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ट्रंप ने शपथ ली और विवेक रामास्वामी उनके कैबिनेट से बाहर हो गए, आखिर ऐसा भी क्या हो गया

Donald Trump के शपथ लेने के कुछ ही घंटे बाद खबर आई कि भारतीय मूल के उद्यमी Vivek Ramaswamy अब Doge का हिस्सा नहीं होंगे. पिछले साल नवंबर में ट्रंप ने Elon Musk और रामास्वामी को DOGE के को-लीडर्स के तौर पर नियुक्त किया था.

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vivek ramaswami donald trump elon musk
विवेक रामास्वामी DOGE से अलग हो गए हैं. (इंडिया टुडे)
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आनंद कुमार
21 जनवरी 2025 (पब्लिश्ड: 10:24 AM IST)
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भारतीय मूल के उद्यमी विवेक रामास्वामी (Vivek Ramaswami) डिपार्टमेंट ऑफ एफिशिएंसी (DOGE) का हिस्सा नहीं रहेंगे. वॉइट हाउस ने इसकी जानकारी दी है. रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे विवेक रामास्वामी ने ओहियो के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ने का संकेत दिया है. 20 जनवरी को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही विवेक के DOGE से हटने की पुष्टि हो गई. गवर्नमेंट एफिशिएंसी कमीशन की प्रवक्ता अन्ना केली ने DOGE के गठन में मदद के लिए रामास्वामी की महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अन्ना केली ने एक बयान जारी कर बताया,

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पिछले साल नवंबर में डॉनल्ड ट्रंप ने एलन मस्क और विवेक रामास्वामी को DOGE के को-लीडर्स के तौर पर नियुक्त किया था. मस्क की पसंदीदा क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर बने DOGE का उद्देश्य संघीय संचालन को सुव्यवस्थित करना और साथ ही बेकार के खर्चों में कटौती करना है. यह विभाग सरकार के बाहर काम करेगा.

विवेक रामास्वामी ने एक एक्स पोस्ट कर DOGE से अलग होने के बाद प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा, 

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CBS न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रामास्वामी और एजेंसी के कर्मचारियों के बीच मनमुटाव उनके पद छोड़ने की एक बड़ी वजह है. मस्क के करीबी सूत्रों का दावा है कि वह DOGE के संचालन में रामास्वामी की सीमित भागीदारी से असंतुष्ट थे.

ये भी पढ़ें - अमेरिका में सिर्फ दो जेंडर, राष्ट्रपति बनते ही सामने आए डॉनल्ड ट्रंप के इरादे

कौन हैं विवेक रामास्वामी?

विवेक रामास्वामी भारतीय मूल के अमेरिकी उद्यमी है. विवेक के माता-पिता मूल रूप से केरल के रहने वाले हैं. जो अमेरिका में जाकर बस गए थे.   विवेक की पैदाइश अमेरिका के ओहायो की है. उन्होंने हार्वर्ड और येल जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज से पढ़ाई की. हार्वर्ड से बायोलॉजी में ग्रेजुएट डिग्री लेने के बाद साल 2014 में विवेक ने रोइवेंट साइंसेज नाम की बयोफार्मास्यूटिकल कंपनी शुरू की. और बाद में स्ट्राइव एसेट मैनेजमेंट फर्म बनाई.

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