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राम मंदिर की जमीन खरीदने में घोटाले के आरोपों पर चंपत राय ने क्या कहा?

भ्रष्टाचार के आरोपों पर चंपत राय ने सफाई दी है.

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14 जून 2021 (अपडेटेड: 14 जून 2021, 05:15 PM IST)
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राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज कर दिया है. (तस्वीर: पीटीआई)
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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के द्वारा राम मंदिर के लिए जमीन खरीदने के मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. कहा जा रहा कि ट्रस्ट ने 2 करोड़ की जमीन 18 करोड़ में खरीदी और ये खरीदारी हुई महज 10 मिनट में. आसान भाषा में इसे ऐसे समझिए कि जो जमीन 10 मिनट पहले 2 करोड़ की थी, वो 10 मिनट बाद 18 करोड़ की हो गई. इसे लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता चंपत राय ने भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज कर दिया है और सफाई दी है. क्या सफाई दी? चंपत राय ने ट्वीट करके लिखा है,
श्री राम जन्म-भूमि तीर्थ क्षेत्र, श्री राम जन्म-भूमि मन्दिर को वास्तु शास्त्र के मुताबिक़ भव्य स्वरूप प्रदान कराने, शेष परिसर को सभी तरह से सुरक्षित और दर्शनार्थियों के लिए सुविधापूर्ण बनाने के लिए काम कर रही है. इसे लेकर मंदिर के पूर्वी और पश्चिम भाग में निर्माणाधीन परकोटा और रिटेनिंग वाल की सीमा में आने वाले महत्वपूर्ण मंदिरों/स्थानों को परस्पर सहमति से ख़रीदा किया जा रहा है. न्यास का फैसला है कि इस प्रक्रिया मे विस्थापित होने वाले प्रत्येक संस्थान/व्यक्ति को पुनर्वासित किया जाएगा.
उन्होंने आगे कहा,
पुनर्वास हेतु भूमि का चयन संबंधित संस्थानों/व्यक्तियों की सहमति से की जा रही है. बाग बिजेसी, अयोध्या स्थित 1.2 हेक्टेयर जमीन इसी प्रक्रिया के तहत महत्वपूर्ण मंदिरों जैसे कौशल्या सदन आदि की सहमति से पूर्ण पारदर्शिता के साथ ख़रीदी गई है. ये जमीन अयोध्या रेलवे स्टेशन के नज़दीक रोड पर स्थित एक प्राइम लोकेशन है. इस भूमि को लेकर साल 2011 से मौजूदा बेचने वालों के पक्ष में भिन्न-भिन्न समय (2011, 2017 और 2019) में अनुबन्ध सम्पादित हुआ.
चंपत राय ने और क्या कहा? चंपत राय ने ट्वीट कर कहा कि,
खोजबीन करने पर जमीन हमारे उपयोग हेतु अनुकूल पाए जाने पर संबंधित लोगों से संपर्क किया गया. भूमि का जो मूल्य मांगा गया, उसकी तुलना मौजूदा मार्केट वैल्यू से की. अंतिम देय राशि करीब 1,423 रुपये प्रति वर्गफीट तय हुई जो नज़दीकी मार्केट वैल्यू से बेहद कम है. मूल्य पर सहमति हो जाने के बाद संबंधित व्यक्तियों को अपने पूर्व के अनुबन्धों को पूर्ण करना आवश्यक था, तभी सम्बन्धित भूमि तीर्थ क्षेत्र को प्राप्त हो सकती थी. तीर्थ क्षेत्र के साथ अनुबंध करने वाले व्यक्तियों के पक्ष में भूमि का बैनामा होते ही तीर्थ क्षेत्र ने अपने पक्ष में पूर्ण तत्परता और पारदर्शिता के साथ अनुबंध हस्ताक्षरित किया और रजिस्टर कराया.
दुष्प्रचार में यकीन न करने की अपील चंपत राय ने कहा है कि तीर्थ क्षेत्र का पहले दिन से ही फैसला रहा है कि सभी पेमेंट बैंक से सीधे खाते में ही किए जाएंगे और संबंधित जमीन की खरीद प्रक्रिया में भी इसी फैसले का पालन हुआ है. यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सरकार द्वारा लगाए गए सभी टैक्स आदि का पेमेंट हो जाए. उन्होंने आगे कहा है कि आरोप की भाषा में वक्तव्य देने वाले लोगों ने आरोप लगाने से पहले तीर्थ क्षेत्र के किसी भी अधिकारी से तथ्यों की जानकारी नहीं की. इसके कारण समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है. ऐसे में सभी भक्तों से निवेदन है कि वे ऐसे किसी दुष्प्रचार में यकीन न करें.

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