'मुस्लिमों तुम पर्दे की गुलामी के खिलाफ क्यों नहीं निकलते?'
मालदा: सड़कों पर लाखों मुस्लिमों के निकलने पर सवाल उठा रहे हैं खुदा के ये बंदे.
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फोटो - thelallantop
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दो नेताओं ने विवादित बयान दिया. पश्चिम बंगाल के मालदा की सड़कों पर निकल आए ढाई लाख मुस्लिम. खूब आग लगाई. बवाल काटा. पर ये सभ्य लोगों के काम थोड़ी हैं. दी लल्लनटॉप ने भी खबर वाले दिन यही बात कही. अब लोग भी कह रहे हैं. फेसबुक पर मालदा वाले बवाल पर कुछ लोग जमकर लिख रहे हैं.
'माई नेम इज खान' में डायलॉग है. दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं. अच्छे और बुरे. यानी अच्छे लोग अमन की बात करते हैं. और बुरे बस बुरा करते हैं. आंख के बदले आंख वाली सोच खत्म होनी चाहिए. बस तो पढ़िए तीन मुस्लिमों की इसी मुद्दे पर फेसबुक पोस्ट. जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. यहां हमारे मुस्लिम लिखने और उनकी पोस्ट लगाने के पीछे मकसद बस एक है. हर जगह दो तरह के लोग होते हैं. अच्छे और बुरे.
खान शकील की फेसबुक पोस्ट: तुम औरतों के सिर पर लटकी तलवार के खिलाफ क्यों नहीं निकलते?
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शमीम अहमद की फेसबुक पोस्ट: तुम उनकी उम्मत का अपमान कैसे कर सकते हो?
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मुबारक अली की फेसबुक पोस्ट: मेरी तरह खुदा का भी खाना खराब है
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