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बंगाल DGP राजीव कुमार की कहानी, जिन्हें ED हर हाल में हटवाना चाहती है

बीते कुछ दिनों से I-PAC पर ED की रेड की देश भर में चर्चा है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. ED ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तो गंभीर आरोप लगाए ही हैं, DGP राजीव कुमार को भी सस्पेंड करने की मांग कर दी है.

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IPS Rajiv Kumar
पश्चिम बंगाल के DGP राजीव कुमार. (India Today)
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सौरभ
15 जनवरी 2026 (Updated: 15 जनवरी 2026, 09:30 PM IST)
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बीजेपी-कांग्रेस सिर्फ महाराष्ट्र में ही साथ नहीं आते, पश्चिम बंगाल में भी कभी-कभी सुर में सुर मिलाते नज़र आ जाते हैं. मौका था 2016 का पश्चिम बंगाल चुनाव. और बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक पसंदीदा अधिकारी पर एक ही आरोप लगा दिया. तब कोलकाता के पुलिस कमिश्नर थे IPS राजीव कुमार. और राज्य की दोनों विपक्षी पार्टियों ने ये इल्जाम लगाया कि राजीव कुमार उनके नेताओं के फोन टैप करा रहे हैं. यही राजीव कुमार अब पश्चिम बंगाल पुलिस के महानिशक (DGP) हैं.

ममता तो मुख्यमंत्री हैं, उनका खबरों में रहना स्वाभाविक है. मगर राजीव कुमार भी सुर्खियों से ज्यादा दिन दूर नहीं रहते. ताज़ा मामला I-PAC की रेड से जुड़ा है. बीते कुछ दिनों से I-PAC पर ED की रेड की देश भर में चर्चा है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. ED ने ममता पर तो गंभीर आरोप लगाए ही, DGP राजीव कुमार को तो सस्पेंड तक करने की मांग कर दी है.

अपनी याचिका में ED ने कुमार के बर्ताव का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर एजेंसी की छापेमारी के खिलाफ एक बड़ी विरोध रैली निकाली, तो वह उनके साथ धरने पर बैठ गए. ED ने पश्चिम बंगाल पुलिस के टॉप अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है. वहीं कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और केंद्रीय गृह मंत्रालय को अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है.

वैसे, यह पहला मामला नहीं है जब IPS राजीव कुमार को पद से हटाने की मांग हो रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव होने थे. राजीव कुमार तब भी DGP के पद पर ही थे. लोकसभा चुनाव की घोषणा के 48 घंटे बाद निर्वाचन आयोग (EC) ने कुमार को DGP के पद से हटा दिया. चुनाव आयोग का मानना था कि कुमार के रहते, पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान सभी पार्टियों के लिए 'लेवल-प्लेईंग' मुकाबला संभव नहीं होगा.

द हिंदू ने EC के हवाले से लिखा, "यह ट्रांसफर “सभी को बराबर मौका देने और चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी बनाए रखने की कोशिशों का हिस्सा है.”

ED को इस बात पर आपत्ति होना लाज़मी है कि DGP कुमार ममता के साथ धरने पर क्यों बैठे. खैर, ममता भी राजीव कुमार के लिए धरने पर बैठी थीं.

लेकिन, 2024 भी वो पहला मौका नहीं था जब राजीव कुमार को पद से हटाया गया हो. हमने इस बात की चर्चा शुरू में की थी कि 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस ने फोन टैपिंग के आरोप लगाए. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा था कि उसने कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के जरिए उनके फोन टैप कराए. चुनाव आयोग ने तब भी राजीव कुमार को पद से हटा दिया था. और ममता बनर्जी ने तब भी चुनाव जीतने के बाद कुमार को कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर बहाल कर दिया था.

उम्र में 60 के नज़दीक पहुंच रहे राजीव कुमार, जिन पर फोन टैपिंग के आरोप लगे, ने यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की (जो अब IIT रुड़की है) से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई की है. कुमार, उत्तर प्रदेश काडर के 1989 बैच के IPS अधिकारी हैं. उन्हें तकनीक में दक्ष अधिकारी माना जाता है.

मजे की बात ये कि 2011 के विधानसभा चुनावों से पहले ममता बनर्जी ने खुद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार पर फोन टैपिंग का आरोप लगाया था. हालांकि, उन्होंने किसी अधिकारी का नाम नहीं लिया था. इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से लिखा था कि 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी शुरू में राजीव कुमार को बनाए रखने के पक्ष में नहीं थीं, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने उन्हें हटाया नहीं. मई 2016 तक राजीव कुमार ने ममता बनर्जी का भरोसा जीत लिया और उन्हें कोलकाता का पुलिस आयुक्त बना दिया गया.

अब राजीव कुमार को तृणमूल कांग्रेस सरकार के बेहद करीबी अधिकारी के रूप में देखा जाता है. इंडियन एक्सप्रेस ने 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सूत्रों के हवाले से लिखा था, “चुनावों से पहले राज्य भाजपा ने दिल्ली में अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से ऐसे IPS अधिकारियों पर दबाव बनाने की मांग की थी, जिन्हें ममता बनर्जी के करीबी माना जाता है. और इस सूची में सबसे ऊपर राजीव कुमार का नाम बताया गया.”

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2018 में सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो क्लिप वायरल हुई थीं, जिनमें कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के मुकुल रॉय (तब बीजेपी में थे) और पश्चिम बंगाल के प्रभारी भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बीच फोन पर हुई बातचीत थी. ऑडियो क्लिप में मुकुल रॉय कथित तौर पर विजयवर्गीय से कहते हैं कि वे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से बात कर चार IPS अधिकारियों पर CBI की नजर रखने को कहें, ताकि वे डर जाएं. क्लिप में रॉय यह भी कहते सुनाई देते हैं कि अगर CBI थोड़ा ध्यान देगी तो ये IPS अधिकारी डर जाएंगे.

कैलाश विजयवर्गीय ने इन ऑडियो क्लिप्स को फर्जी बताया था, जबकि मुकुल रॉय ने दावा किया था कि उनका फोन कोलकाता पुलिस द्वारा टैप किया जा रहा है.

राजीव कुमार के लिए ममता धरने पर बैठीं

सारदा ग्रुप चिट फंड स्कैम. सारदा ग्रुप की एक पोंजी स्कीम से जुड़ा एक बड़ा राजनीतिक घोटाला. पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के अनुमानित 18 लाख लोगों के क़रीब 2,460 करोड़ रुपये ठग लिए गए थे. 2012 में जाकर पता चला, जब पैसा लगाने वालों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करनी शुरू की.

राज्य सरकार ने SIT गठित की थी. इसके हेड थे राजीव कुमार. बाद में केस CBI को ट्रांसफ़र कर दिया गया. 2019 में CBI ने राजीव कुमार पर सबूतों को दबाने और नष्ट करने के आरोप लगाए थे. जांच एजेंसी ने राजीव से पूछताछ भी की थी, उनके घर की तलाशी भी ली थी. इसी के बाद ममता बनर्जी CBI दफ़्तर के बाहर दो दिन के धरने पर बैठी थीं. उनके आरोप थे कि राजीव समेत बंगाल के और अफ़सरों पर दबाव बनाया जा रहा है. और इस आरोप का आधार, एक कॉल रिकॉर्डिंग.

इन विवादों से इतर अगर राजीव कुमार के कामों की बात की जाए तो वह स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख रहने के अलावा बीरभूम के SP, प्रवर्तन शाखा के स्पेशल SP, कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर और CID के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल जैसे अहम पदों पर भी रह चुके हैं. इंडियन एक्सप्रेस ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से कुमार के बारे में लिखा कि उन्होंने उस समय अपनी काबिलियत साबित की जब TMC माओवादियों के खिलाफ अभियान चला रही थी. चट्टाधर महतो और अन्य माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी में उनकी अहम भूमिका रही. कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख के तौर पर उन्होंने आतंकियों को पकड़ने और नकली नोटों के रैकेट पर कार्रवाई करने में भी बड़ी भूमिका निभाई.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: बंगाल चुनाव के पहले ईडी बनाम ममता बनर्जी!

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