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किसान आंदोलन में दिनभर में क्या-क्या खास हुआ, जान लीजिए

कड़कड़ाती ठंड, कोहरा भी नहीं रोक पा रहा किसानों के हौसले

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कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे किसानों के आंदोलन के कारण अब दिल्ली-नोएडा के बीच चिल्ला बॉर्डर भी बंद हो गया है. फोटो- PTI
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Varun Kumar
16 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 16 दिसंबर 2020, 05:10 PM IST)
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मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक और व्हाट्सएप से लेकर इंस्टाग्राम तक, सिर्फ एक ही बात की चर्चा है. और वो है किसानों का आंदोलन. किसान दिल्ली की सीमाओं पर जमे हैं. कड़कड़ाती ठंड, कोहरा, हल्की बारिश... कुछ भी ऐसा नहीं जो उन्हें डिगा पाया हो. कई राउंड की बातचीत किसानों और सरकार के बीच हो चुकी है लेकिन नतीजा सिफर निकला. तमाम सरकारी कवायदों के बाद भी किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. वो कानून वापसी से कम पर तैयार नहीं हैं. अब ऐसे में आज के क्या हालात हैं, किसान आंदोलन में क्या कुछ चल रहा है? चलिए बताते हैं आपको...
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अलग अलग किसान संगठनों के लोग इस आंदोलन में शामिल हुए हैं. फोटो- PTI

चिल्ला बॉर्डर बंद किया
नोएडा से दिल्ली जाने वाले रास्ते 'चिल्ला बॉर्डर' को भी किसानों ने बुधवार को ब्लॉक कर दिया. भारतीय किसान यूनियन से जुड़े लोगों ने दिल्ली में जंतर मंतर जाने के लिए कोशिश की, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगा दिया. नोएडा की डीसीपी राजेश सिंह ने कहा कि पुलिस किसानों को समझा रही है. ADCP नोएडा रणविजय सिंह ने कहा कि किसान शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं. चिल्ला बॉर्डर के अलावा किसान- सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर आदि सीमाओं पर भी डटे हुए हैं.
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अखबार पढ़कर खबरों की जानकारी लेते किसान. फोटो- PTI

सरकार को लिखित में दिया जवाब
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सरकार को लिखित में जवाब दिया गया है. इस पत्र में किसान मोर्चा ने कहा कि सरकार उनके आंदोलन को बदनाम ना करे, सभी किसानों के साथ एकसाथ बात की जाए. दरअसल केंद्र सरकार ने किसानों को एक लिखित प्रस्ताव दिया था. जिसके जवाब में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी लिखित में जवाब भेजा. कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल को भेजी गई इस चिट्ठी में किसान संगठन ने लिखा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है. संगठन ने कहा कि सरकार दूसरे समानांतर संगठनों से बातचीत ना करे. किसानों और सरकार के बीच छह दौर की बात हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है.
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ठंड के मौसम में भी किसान सड़कों पर जमे हुए हैं. फोटो- PTI

किसानों के समर्थन में आए पूर्व सैनिक
किसानों के समर्थन में पंजाब के पूर्व सैनिक भी उतर आए हैं. सैनिकों ने कहा कि अगर किसानों की बातें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को वो राष्ट्रपति को मेडल लौटा देंगे. आजतक की खबर के मुताबिक साढे तीन लाख पूर्व सैनिक किसान आंदोलन के समर्थन के लिए तैयार हैं. कई किसानों ने कहा कि वो आपस में संपर्क में हैं और किसानों के साथ हैं. सरकार कानूनों को अगर वापस नहीं लेती है तब वह अपने मेडल वापस कर देंगे.
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पुलिस भी किसानों को रोकने के लिए सड़कों पर तैनात है. फोटो- PTI

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को किसान आंदोलन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की. याचिका में आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली की सीमा से हटाने की मांग की गई थी. इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वालीबेंच ने केंद्र को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है. अदालत ने सुझाव दिया है कि किसान गुटों और सरकार के प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाई जाए, जो गतिरोध दूर करने का प्रयास करे. अदालत ने किसान संगठनों को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है. साथ ही सरकार से पूछा कि अब तक समझौता क्यों नहीं हुआ. CJI ने केंद्र से कहा कि अगर आप खुले दिमाग से नहीं सोचते हैं तो आपकी बातचीत फिर फेल हो सकती है.
धरने में शामिल किसान ने जान दी
आंदोलनकारी किसान दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर भी डटे हैं. यहीं किसानों के धरने में शामिल संत बाबा राम सिंह ने बुधवार को खुद को गोली मार ली. उनकी मौत हो गई है. बाबा राम सिंह करनाल के रहने वाले थे. किसान थे. हरियाणा की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से जुड़े थे. उनका एक सुसाइड नोट भी सामने आया है. इसमें लिखा है कि किसानों के हक में और सरकारी जुल्म के विरोध में वो ये कदम उठा रहे हैं. सरकार न्याय नहीं दे रही. ये जुल्म है, जुल्म करना पाप है, जुल्म सहना भी पाप है.

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