चलती ट्रेन से गायब हुई थी लड़की, लाश मिले बीते 2 महीने लेकिन FIR तक नहीं!
नेता-मंत्रियों की गुज़ारिश के बावजूद शिवराज सिंह चौहान के कानों पर जूं न रेंगी.
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Supriya Tiwari 22 साल की थीं. मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के बिजुरी इलाके के रहने वाली थीं. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)
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ट्विटर पर एक ट्रेंड चल रहा है. जस्टिस फॉर सुप्रिया. खबर लिखने तक इस ट्रेंड पर 25 हजार से अधिक ट्वीट हो चुके थे. लोग सुप्रिया तिवारी नाम की एक 22 साल की लड़की के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं. सुप्रिया की मौत हो चुकी है. रहस्यमई परिस्थितियों में. दो महीने से भी अधिक समय हो चुका है. इस मामले में विधायक और सांसद से लेकर मंत्री तक जांच की मांग कर चुके हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को CBI जांच कराने के लिए पत्र तक लिखे जा चुके हैं. लेकिन अभी तक मामले में कोई भी निष्कर्ष नहीं निकला है.
क्या है मामला?
पूरे मामले को जानने के लिए हमने मृतका सुप्रिया तिवारी की बड़ी बहन सोनू तिवारी और जीजा राजेश द्विवेदी से बात की. उन्होंने हमें बताया कि सुप्रिया 2 मार्च को सुबह साढ़े नौ बजे मुंडरा से अहमदाबाद के लिए निकली थी. जहां से उसने शाम साढ़े छह बजे भोपाल के लिए सोमनाथ एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ी. सेकेंड एसी कोच में उसका रिजर्वेशन था. सुप्रिया को अपने घर जाना था. जो मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के बिजुरी इलाके में है.
राजेश द्विवेदी ने बताया कि सुप्रिया ने 2 मार्च को रात 10 बजे के करीब उनसे बात की थी. इसके बाद सुप्रिया का फोन स्विच ऑफ हो गया. राजेश द्विवेदी ने आगे बताया-

अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी फुटेज से निकाली गई फोटो. फोटो में सुप्रिया तिवारी एक कुली के साथ प्लेटफॉर्म पर आगे जाते दिख रही हैं. (फोटो: रावेंद्र)
सोनू तिवारी ने बताया कि अगले दिन यानी चार मार्च को भी रेलवे पुलिस के अधिकारी उन्हें टरकाते रहे. गोधरा में उनसे कहा गया कि उन्हें दाहोद जाना होगा. इस बीच दस बजे के करीब दाहोद जिले के तहत आने वाले लीमखेड़ा पुलिस थाने की तरफ से एक डेड बॉडी की फोटो भेजी गईं. फोटो उनकी बहन सुप्रिया तिवारी की थीं. FIR दर्ज नहीं की सोनू तिवारी ने बताया-
सोनू तिवारी ने सुप्रिया के रेप की आशंका भी जताई है. हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई है.

Supriya Tiwari की बहन ने सुप्रिया के रेप की आशंका जताई है. हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में रेप पुष्टि नहीं हुई है. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)
सोनू तिवारी ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर सुप्रिया तिवारी के दोस्त सूरज पंडित को किस तरह से फोन किया गया? सुप्रिया का फोन तो लॉक था. लॉक को किसने खोला और कैसे खोला?
सुप्रिया के परिवारवालों ने रेलवे पुलिस पर उन्हें गुमराह करने और लीमखेड़ा पुलिस पर सुप्रिया के शव के प्रति असंवेदनशीलता बरतने के भी इल्जाम लगाए हैं. सांसद और मंत्रियों ने की जांच की मांग इस मामले में ना केवल बिजुरी के लोग कई बार न्याय की मांग कर चुके हैं, बल्कि सांसदों और मंत्रियों ने भी जांच की मांग की है. हमारे सहयोगी रावेंद्र ने ऐसे कई पत्र हमें भेजे. मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने 21 मार्च के राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था. जिसमें उन्होंने पूरे मामले की जांच CBI से कराने के लिए कहा था.
भारत सरकार में इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की थी. यह पत्र 8 मार्च को लिखा गया था. इसी तरह शहडोल की सांसद हिमाद्रि सिंह ने भी आठ मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा था और मामले की जांच की मांग की थी. वहीं कोतमा से विधायक सुनील सराफ भी पुलिस अधिकारियों की पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग कर चुके हैं. इलाके के सामाजिक-राजनीतिक समूह राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन दे चुके हैं. सुप्रिया का परिवार भी दो बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिख चुका है.

Supriya Tiwari के मामले की जांच के लिए केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री की तरफ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को लिखा गया पत्र. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)
इस सबके बाद भी इस मामले में पुलिस और रेलवे पुलिस की तरफ से कोई अपडेट नहीं दिया गया है. सोनू तिवारी ने हमें बताया कि हम पुलिस को फोन करते रहते हैं. लेकिन बार-बार हमसे बस यही कहा जाता है कि जांच चल रही है. थक हारकर हमें ट्विटर का सहारा लेना पड़ा है.
इस पूरे मामले में हमारी साथी गोपी मनियार ने पुलिस से भी संपर्क किया. लीमखेड़ा पुलिस ने उन्हें बताया कि मामले को पूरी तरह से रतलाम रेलवे पुलिस को हैंडओवर कर दिया गया है. हमने रतलाम पुलिस से इस संबंध में बात करने की कोशिश की. कई प्रयासों के बाद भी हमारी बात नहीं हो पाई.
फिलहाल, सुप्रिया के जीजा राजेश द्विवेदी का कहना है कि जब तक सुप्रिया के मामले का पूरा सच सामने नहीं आ जाता, जब तक उसे न्याय नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.
राजेश द्विवेदी ने बताया कि सुप्रिया ने 2 मार्च को रात 10 बजे के करीब उनसे बात की थी. इसके बाद सुप्रिया का फोन स्विच ऑफ हो गया. राजेश द्विवेदी ने आगे बताया-
"अचानक से रात 1 बजे सुप्रिया के दोस्त सूरज पंडित का फोन आया. उसने मुझे बताया कि रेलवे पुलिस की तरफ से उसे फोन आया. बताया गया कि सुप्रिया गायब हो गई. रेलवे पुलिस ने बताया कि सुप्रिया के फोन से आखिरी बार जिस नंबर से बात हुई, उसी पर सबसे पहले यह जानकारी दी गई. मैंने सुप्रिया के पिता को फोन किया. सुप्रिया के पिता ने सुप्रिया के फोन पर फोन मिलाया. जिसे रेलवे पुलिस के अजय यादव ने उठाया और बताया कि सुप्रिया गायब हो गई."राजेश द्विवेदी ने बताया कि इसके बाद उन्होंने रेलवे इन्क्यारी में फोन किया. जहां से उन्हें कुछ भी पता नहीं चला. जिसके बाद वे अहमदाबाद के लिए निकल गए. वहां उन्होंने सुप्रिया को लेकर पूछताछ की. राजेश द्विवेदी ने बताया कि अहमदाबाद में रेलवे पुलिस के लोग उन्हें टरकाते रहे. अंत में कहा गया कि ये मामला गोधरा रेलवे पुलिस देखेगी. वे गोधरा पहुंचे. वहां भी उन्हें टरकाया गया. ऐसे करते-करते पूरा दिन निकल गया. इस बीच राजेश द्विवेदी ने सुप्रिया की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करा दी.

अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी फुटेज से निकाली गई फोटो. फोटो में सुप्रिया तिवारी एक कुली के साथ प्लेटफॉर्म पर आगे जाते दिख रही हैं. (फोटो: रावेंद्र)
सोनू तिवारी ने बताया कि अगले दिन यानी चार मार्च को भी रेलवे पुलिस के अधिकारी उन्हें टरकाते रहे. गोधरा में उनसे कहा गया कि उन्हें दाहोद जाना होगा. इस बीच दस बजे के करीब दाहोद जिले के तहत आने वाले लीमखेड़ा पुलिस थाने की तरफ से एक डेड बॉडी की फोटो भेजी गईं. फोटो उनकी बहन सुप्रिया तिवारी की थीं. FIR दर्ज नहीं की सोनू तिवारी ने बताया-
"लीमखेड़ा और रतलाम पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज नहीं की. परिजनों के बार-बार विरोध दर्ज कराने पर भी पुलिस ने सुप्रिया की मौत को एक्सीडेंटल मौत माना. हम बार-बार कहते रहे कि सुप्रिया के साथ अनहोनी हुई है. लेकिन जैसे पुलिस और रेलवे पुलिस के बीच कोई सांठगांठ थी. उन्होंने हमारी एक ना सुनी. बार-बार हमें यही बताया गया कि इस मामले में परिवार की तरफ से कोई FIR तब ही दर्ज कराई जा सकेगी, जब रेलवे पुलिस अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ले. आज इतने दिनों के बात भी जांच का अता पता नहीं है."सुप्रिया के परिजन बार-बार यह सवाल उठा रहे हैं कि हो ना हो सुप्रिया के साथ कोच में अनहोनी हुई होगी. उनका कहना है कि एसी कोच में दरवाजे बंद रहते हैं. एडिशनल दरवाजा होता है, ऐसे में किसी एक्सीडेंट की बात प्रैक्टिकल नहीं लगती. उनका यह भी आरोप है कि सुप्रिया के सहयात्री निखिल दुदेजा की भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध है. सबसे पहले उसी ने रेलवे पुलिस को बताया था कि सुप्रिया बहुत देर से अपनी सीट पर नहीं लौटी है.
सोनू तिवारी ने सुप्रिया के रेप की आशंका भी जताई है. हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई है.

Supriya Tiwari की बहन ने सुप्रिया के रेप की आशंका जताई है. हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में रेप पुष्टि नहीं हुई है. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)
सोनू तिवारी ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर सुप्रिया तिवारी के दोस्त सूरज पंडित को किस तरह से फोन किया गया? सुप्रिया का फोन तो लॉक था. लॉक को किसने खोला और कैसे खोला?
सुप्रिया के परिवारवालों ने रेलवे पुलिस पर उन्हें गुमराह करने और लीमखेड़ा पुलिस पर सुप्रिया के शव के प्रति असंवेदनशीलता बरतने के भी इल्जाम लगाए हैं. सांसद और मंत्रियों ने की जांच की मांग इस मामले में ना केवल बिजुरी के लोग कई बार न्याय की मांग कर चुके हैं, बल्कि सांसदों और मंत्रियों ने भी जांच की मांग की है. हमारे सहयोगी रावेंद्र ने ऐसे कई पत्र हमें भेजे. मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने 21 मार्च के राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा था. जिसमें उन्होंने पूरे मामले की जांच CBI से कराने के लिए कहा था.
भारत सरकार में इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की थी. यह पत्र 8 मार्च को लिखा गया था. इसी तरह शहडोल की सांसद हिमाद्रि सिंह ने भी आठ मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा था और मामले की जांच की मांग की थी. वहीं कोतमा से विधायक सुनील सराफ भी पुलिस अधिकारियों की पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग कर चुके हैं. इलाके के सामाजिक-राजनीतिक समूह राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन दे चुके हैं. सुप्रिया का परिवार भी दो बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिख चुका है.

Supriya Tiwari के मामले की जांच के लिए केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री की तरफ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को लिखा गया पत्र. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)
इस सबके बाद भी इस मामले में पुलिस और रेलवे पुलिस की तरफ से कोई अपडेट नहीं दिया गया है. सोनू तिवारी ने हमें बताया कि हम पुलिस को फोन करते रहते हैं. लेकिन बार-बार हमसे बस यही कहा जाता है कि जांच चल रही है. थक हारकर हमें ट्विटर का सहारा लेना पड़ा है.
इस पूरे मामले में हमारी साथी गोपी मनियार ने पुलिस से भी संपर्क किया. लीमखेड़ा पुलिस ने उन्हें बताया कि मामले को पूरी तरह से रतलाम रेलवे पुलिस को हैंडओवर कर दिया गया है. हमने रतलाम पुलिस से इस संबंध में बात करने की कोशिश की. कई प्रयासों के बाद भी हमारी बात नहीं हो पाई.
फिलहाल, सुप्रिया के जीजा राजेश द्विवेदी का कहना है कि जब तक सुप्रिया के मामले का पूरा सच सामने नहीं आ जाता, जब तक उसे न्याय नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.

