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क्या है IS का खोरासान मॉड्यूल, जिसका जिक्र हदीस में कयामत के दिन के लिए किया गया है

दिल्ली से दो गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनके खोरासान से जुड़े होने का शक है.

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खोरासान सेंट्रल एशिया की पहाड़ियों के पास का इलाका है, जो तीन देशों को छूता है. यहीं से पनपा है खोरासान टेररिस्ट मॉड्यूल, जो पहले अल-कायदा का एक सपोर्ट विंग था. अब IS से जुड़ा है. (फोटो- PTI)
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अभिषेक त्रिपाठी
9 मार्च 2020 (अपडेटेड: 9 मार्च 2020, 05:49 PM IST)
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सेंट्रल एशिया की पहाड़ियां. पहाड़ियां, जो ईरान से लेकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को छूती हैं. इन्हीं पहाड़ियों के पास है एक इलाका- खोरासान. जो तीन देशों में फैला है- उत्तर-पूर्वी ईरान, दक्षिणी तुर्कमेनिस्तान और उत्तरी अफगानिस्तान. खोरासान को सासानी एंपायर ने बसाया था. सासानी कौन थे? सासानी थे ईरान के अंतिम शासक, उनके बाद सेंट्रल एशिया में इस्लाम शासन शुरू हो गया था.
इस पूरे रीज़न में खोरासान की लोकेशन पूर्वी है. इसी वजह से खोरासान को ‘सूरज की धरती’ कहते हैं..The Land of Sun. हदीस में भी खोरासान का ज़िक्र है. हदीस यानी इस्लाम के पुरखों के जीवन, उनके रहन-सहन और सोच के हिसाब से इस्लाम का तौर-तरीका बताने वाली धारा. कहते हैं, हदीस में लिखा है- जिस रोज़ खोरासान से काले परचम निकलेंगे, वही कयामत का दिन होगा.
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खोरासान रीज़न का मैप. खोरासान की सीमाएं तीन देशों को छूती हैं.

खोरासान की बात अब क्यों उठी है?
खोरासान फिर खबरों में है. वजह- दिल्ली से दो गिरफ्तारियां हुई हैं. इन पर आरोप है एंटी-CAA प्रोटेस्ट को भड़काने का और शक है ISIS के खोरासान मॉड्यूल से जुड़े होने का. अभी ऊपर हमने बताया खोरासान इलाके के बारे में. अब बात करते हैं खोरासान टेररिस्ट मॉड्यूल के बारे में.
पहले अल-कायदा, फिर IS
खोरासान इलाके के कुछ लड़ाकों ने मिलकर मार्च-2012 में खोरासान लड़ाकों की छोटी सी फौज तैयार की थी. शुरुआत में खोरासान लड़ाके आतंकवादी संगठन अल-कायदा के एक सर्पोटिंग यूनिट के तौर पर काम करते थे. 2014 से जैसे-जैसे सीरिया और आस-पास के इलाकों में IS का असर बढ़ा, खोरासान का इसके प्रति झुकाव बढ़ा.
नतीजा- 2014 के अंत तक खोरासान लड़ाके ISIS के मॉड्यूल यानी इसका हिस्सा बन चुके थे. ISIS के खोरासान मॉड्यूल यानी ISIS-K.
ISIS के 20 मॉड्यूल में सबसे खतरनाक
रसेल ट्रैवर्स अमेरिका की नेशनल काउंटर टेररिज़्म सेंटर के पूर्व डायरेक्टर हैं. रसेल बताते हैं-
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रसेल ने ये जानकारी पिछले साल ही अमेरिका की सीनेट में दी थी, जब उनके भारतीय मूल की सीनेटर मैगी हसन ने ISIS-K से जुड़ा सवाल किया था.
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खोरासान मॉड्यूल के पास कई 5-6 साल उम्र तक के भी बच्चे हैं, जिनका कुछ साल ब्रेनवॉश करने के बाद फिर हथियार भी थमा दिए जाते हैं. (फोटो- Al Jazeera)

अलग-अलग जगह, अलग-अलग पहचान
खोरासान की पूरी दुनिया में पहचान ISIS-K की है. लेकिन सीरिया और आस-पास के इलाकों में ये पहचान कुछ अलग है. सीरिया के लोग खोरासान मॉड्यूल को न तो किसी खास मिलिटेंट ग्रुप का हिस्सा मानते हैं, न ही सीरिया में इनकी मौजूदगी को खुली ज़ुबान कबूल करते हैं. वो ISIS-K को भी नहीं जानते. सीरिया के लोगों के लिए खोरासान मॉड्यूल की एक ही पहचान है- पाकिस्तान और अफगानिस्तान वाले लड़ाके.
आखिरी बात..ISIS-K चाहता क्या है?
जिहादी मूवमेंट को फॉलो करने वाले ब्लॉगर पीटर वान बताते हैं-
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दरअसल सीरिया में एक जबात-उल-नुस्रा नाम का मिलिटेंट ग्रुप एक्टिव है. इस ग्रुप में ज्यादातर आतंकी ऐसे हैं, जो पहले अल-कायदा से भी जुड़े रहे हैं. और यही ग्रुप खोरासान मॉड्यूल के भी जबरदस्त कॉन्टैक्ट में है. अब यहीं से शक गहराता है कि जब एक ही ग्रुप अल-कायदा और खोरासान, दोनों से कॉन्टैक्ट में है. तो कैसे ये मान लिया जाए कि खोरासान और अल-कायदा आपस में कॉन्टैक्ट में नहीं हैं?
और यहीं से ज़ाहिर होते हैं ISIS-K या खोरासान मॉड्यूल के इरादे. IS के संपर्क में रहकर वो सीरिया में तो पकड़ बना ही चुका है. अल-कायदा के संपर्क में रहकर इंडियन सबकॉन्टिनेंट में भी दाख़िल होना चाहता है.
इसीलिए दिल्ली से हुई गिरफ्तारियों को गंभीरता से लिया जा रहा है. लिया जाना चाहिए. फिलवक्त दिल्ली में जिन दो लोगों पर शक था, उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है. पूछताछ चल रही है. पुलिस को भी उम्मीद है कि जानकारियां अभी और निकलेंगी.


जानिए उनके बारे में जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन को खत्म करने के लिए नियुक्त किया है

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