विवेक तिवारी केस: पुलिस ने कहा, प्रशांत चौधरी ने बचाव में नहीं की थी हत्या
पुलिस ने इसे 'कोल्ड-ब्लडेड मर्डर' का मामला बताया है.
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तस्वीर में बाईं तरफ है प्रशांत चौधरी. UP पुलिस शुरुआत में प्रशांत को बचाने की कोशिश कर रही थी. लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा, उसके बाद जाकर पुलिस मुस्तैद हुई. दाहिनी ओर विवेक तिवारी हैं.
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ऐपल के एक्जिक्यूटिव विवेक तिवारी की हत्या का केस. 19 दिसंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी चार्जशीट दाखिल की. इसमें आरोपी है कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी. पुलिस ने प्रशांत की आत्मरक्षा में गोली चलाने वाली थिअरी नकार दी है. इसे 'कोल्ड-ब्लडेड मर्डर' का मामला बताया है. प्रशांत के साथ घटना के समय मौजूद कॉन्स्टेबल संदीप कुमार पर मर्डर के आरोप नहीं हैं. उनके ऊपर IPC के सेक्शन 334 के तहत जान-बूझकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है. विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी का भी बयान आया है. उन्होंने न्यूज़ एजेंसी ANI से बात की. कहा कि प्रशांत के खिलाफ की गई कार्रवाई सही है.
केस क्या है? ये केस 29 सितंबर का है. उस रात लखनऊ में विवेक तिवारी कार से घर जा रहे थे. उनके साथ थीं सना खान. सना और विवेक एक ही दफ़्तर में काम करते थे. रास्ते में ये वारदात हुई. विवेक तिवारी को गोली मारी प्रशांत चौधरी ने. बाद में प्रशांत ने कहा कि विवेक उन्हें गाड़ी से कुचलने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने खुद को बचाने की कोशिश की. इस दौरान गोली चली और विवेक को लग गई. इसी गोली ने उनकी जान ले ली.
विवेक तिवारी के हत्यारे प्रशांत चौधरी को कौन देने जा रहा है पांच करोड़ रुपये?

ये हैं सना खान. घटना के वक़्त सना विवेक के साथ कार में मौजूद थीं. उनके और विवेक के रिश्तों के बारे में भी काफी अनाप-शनाप लिखा गया बाद में.
IG ने क्या कहा प्रशांत के बारे में? इंडियन एक्सप्रेस में अवनीश मिश्रा की रिपोर्ट छपी है.
इन्होंने IG सुजीत पाण्डेय का बयान दिया है अपनी ख़बर में. इसके मुताबिक, IG ने चार्जशीट के बारे में बताते हुए कहा-
SIT की जांच क्या कहती है? इस मामले की जांच के लिए एक SIT भी गठित की गई थी. इसने भी अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है DGP को. इसमें गोमती नगर थाने के SHO दुर्गा प्रसाद तिवारी और सर्किल ऑफिसर चक्रेश मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना के बाद इन दोनों ने ही अपनी ड्यूटी नहीं निभाई. ज़रूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की. इस केस के बाद शुरुआती दिनों में उत्तर प्रदेश पुलिस के बर्ताव पर भी काफी सवाल उठे थे. पुलिस पर इल्ज़ाम लगा कि वो प्रशांत को बचाने की कोशिश कर रही है.
विवेक तिवारी की हत्या करने वाले को क्यों बचा रही थी यूपी पुलिस
पढ़ें: विवेक तिवारी हत्याकांड: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पकड़ा गया हत्यारे पुलिसवाले प्रशांत चौधरी का झूठA senior employee of Genpact committed suicide at his residence in Greater Noida on Dec 18; Nishank Sharma(in pic), CO Gr. Noida, says "He was terminated from the services over sexual harassment allegations levelled by 2 of his office colleagues. Further investigation underway" pic.twitter.com/4RpHUO6PIq
— ANI UP (@ANINewsUP) December 20, 2018
केस क्या है? ये केस 29 सितंबर का है. उस रात लखनऊ में विवेक तिवारी कार से घर जा रहे थे. उनके साथ थीं सना खान. सना और विवेक एक ही दफ़्तर में काम करते थे. रास्ते में ये वारदात हुई. विवेक तिवारी को गोली मारी प्रशांत चौधरी ने. बाद में प्रशांत ने कहा कि विवेक उन्हें गाड़ी से कुचलने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने खुद को बचाने की कोशिश की. इस दौरान गोली चली और विवेक को लग गई. इसी गोली ने उनकी जान ले ली.
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ये हैं सना खान. घटना के वक़्त सना विवेक के साथ कार में मौजूद थीं. उनके और विवेक के रिश्तों के बारे में भी काफी अनाप-शनाप लिखा गया बाद में.
IG ने क्या कहा प्रशांत के बारे में? इंडियन एक्सप्रेस में अवनीश मिश्रा की रिपोर्ट छपी है.
इन्होंने IG सुजीत पाण्डेय का बयान दिया है अपनी ख़बर में. इसके मुताबिक, IG ने चार्जशीट के बारे में बताते हुए कहा-
हमने ब्योरे से जांच की. इसके बाद हमने IPC की दफ़ा 302 के तहत प्रशांत चौधरी पर हत्या का आरोप लगाया है. प्रशांत का दावा था कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई. हमने अपनी जांच में पाया कि प्रशांत की जान पर कोई ख़तरा नहीं था. न ही उन्हें कोई ऐसा जख़्म ही लगा.विवेक हत्याकांड : SSP का आदेश, फिर भी शाम तक जेल क्यों नहीं गया था सिपाही प्रशांत?
SIT की जांच क्या कहती है? इस मामले की जांच के लिए एक SIT भी गठित की गई थी. इसने भी अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है DGP को. इसमें गोमती नगर थाने के SHO दुर्गा प्रसाद तिवारी और सर्किल ऑफिसर चक्रेश मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना के बाद इन दोनों ने ही अपनी ड्यूटी नहीं निभाई. ज़रूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की. इस केस के बाद शुरुआती दिनों में उत्तर प्रदेश पुलिस के बर्ताव पर भी काफी सवाल उठे थे. पुलिस पर इल्ज़ाम लगा कि वो प्रशांत को बचाने की कोशिश कर रही है.
विवेक तिवारी की हत्या करने वाले को क्यों बचा रही थी यूपी पुलिस

