BJP का तमिलनाडु प्लान क्या है?
क्यों BJP को अबकी तमिलनाडु में अपनी जगह बनती दिख रही है?
Advertisement

पीएम मोदी के साथ गृहमंत्री अमित शाह. (तस्वीर: पीटीआई)
Quick AI Highlights
Click here to view more
राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक मोहन भागवत इस बच्ची को कुछ सिखाते दिख रहे हैं. जगह है चेन्नई में RSS के कार्यकर्ता का एक घर. मोहन भागवत पोंगल के मौके पर चेन्नई में हैं. लेकिन बच्ची को तमिल में क्या सिखा रहे हैं भागवत?
आप थोड़ा गौर से सुनेंगे तो मोहन भागवत एक के बाद एक 7 शब्द बच्ची से दोहराने के लिए कह रहे हैं. तमिल के ये सात शब्द मिलकर एक छंद बनाते है. इस छंद को कुरुल कहते हैं और ऐसे 13सौ30 कुरुल से बन जाता है तिरुक्कुरल. तिरुक्कुरल जिसे तमिल वेद भी कहते हैं. तमिल भाषा में लिखा करीब दो हज़ार साल पुराना ग्रंथ जिसे तिरुवलुवर ने लिखा था. तिरुक्कुरल तीन हिस्सों में है- अरम यानी धर्म, पोरुल यानी अर्थ और इनबम यानी काम. जीवन का हर दर्शन इस तमिल वेद में मिल जाता है. और इसलिए क्लासिकल तमिल लिटरेचर की सबसे खूबसूरत कृति तिरुक्कुरल को माना जाता है, जिसका दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद भी हुआ. लौटते हैं भागवत वाले वीडियो पर. छोटी सी बच्ची को भागवत का तमिल में छंद सिखाना प्यारा लग सकता है. लेकिन भागवत का पोंगल के मौके पर चेन्नई में होना और तिरुक्कुरल का छंद बच्ची को सिखाना और फिर उसका वीडियो बाहर आना, ये अनायास ही हो गया हो, ऐसा समझना नादानी कही जाएगी. कैनवास कहीं ज्यादा बड़ा है. और इसे समझने के लिए तमिलनाडु से आज आई दो और ख़बरें देखिए.When RSS Sarsanghachalak Mohan Bhagwat taught a stanza of Tirukkural to a girl of Tamil family when he visited a RSS functionary s home in Chennai on Pongal day. pic.twitter.com/rJa9YaSWUL
— MUKUNDA C R (@MUKUNDAckpura) January 14, 2021
तमिलनाडु के मदुरै में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी. राहुल गांधी ने जल्लीकट्टू कार्यक्रम में हिस्सा लिया. राहुल गांधी के साथ थे डीएमके यूथ विंग के सचिव उदयनिधि स्टालिन. उदयनिधि डीएमके के संस्थापक करुणानिधि के पोते और एम के स्टालिन के बेटे भी दिखे. राहुल गांधी ने करीब आधा घंटा जल्लीकट्टू कार्यक्रम में बिताया. और जब वो वापस आ रहे थे तो मदुरै एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में तमिल संस्कृति और इतिहास की तारीफ की और केंद्र सरकार पर तमिल अस्मिता को दबाने का आरोप लगाया दिया. अब ये तीसरा वीडियो देखिएஅனைவருக்கும் எனது இனிய பொங்கல் நல்வாழ்த்துக்கள்.
உங்களுடன் தைப் பொங்கல் கொண்டாட இன்று தமிழகம் வருகிறேன். மதுரையில் ஜல்லிக்கட்டு விழாவில் பங்கேற்கிறேன். Coming to celebrate Pongal with you in Madurai, Tamil Nadu. pic.twitter.com/CSUpyUHJaR — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 14, 2021
तमिलनाडु में ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा. तिरुवलुवर ज़िले में बीजेपी के नम्मा ओरू पोंगल कार्यक्रम में जेपी नड्डा ने शिरकत की. दर्शक जानते ही हैं कि इस पोंगल के लिए तमिलनाडु भाजपा ने भारी भरकम तैयारी की थी. और इसीलिए स्वयं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी पहुंचे. तो मोहन भागवत का चेन्नई के श्री कदुंबदी चिन्नमन मंदिर में पोंगल मनाना या राहुल गांधी का मदुरै में पोंगल मनाना और जेपी नड्डा का तिरुवलुवर में पोंगल मनाना. इन तीनों कार्यक्रमों का एक ही दिन होना कोई इत्तेफाक़ नहीं है. ये है संकेतों की राजनीति. वही संकेत जो चुनावों की आहट देते हैं. तमिलनाडु में अप्रैल-मई तक विधानसभा का चुनाव होना है. और ये चुनाव से पहले का पोंगल कार्यक्रम है. तमिलनाडु भेदने में लगी BJP कच्छ से कामरूप तक कमल खिलाने वाली बीजेपी कश्मीर से कर्नाटक तक ही कमल खिला पाई. दक्षिण में बीजेपी कर्नाटक से आगे अभी तक नहीं बढ़ पाई. और ये तड़प तमिलनाडु को लेकर बीजेपी की राजनीति में दिखती है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी तमिलनाडु में खाली हाथ नहीं रहना चाहती है. और शायद बीजेपी को उम्मीदें इसलिए भी ज्यादा लग रही हैं क्योंकि दशकों बाद तमिलनाड में ये ऐसा विधानसभा चुनाव है जिसमें कोई कद्दावर स्थानीय नेता नहीं है. ये करुणानिधि और जयललिता के बाद का पहला चुनाव है. तमिलनाडु की दो बड़ी पार्टियां DMK और AIADMK दोनों बिखरी हुई और कमज़ोर दिख रही हैं. करुणानिधि के बेटे MK स्टालिन डीएमके के अध्यक्ष हैं लेकिन दूसरे बेटे अलागिरी डीएमके के खिलाफ हैं. कुछ वक्त पहले अलागिरी के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें रही, नई पार्टी बनाने की बातें आईं. हालांकि अभी उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. अलागिरी गुट के नेता डीएमके छोड़ रहे हैं. ऐसा ही एक बड़ा नाम पूर्व सांसद रामलिंगम का है जिन्होंने डीएमके छोड़ने के बाद 2020 के नवंबर महीने में बीजेपी जॉइन कर ली. जयललिता के बाद AIADMK भी टूट गई. शशिकला गुट ने AMMK नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली जिसमें टीटीवी दिनाकरन जैसे बड़े नेता हैं. और ये सब बीजेपी के गेम प्लान को सूट करता है. बीजेपी ने कांग्रेस में भी सेंध लगाई औऱ अक्टूबर 2020 में कांग्रेस नेता खुशबू सुंदर को पार्टी में शामिल कर लिया. अब ये जोड़-तोड़ वाला फॉर्मूला तो ठीक है लेकिन तमिलनाडु की राजनीति इससे कहीं ज्यादा उलझी हुई है. तमिलनाडु में राष्ट्रीय पार्टियों को हिंदी प्रदेशों या उत्तर भारत की पार्टियों के तौर पर देखा जाता है. आज़ादी के बाद यहां का राजनैतिक इतिहास बताता है कि हिंदी या हिंदीभाषियों को लेकर तमिलनाडु में ज़्यादा स्वीकार्यता नहीं रही है. तमिल अस्मिता और दलित अस्मिता तमिलनाडु की राजनीति के मुख्य सूत्र रहे हैं. इसलिए अब भी शायद ही कोई स्थानीय पार्टी तमिलनाडु में होगी जिसके नाम में द्राविड नहीं लगा हुआ है. पिछले कई दशकों में द्रविड पहचान पर राजनीतिक करने वाली पार्टियों ने ही तमिलनाडु पर शासन किया है. तो इसलिए बात आती है कि तमिलनाडु में फिर बाहरी पार्टियों की एंट्री कैसे होगी? इस सवाल का जवाब ही पोंगल या जल्लीकट्टू में दिल्ली से जाकर राजनेताओं का हिस्सा लेना है. पिछले एक दशक में जल्लीकट्टू तमिलनाडु में राजनैतिक मुद्दा रहा है. जल्लीकट्टू , पोंगल पर होने वाला एक कार्यक्रम है. इसमें बैलों को भीड़ में छोड़ दिया जाता है और फिर लोग कूबड़ पकड़कर बैलों को नियंत्रण में लेने की कोशिश करते हैं. खतरनाक खेल है. कई लोगों की जान हर साल जाती है. कई बैलों की मौत होती है. जानवरों के खिलाफ ज्यादती बताकर जल्लिकट्टू को बैन करने की सालों से मांग हो रही है. जब यूपीए-2 की सरकार में जयराम रमेश पर्यावरण और वन मंत्री थे तो 11 जुलाई 2011 को केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन निकालकर बैलों को परफॉर्मिंग एनिमल के तौर पर काम में लेने पर रोक लगा दी थी. मतलब ये था कि जल्लीकटू में भी बैलों का इस्तेमाल नहीं हो सकता. जिस कार्यक्रम में आज राहुल गांधी ने हिस्सा लिया उसी पर 9 साल पहले उनकी पार्टी की सरकार ने बैन लगाया था. तमिलनाड में इस फैसले का खूब विरोध हुआ था. मामला सुप्रीम कोर्ट में गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी फिर 2014 में बैलों के जल्लीकटटू में इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. 2014-15 में ये तमिलनाडु में बहुत बड़ा मुद्दा बना. बैन के बावजूद ऐसी तस्वीरें आईं जिसमें जल्लीकट्टू में बैलों को दौड़ाया गया. फिर आता है 2016 का साल तमिलनाड में विधानसभा चुनावों का साल. केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 2011 वाले अपने नॉटिफिकेशन में बदलाव कर दिया है. और कुछ शर्तों के साथ जल्लीकट्टू में बैलों को शामिल करने की इजाज़त दे दी. शर्त ये रखी गई थी कि बैलों को ट्रेनिंग देकर शामिल किया जा सकता है. फैसले का बड़ा राजनीतिक मतलब निकाला गया. तमिलनाडु में बीजेपी की सहयोगी AIADMK ने फैसले पर प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया था. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया था. जल्लीकट्टू पर 2011 में बैन वाले फैसले का नुकसान कांग्रेस और उसकी सहयोगी डीएमके को 2016 के विधानसभा झेलना पड़ा. हालांकि 2016 में भी कांग्रेस ने अपनी मेनिफेस्टो में जल्लीकट्टू पर रोक हटवाने का मुद्दा शामिल किया था लेकिन कोई फायदा नहीं मिला. बीजेपी के शून्य विधायक तमिलनाडु की 234 सदस्यों वाली विधानसभा में अभी कांग्रेस के 7 विधायक हैं, बीजेपी का एक भी नहीं. 2021 वाले चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर पुरानी गलती को भुला कर नए सिरे से मजबूती की कोशिश कर रही है. राहुल गांधी का जल्लीकट्टू में शामिल होना उसी कवायद का हिस्सा दिखता है. कांग्रेस औऱ डीएमके तमिलनाडु में गठबंधन करेंगी या नहीं, अभी इसका भी ऐलान नहीं हुआ. ना ही बीजेपी के गठबंधन को लेकर कुछ साफ है. लेकिन अभी जल्लीकट्टू पर राजनीति हो रही है. बीजेपी कह रही है कि कांग्रेस ने जल्लीकट्टू बैन किया था, ये तमिल संस्कृति के खिलाफ है और कांग्रेस कह रही है कि बीजेपी तमिल अस्मिता को दबाना चाहती है. वैसे राजनीति क्या ना कराए. जिस बीजेपी के नेता उतर भारत में गोवंश की हत्या पर लिचिंग को भी सही कह देते हैं, उसकी राजनीति जब तमिलनाडु तक पहुंचती है तो गोवंश यानी बैल के खिलाफ ज्यादती वाले खेल को भी परंपरा का हिस्सा मान लेती है. और जो कांग्रेस 9 साल पहले जल्लि कट्टू को बैन करती है. उसके नेता आज कहते हैं कि उन्हें जल्लि कट्टू देखकर मज़ा आया.Addressed Namma Ooru Pongal celebrations in Chennai, Tamil Nadu. The state has been the guiding force for the light of our nation for centuries. It's a unique mix of economic development with religious sentiments and culture. pic.twitter.com/hhQpgiVSfK
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) January 14, 2021

