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बच्चों ने तोड़ दीं गुल्लकें, किसी ने दान कर दिए सर्जरी वाले पैसे...वायनाड पीड़ितों की मदद के लिए ऐसे आगे आ रहे लोग

Wayanad Landslide: एक बुजुर्ग महिला ने अपने ऑपरेशन के लिए पैसे जुटाए थे. मगर उन्होंने सारे पैसे दान कर दिए. ताकि वायनाड भूस्खलन के पीड़ितों की मदद हो सके.

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15 अगस्त 2024 (अपडेटेड: 15 अगस्त 2024, 10:52 AM IST)
wayanad children broke piggy bank elderly woman donates her money for operation landslide victims
Wayanad Landslide में 226 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं (फोटो-पीटीआई/आजतक)
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केरल के तिरुवनंतपुरम में 76 साल की एक बुजुर्ग महिला रहती हैं, नाम है सावित्री. उनके पैरों का ऑपरेशन होना है. इसके लिए उन्होंने लंबे समय से कुछ पैसे भी जमा किए थे. लेकिन जब उन्होंने वायनाड में लैंडस्लाइड के बाद हुई त्रासदी को देखा, तो ऑपरेशन के लिए जमा किए गए पैसों को मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (CMDRF) में दान कर दिया. केरल की ये एकमात्र कहानी नहीं है. लोगों की मदद के लिए बच्चों ने अपने गुल्लक तोड़ दिए. किसी ने कार खरीदने की प्लानिंग पोस्टपोन कर दी. वायनाड लैंडस्लाइड (Wayanad Landslide) के पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए लोगों की ऐसी कई कहानियां हैं.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने ऐसे कई लोगों से बात की है. रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (CMDRF) में अबतक 110.55 करोड़ रुपये का डोनेशन आ चुका है. डोनेशन देने वालों में दिहाड़ी मजदूरों, छात्रों से लेकर विधवाएं और बुजुर्ग तक शामिल हैं. हर तबके के लोग अपने-अपने स्तर पर डोनेशन दे रहे हैं.

गुल्लक तोड़ कर दान किया

राज्य के त्रिशूर जिले में 7वीं क्लास की स्टूडेंट शिवनन्दना और उसकी बहन शिवान्या , इन दोनों बहनों ने अपनी गुल्लक में जुटाए गए 3050 रुपये दान कर दिए. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, दोनों बच्चियों ने जब वायनाड में हुई त्रासदी देखी तो उन्होंने तय किया कि वो भी लोगों की मदद करेंगी. उन्होंने अपने माता-पिता से कहा कि वो भी इस त्रासदी में लोगों की मदद करना चाहती हैं. 

इन दोनों बच्चों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए अपनी गुल्लक में जुटाए पैसे दान में देने के लिए दे दिए. ये पैसे दोनों ने बीते एक साल में जुटाए थे. दोनों ने कहा कि टीवी और साइकिल बाद में खरीदी जा सकती है पर अभी मदद करना ज़रूरी है. शिवनन्दना और शिवान्या का परिवार मात्र 600 स्क्वायर फ़ीट के छोटे से घर में रहता है, पर इस छोटे से घर में इतना बड़ा दिल रखने वाले दोनों बच्चों ने सभी का दिल जीत लिया.

ऑपरेशन के पैसे थे

तिरुवनंतपुरम की रहने वाली 76 साल की सावित्री एल के पैरों में दिक्कत है. उनके दोनों पैरों का ऑपरेशन होना है. लेकिन जब उन्होंने वायनाड में हुई तबाही देखी तो उनका हृदय पसीज गया. एग्रीकल्चर लेबर पेंशन से उन्हें जो पैसे मिले थे, उसे उन्होंने दान में दे दिया. सावित्री कहती हैं कि उनके पैरों का दर्द असहनीय है पर जब उन्होंने वायनाड से आई तस्वीरें और वीडियो देखे तो उनसे रहा नहीं गया. सावित्री कहती हैं, 
 

"मेरे पैरों का दर्द उनके दर्द से बड़ा नहीं है. कम से कम मैं तीन वक्त का खाना तो खा पा रही हूं. सर्जरी बाद में होगी."

व्हीलचेयर वाली कार लेनी थी

मोहम्मद फिदेल दूसरी क्लास में पढ़ता है. फिदेल को 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी' नामक एक बीमारी है. फिदेल के माता-पिता एक ऐसी कार लेना चाहते हैं जिसमें उसकी व्हीलचेयर फिट आ सके. फिदेल को हर महीने 'डिसेबिलिटी पेंशन' मिलती है. फिदेल ने तय किया कि इन पैसों को वो वायनाड के पीड़ितों के लिए दान करेगा. फिदेल ने अपने मां-बाप के सामने ये इच्छा जाहिर की तो मां-बाप ने भी मना नहीं किया. फिदेल की गुल्लक में जो 16 हजार रुपये थे, वो उसने दान कर दिए. फिदेल के मां-बाप कहते हैं कि ये उसका फैसला है. उसने कहा है कि कार इंतजार कर सकती है, पहले मदद करना जरुरी है.

केरल में इससे पहले भी मुख्यमंत्री राहत कोष में करोड़ों रुपये दान किए गए हैं. 2018 और 2019 में आई बाढ़ में भी लोगों ने बढ़-चढ़कर दान दिया था. साथ ही कोरोना महामारी के दौरान भी एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का डोनेशन आया था.

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