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जलवायु परिवर्तन से निपटने को लाया गया ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक क्या कहता है?

इससे PM मोदी का 'पंचामृत' लागू होगा.

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3 अगस्त 2022 (पब्लिश्ड: 09:17 PM IST)
Energy Climate Change
(फोटो: पीटीआई/रॉयटर्स)
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केंद्र सरकार ने जलवायु परिवर्तन संबंधी अपने लक्ष्यों की राह आसान करने के लिए बुधवार 3 अगस्त को लोकसभा में ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 पेश किया. इसके तहत ऊर्जा या एनर्जी के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, बायोमास और इथेनॉल जैसे स्रोतों का इस्तेमाल करने का प्रावधान किया गया है.

सरकार का कहना है कि इसका मकसद कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) पर निर्भरता को कम करना है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन में जीवाश्म ईंधन की बहुत बड़ी भूमिका है.

विधेयक में क्या है?

संसद ने साल 2001 में ऊर्जा संरक्षण विधेयक पारित किया था. देश में ऊर्जा का कुशल तरीके से इस्तेमाल करने, इसके संरक्षण और इस विषय से जुड़े मामलों पर नियम बनाने के लिए ये कानून लाया गया था. बाद में साल 2010 में इस एक्ट में संशोधन किया गया ताकि ऊर्जा सेक्टर में आए तमाम बदलावों के साथ तालमेल बिठाया जा सके और एनर्जी मार्केट के विकास में योगदान दिया जाए.

अब केंद्र सरकार एक बार फिर से इस कानून में संशोधन कर रही है.

ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल के साथ-साथ विधेयक में कार्बन मार्केट्स बनाने का भी प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही बड़ी आवासीय बिल्डिंग्स को ऊर्जा संरक्षण के दायरे में लाने, ऊर्जा संरक्षण बिल्डिंग कोड के दायरे को बढ़ाने और जुर्माना प्रावधानों में संशोधन करने की योजना बनाई गई है.

इसके अलावा ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की गवर्निंग काउंसिल में सदस्यों की संख्या को बढ़ाने और राज्य बिजली नियामक आयोग और शक्तियां देने का प्रावधान किया गया ताकि राज्य अपने यहां की जरूरतों के हिसाब से नियम बना सकें.

इस विधेयक के कारणों में केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने कहा है,

'उपभोक्ताओं द्वारा कुल ऊर्जा इस्तेमाल में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से न्यूनतम खपत को निर्धारित करने के लिए कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है. इसके चलते जीवाश्म ईंधन जैसे कि कोयला, पेट्रोलियम इत्यादि के इस्तेमाल में कमी आएगी और वायुमंडल में कार्बन का उत्सर्जन कम होगा.'

मोदी का 'पंचामृत'

पिछले साल नवंबर महीने में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर एक सम्मेलन (CoP-26) हुआ था, जिसमें भारत समेत 120 देशों ने हिस्सा लिया था. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की ओर से 'पंचामृत' का सिद्धांत पेश किया था.

'पंचामृत' के तहत भारत ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए पांच लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिनमें 2030 तक Non-Fossil Energy Capacity को 500 गीगावाट तक पहुंचाने, 2030 तक 50 फीसदी ऊर्जा जरूरतें नवीन ऊर्जा (renewable energy) से पूरी करने और 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने का प्रावधान किया गया है.

केंद्र द्वारा लाया गया ये नया विधेयक इसी ‘पंचामृत’ के प्रावधानों को लागू करने का रास्ता तैयार करेगा.

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