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साल भर से केंद्र सरकार को दी जा रही थी ऑक्सीजन के लिए चेतावनी, तब क्या करते रहे?

नवंबर 2020 में ही चेताया गया था ऑक्सीजन की कमी को लेकर.

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कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सीजन की मांग कई गुना बढ़ गई. लोग इसके लिए दर-दर भटके. हालांकि ऑक्सीजन को सही तरह से मैनेज करने की बात पिछले साल ही खास कमेटी ने कही थी.. फोटो- PTI
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अमित
23 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 23 अप्रैल 2021, 10:14 AM IST)
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कोरोना की देश में दूसरी लहर के बीच ऑक्सीजन की किल्लत बड़ी समस्या के रूप में सामने आई है. ऑक्सीजन के लिए देश भर के अस्पताल हांफ रहे हैं. हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट को अस्पतालों में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए आगे आना पड़ा. दिल्ली हाई कोर्ट ने तो 21 अप्रैल को केंद्र सरकार से यह तक कह दिया कि आप उधार मांगिए, खरीदिए या चोरी करिए लेकिन कहीं से भी ऑक्सीजन का इंतजाम करिए. आखिर ऑक्सीजन की इतनी किल्लत के हालात कैसे बन गए? क्या इन हालातों का किसी को कोई आभास नहीं था? अगर था, तो किया क्या गया. आइए जानते हैं विस्तार से. पिछले साल ही आगाह कर दिया गया था ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में 23 अप्रैल को छपी एक रिपोर्ट 
के मुताबिक, साल 2020 में लॉकडाउन के एक हफ्ते बाद सेंटर फॉर प्लानिंग द्वारा गठित अफसरों के 11 सदस्यों वाले एक समूह ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर सरकार को अलर्ट किया था. यह एम्पावर्ड ग्रुप 6 (EG-6) था, जिसे प्राइवेट सेक्टर, एनजीओ और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करने के लिए बनाया गया था. इस कमेटी ने पहली बार सरकार को ठीक एक साल पहले 1 अप्रैल, 2020 को और दूसरी बार नवंबर 2020 में हुई बैठकों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर चेताया था.
इस मीटिंग में कहा गया था,
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नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत के प्रिंसिपल सांइटिफिक एडवाइजर के विजय राघवन, एनडीएमए सदस्य कमल किशोर और भारत सरकार के कई इकाइयों के आधा दर्जन अधिकारी मौजूद थे. इनमें पीएमओ, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय आदि से भी लोग शामिल थे. इन बातों पर एक्शन क्या हुआ? बैठक में शामिल एक अफसर के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है,
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रिकॉर्ड बताता है कि बैठक के 4 दिन बाद 9 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई ताकि कोरोना महामारी के मद्देनजर मेडिकल ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मुहैया कराई जा सके. इस कमेटी के अध्यक्ष डीपीआईआईटी सचिव गुरुप्रसाद महापात्रा थे.
बता दें कि खास कमेटी EG6 ने जब ऑक्सीजन की कमी का मामला उठाया था उस वक्त देश में रोज सिर्फ 2000 कोरोना के केसेज सामने आ रहे थे.
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हर तरह के इंतजाम की बात हुई लेकिन ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं हो सका .
हेल्थ मिनिस्ट्री ने भी ऑक्सीजन पर चेताया था ऐसा नहीं है कि ऑक्सीजन को लेकर सिर्फ EG6 ने ही आगाह किया था संसदीय स्थायी कमेटी की एक मीटिंग 16 अक्टूबर 2020 को हुई थी. समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली इस कमेटी के सामने केंद्रीय हेल्थ सेक्रेटरी राजेश भूषण ने बताया था कि कोविड मरीजों के लिए ऑक्सीजन किस तरह से कारगर साबित हो रही है. संसदीय कमेटी की एक रिपोर्ट “The Outbreak of Pandemic Covid-19 and Its Management” में कहा गया है,
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इस साल क्या हुआ? अब इस साल में आते हैं. कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत हो रही थी. 30 मार्च, 2021 को महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के भीतर ऑक्सीजन की इकाइयों को रेग्युलराइज और ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर एक आदेश जारी किया. इस आदेश में कहा गया.
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जिस दिन यह आदेश दिया गया उस दिन देशभर में कोरोना के 53,000 मरीज रोज आ रहे थे. कोरोना की सेकेंड वेव ने रफ्तार पकड़ना शुरू ही किया था.
वहीं, भारत सरकार ने इंडस्ट्री को इस तरह का आदेश पिछले हफ्ते भेजा है. इसे भी 22 अप्रैल, 2021 से लागू किया गया है. इसमें ऑक्सीजन के 60 फीसदी उत्पादन को मेडिकल इस्तेमाल के लिए रखने की बात कही गई है.

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