NRTI को गति शक्ति विश्वविद्यालय बनाने वाला विधेयक क्या कहता है?
इसके तहत हाई लेवल रिसर्च होगा और देश में ही सामान बनाए जाएंगे. NRTI का दायरा रेलवे तक सीमित नहीं रहेगा.

केंद्र सरकार ने सोमवार 1 अगस्त को लोकसभा में केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पेश किया. इसका मकसद राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान (एनआरटीआई) को गति शक्ति विश्वविद्यालय घोषित करना है.
गुजरात के वडोदरा स्थित एनआरटीआई अभी एक डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी है, जो कि गति शक्ति विश्वविद्यालय बनने के बाद एक स्वायत्त केंद्रीय विश्वविद्यालय बन जाएगा. इस संस्थान का प्रशासनिक नियंत्रण रेल मंत्रालय के पास होगा.
विधेयक में क्या है?इस विधेयक के तहत इस यूनिवर्सिटी के दायरे को भी बढ़ाया जाएगा. पहले यह रेलवे मामलों तक ही सीमित था, लेकिन अब इसमें पूरे ट्रांसपोर्ट सेक्टर और इस क्षेत्र में हो रहे सभी आधुनिक विकास कार्यों को पढ़ाया जाएगा और इस दिशा में रिसर्च किए जाएंगे.
साल 2009 में केंद्रीय विश्वविद्यालय कानून पारित किया गया था. इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों में विश्वविद्यालयों के गठन और उससे संबंधित फैसले लेने के प्रावधान किए गए हैं. सरकार अब इसी कानून में संशोधन करके गति शक्ति विश्वविद्यालय बनाने का रास्ता साफ कर रही है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संशोधन विधेयक के कारणों में कहा कि इसके चलते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परिवहन क्षेत्र में आ रहे नए बदलावों के लिए टैलेंट की आपूर्ति हो सकेगी. इसके साथ ही इस क्षेत्र फैलाव और इसमें विकास के लिए जरूरी चीजों की पूर्ति होगी.
केंद्र ने ये भी कहा कि इस संशोधन से देश परिवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, जिसमें स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे प्रोग्राम शामिल किए जाएंगे.
रिसर्च की जरूरतें पूरी होंगीधर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विधेयक से स्थानीय स्तर पर मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा. नतीजतन, हमें आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और रेलवे तथा परिवहन से संबंधित महंगी नवीन टेक्नोलॉजी, उपकरण और उत्पाद देश में ही बनाए जाएंगे.
शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसके तहत जरूरी रिसर्च भी किए जा सकेंगे, जिसके आधार पर इन जरूरतों की पूर्ति हो सकेगी. उन्होंने कहा कि गति शक्ति विश्वविद्यालय में परिवहन, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विषयों में उच्च गुणवत्ता वाली टीचिंग, अनुसंधान और स्किल डेवलपमेंट की शिक्षा मुहैया कराई जाएगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कैबिनेट ने 13 जुलाई 2022 को गति शक्ति विश्वविद्यालय बनाने के फैसले को मंजूरी प्रदान की थी.
दि हिंदू के मुताबिक सरकार की महत्वाकांक्षी 100 लाख करोड़ रुपये वाली पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान के आधार पर इस संस्थान का नाम रखा गया है. गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत 16 मंत्रालयों को एक साथ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जिसमें भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, ड्राई एंड लैंड पोर्ट्स और उड़ान जैसी बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं को लागू किया जाना है.
वीडियो: ओवैसी ने महंगाई पर सरकार से क्या पूछ लिया?

