पड़ता था. आगे उनकी ‘बलमा’, ‘संग्राम’, ‘दलाल’ और ‘रंग’ जैसी कई बड़ी फिल्में रिलीज़ हुईं. कुछ चली कुछ पिट गईं. अपने एक इंटरव्यू में आयशा बताती हैं कि समय की कमी की वजह से उन्होंने ‘रोज़ा’ और ‘फूल और कांटे’ जैसी फिल्मों में काम करने से मना कर दिया, जो कि आगे जाकर ब्लॉकबस्टर साबित हुईं. इन दोनों ही फिल्मों में मधु ने काम किया था. लेकिन आयशा को इसका कोई मलाल नहीं है. कहा जाता है कि इन्हीं दिनों आयशा एक रिलेशनशिप में आईं और फिल्मों से दूर होने लगीं. ब्रेक अप के बाद वो फिल्मों की ओर वापस लौटीं लेकिन तब तक मार्केट में कई नई लड़कियां आ गई थीं. आयशा को काम तो मिला लेकिन उसकी क्वॉलिटी में दम नहीं था.
अजय देवगन, करिश्मा कपूर और आयशा जुल्का स्टारर फिल्म 'संग्राम' के फोटोशूट के दौरान अजय और आयशा.
अजय देवगन, करिश्मा कपूर और आयशा जुल्का स्टारर फिल्म 'संग्राम' के फोटोशूट के दौरान अजय और आयशा.
# फिल्मों से दूर क्यों हो गईं? 90 के दशक के आखिर और 2000 की शुरुआत में आयशा ने कुछ फिल्मों में कुछ छोटे रोल्स किए और फिर फिल्मों से दूर हो गईं. आयशा बताती हैं कि वो अपने करियर के अच्छे दौर में फिल्मों से दूर हो जाना चाहती थीं. 2003 में आयशा ने कंस्ट्रक्शन बिज़नेस टाइकून समीर वाशी से शादी कर ली. समीर सैमरॉक कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक थे. शादी के बाद आयशा ने स्पा बिज़नेस शुरू किया, जिसका नाम है अनंता स्पा. धीरे-धीरे उनका इंट्रेस्ट बिज़नेस में बढ़ता चला गया. आगे उन्होंने खुद की एडिशंस नाम की क्लोदिंग लाइन और गोवा मे बूटिक रिज़ॉर्ट भी शुरू किया.
पति समीर वाशी के साथ आयशा जुल्का.
पति समीर वाशी के साथ आयशा जुल्का.
# आज कल क्या कर रही हैं? 2018 में आयशा ने ‘जीनियस’ नाम की फिल्म से एक्टिंग में वापसी की. ‘गदर’ वाले अनिल शर्मा अपने बेटे उत्कर्ष को लॉन्च करने के लिए एक फिल्म बना रहे थे. इसकी स्क्रिप्ट लिखने के बाद उन्होंने आयशा जुल्का को अप्रोच किया. कई फिल्मों में आयशा के को-स्टार रहे मिथुन चक्रवर्ती भी इस फिल्म का हिस्सा थे. और अनिल के साथ तो आयशा की दोस्ती थी ही. इसी दोस्ती में उन्होंने ये फिल्म कर ली. ‘जीनियस’ में उनका कैरेक्टर फिल्म की हीरोइन इशिता शर्मा की मां का था. उन्हें टीवी से कई ऑफर्स आए. फिल्में भी आईं लेकिन आयशा अपने लायक कुछ ढूंढ रही हैं. इस बीच उन्होंने तीन शॉर्ट फिल्में बना डाली हैं. पहली फिल्म ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में 15 से ज़्यादा अवॉर्ड्स जीते. दूसरी शॉर्ट फिल्म को फेस्टिवल्स में भेजने की तैयारी चल रही है. और तीसरी फिल्म पूरी होने को थी कि लॉकडाउन लग गया. इन सब के साथ वो लगातार स्क्रिप्ट्स पढ़ रही हैं, जैसे ही उन्हें कुछ मिलेगा, वो वापसी करेंगी.


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